अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया मजबूती ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित बातचीत को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण तेल के दाम ऊपर चढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर सरकारी बॉन्ड यील्ड पर पड़ रहा है। बॉन्ड यील्ड में आ रही इस तेजी के चलते डेट मार्केट में बिकवाली का नया दौर शुरू हो गया है, जिससे शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो इक्विटी में जोखिम लेकर निवेश करने का आकर्षण स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है।
वॉल स्ट्रीट पर इक्विटी रिस्क प्रीमियम में आई गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का बड़ा सबब बन गई है। अमेरिकी बेंचमार्क सूचकांक S&P 500 की मौजूदा अर्निंग्स यील्ड अब 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड से और नीचे फिसल चुकी है। ऐतिहासिक रूप से जब शेयरों की अर्निंग्स यील्ड बॉन्ड यील्ड से कम हो जाती है, तो ट्रेजरी सिक्योरिटीज शेयरों के मुकाबले अधिक आकर्षक निवेश विकल्प के रूप में उभरती हैं। निवेशक अब शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को उचित ठहराने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, क्योंकि जोखिम-मुक्त सरकारी प्रतिभूतियों से ही बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बन रही है।
मुद्रास्फीति का डर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर नजर
ऊर्जा कीमतों में उछाल सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ाने का काम कर रहा है। तेल महंगा होने से उत्पादन और परिवहन लागत में बढ़ोतरी होती है, जिससे केंद्रीय बैंकों के सामने ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की मजबूरी खड़ी हो जाती है। इस पृष्ठभूमि में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई हैं। बाजार में इस बात की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगामी अक्टूबर बैठक में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। फेडरल रिजर्व की इस संभावित आक्रामक नीति ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने एक समान कदम उठाते हुए अपनी ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स यानी 25 bps की बढ़ोतरी की थी। दोनों ही प्रमुख केंद्रीय बैंक इस समय महंगाई के जोखिमों का सामना कर रहे हैं। इन दोनों संस्थानों ने संकेत दिया है कि मौद्रिक नीति से जुड़े उनके भविष्य के सभी फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। इस रुख से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में करने के लिए कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बढ़त और मुद्राओं पर दबाव
भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच अमेरिकी डॉलर एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूत होकर उभरा है। विदेशी मुद्रा बाजार में इसका सीधा प्रभाव प्रमुख करेंसी जोड़ों पर देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी AUD/USD सप्ताह की शुरुआत में 0.7000 के स्तर का बचाव करने की कोशिश कर रही है। मजबूत डॉलर के कारण यह जोड़ी 4 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही है। उच्च तेल कीमतों से उपजी महंगाई की आशंकाएं, अक्टूबर में फेड दर वृद्धि के बढ़ते दांव और अमेरिका-ईरान तनाव डॉलर को लगातार समर्थन दे रहे हैं। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA के नीतिगत फैसलों से पहले इस करेंसी पेयर पर दबाव बना हुआ है।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी USD/JPY में गिरावट पर खरीदारी देखने को मिली है। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की अटकलों के चलते शुक्रवार को जो गिरावट आई थी, उसमें से कुछ हिस्से की भरपाई हो गई है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान के नरम रुख वाले मिनट्स ने येन की बढ़त को सीमित कर दिया है। अमेरिका-ईरान गतिरोध के कारण कच्चे तेल में तेजी और फेड द्वारा अक्टूबर में संभावित दर वृद्धि से डॉलर को मिली नई गति ने USD/JPY को दोबारा 158.00 के स्तर की तरफ बढ़ा दिया है।
सोने और अन्य संपत्तियों में हलचल
कमोडिटी और अन्य परिसंपत्ति वर्गों में भी यील्ड की बढ़ोतरी का व्यापक असर देखा गया है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई और पीली धातु बिकवाली के दबाव में आकर प्रति ट्रॉय औंस 4,100 डॉलर के करीब आ गई। सोने का यह स्तर इससे पहले अगस्त की शुरुआत में देखा गया था। वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के दोबारा उभरने के बावजूद, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में निरंतर उछाल के कारण गैर-यील्ड वाली संपत्ति सोने पर भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है। पिछले सप्ताह 4% से अधिक की बढ़त दर्ज करने के बाद बिटकॉइन की इस तेजी की गति हालिया उच्चतम स्तरों के पास आकर धीमी पड़ती दिखी है। हालांकि, स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में संस्थागत पूंजी प्रवाह के समर्थन से बड़े निवेशकों की मजबूत मांग अब भी बनी हुई है। वहीं ब्रिटेन में आर्थिक चिंताओं के गहराने के साथ डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ हद तक शांत हुई हैं, लेकिन कीमतें लगातार चढ़ रही हैं, जिससे बाजार फेड के आक्रामक दरों के चक्र की जरूरत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े ट्रेड के भविष्य का आकलन करने में जुटा है।

















