भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर इतिहास नहीं बनातीं, बल्कि पूरे प्रोडक्शन हाउस की किस्मत बदल देती हैं। साल 1989 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'चांदनी' ऐसी ही एक मिसाल है। उस दौर में यशराज फिल्म्स का बैनर भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा था और लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। हालांकि, श्रीदेवी, ऋषि कपूर और विनोद खन्ना अभिनीत इस लव ट्रायंगल ने सिनेमाघरों में दस्तक देते ही तहलका मचा दिया। इस फिल्म ने अपने निर्माण बजट से लगभग तीन गुना कमाई करके यशराज बैनर को सफलता के नए शिखर पर पहुंचा दिया।
ऋषि कपूर वाले किरदार के लिए पहली पसंद थे अनिल कपूर
फिल्म 'चांदनी' के निर्माण से जुड़ा एक बहुत ही दिलचस्प किस्सा इसके कास्टिंग प्रक्रिया को लेकर है। इस सदाबहार फिल्म में मुख्य अभिनेता की भूमिका निभाने के लिए पहली पसंद ऋषि कपूर नहीं, बल्कि अनिल कपूर थे। अनिल कपूर को यह रोल ऑफर किया गया था, लेकिन किसी वजह से वह इसका हिस्सा नहीं बन पाए और आखिरकार यह रोल ऋषि कपूर की झोली में चला गया। ऋषि कपूर और श्रीदेवी की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया और यह फिल्म उनके करियर का सबसे बड़ा माइलस्टोन बन गई। इसके अलावा, फिल्म में विनोद खन्ना ने भी एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विनोद खन्ना को उस समय मुख्य रूप से उनकी एक्शन हीरो वाली छवि के लिए जाना जाता था, लेकिन निर्देशक ने इस फिल्म में उनकी इस सख्त छवि को तोड़ते हुए उन्हें एक रोमांटिक हीरो के रूप में पेश किया।
शादियों का ऑल-टाइम फेवरेट गाना और यूट्यूब पर 152 मिलियन व्यूज
फिल्म 'चांदनी' के सभी गीत बेहद लोकप्रिय हुए थे, लेकिन इसका एक सगाई वाला गाना आज 37 साल बाद भी भारतीय शादियों और संगीत समारोहों में सिर चढ़कर बोलता है। 'मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कंहारों' शीर्षक वाला यह गीत आज भी दुल्हन यानी बन्नो के लिए हर शादी में बजाया जाता है। इस गाने को यूट्यूब पर 152 मिलियन से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है। यह सुपरहिट गाना एक प्रसिद्ध लोकगीत से प्रेरित है और इस पर एक पंजाबी गाना भी बन चुका है।
कहानी का टर्निंग पॉइंट और पामेला चोपड़ा की सुरीली आवाज
फिल्म के भीतर यह गाना श्रीदेवी और ऋषि कपूर के किरदार की सगाई के मौके पर फिल्माया गया था। दृश्य में दिखाया गया है कि श्रीदेवी अपने मंगेतर ऋषि कपूर के कहने पर खुशी-खुशी नाचने लगती हैं। हालांकि, उनका इस तरह सार्वजनिक रूप से नाचना उनके होने वाले ससुराल वालों को बिल्कुल पसंद नहीं आता, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनके घर की बहू इस तरह सबके सामने नाचे। गाने के बोल और दृश्य में दिखाया गया है कि कैसे नायिका अपने पिया के एक बार बुलाने पर दौड़ी चली आती है। यह गाना सिर्फ एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं था, बल्कि यहीं से फिल्म की पूरी कहानी एक नया मोड़ लेती है।
इस क्लासिक गीत को पामेला चोपड़ा ने अपनी सुरीली आवाज में गाया था। गाने के बेहद खूबसूरत बोल महान गीतकार आनंद बक्शी ने लिखे थे, जबकि इसका कर्णप्रिय संगीत प्रसिद्ध संगीत जोड़ी शिव-हरी ने तैयार किया था। इस संगीत संयोजन ने गाने को अमर बना दिया, जो आज भी हर पीढ़ी के संगीत प्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर देता है।



















