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15 अगस्त को सरकारी इमारतों पर केवल तिरंगा फहराने की नेहरू की जिद और 10 अगस्त 1947 की दो ऐतिहासिक घटनाएंभारत
10 अग॰ 2026, 4:56 am (2 घंटे पहले)· 0

15 अगस्त को सरकारी इमारतों पर केवल तिरंगा फहराने की नेहरू की जिद और 10 अगस्त 1947 की दो ऐतिहासिक घटनाएं

आजादी से ठीक पांच दिन पहले जवाहरलाल नेहरू और लॉर्ड माउंटबेटन के बीच यूनियन जैक फहराने को लेकर पत्राचार चल रहा था, वहीं कराची में पाकिस्तान की संविधान सभा की नींव रखी जा रही थी।

भारत की स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा में जब केवल पांच दिन बचे थे, तब देश भर में आजादी के जश्न की जोर-शोर से तैयारियां की जा रही थीं। हालांकि इसी दौरान दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में एक नया और संवेदनशील कूटनीतिक सवाल खड़ा हो गया था। सवाल ब्रिटिश हुकूमत के प्रतीक चिन्ह 'यूनियन जैक' को लेकर था कि भारत के स्वतंत्र होने के बाद इसे सरकारी भवनों पर कब, कैसे और किन मौकों पर फहराया जाएगा। इस गंभीर विषय पर पंडित जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन के बीच 5 अगस्त 1947 से 10 अगस्त 1947 के बीच पत्रों का आदान-प्रदान हुआ।

माउंटबेटन का प्रस्ताव और 10 विशेष तिथियों की सूची

ऐतिहासिक अभिलेखागार में सुरक्षित दस्तावेजों से पता चलता है कि लॉर्ड माउंटबेटन ने 5 अगस्त 1947 को पंडित नेहरू को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में माउंटबेटन ने वर्ष भर की ऐसी 10 विशेष तिथियों का विवरण प्रस्तुत किया था, जिन पर वे चाहते थे कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ ब्रिटिश यूनियन जैक भी सरकारी भवनों पर फहराया जाए।

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माउंटबेटन द्वारा सुझाई गई इस सूची में निम्नलिखित तिथियां शामिल थीं

  • 1 जनवरी: थल सेना दिवस (आर्मी डे)
  • 1 अप्रैल: वायु सेना दिवस (एयर फोर्स डे)
  • 25 अप्रैल: एंजैक डे
  • 24 मई: राष्ट्रमंडल दिवस (कॉमनवेल्थ डे)
  • 12 जून: ब्रिटेन के राजा का आधिकारिक जन्मदिन
  • 14 जून: संयुक्त राष्ट्र ध्वज दिवस
  • 4 अगस्त: ब्रिटेन की महारानी का जन्मदिन
  • 15 अगस्त: भारतीय स्वतंत्रता दिवस
  • 7 नवंबर: नौसेना दिवस (नेवी डे)
  • 11 नवंबर: स्मरण दिवस (रिमेंबरेंस डे)

6 अगस्त 1947: नेहरू का स्पष्ट रुख और स्वतंत्रता दिवस का सम्मान

लॉर्ड माउंटबेटन के इस पत्र का जवाब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अगले ही दिन 6 अगस्त 1947 को दिया। नेहरू ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वे सार्वजनिक भवनों पर दो झंडे फहराने के विचार को समझते हैं, लेकिन 15 अगस्त के दिन वे किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते।

नेहरू ने वाइसराय को लिखा कि 15 अगस्त को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपना एक विशेष ऐतिहासिक महत्व है, इसलिए इस पावन दिन पर केवल और केवल भारतीय तिरंगे को ही अकेले फहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में स्वतंत्रता दिवस की सालगिरह पर भी यही नियम लागू रहना चाहिए।

लंदन स्थित इंडिया हाउस को लेकर विशेष छूट

पंडित नेहरू ने ब्रिटेन के साथ अपने राजनयिक संबंधों और शिष्टाचार के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि ब्रिटेन की राजधानी लंदन स्थित 'इंडिया हाउस' के संबंध में उनसे सलाह मांगी गई थी। भारत की धरती पर भले ही केवल तिरंगा लहराना तय हुआ था, लेकिन नेहरू का मानना था कि लंदन में 15 अगस्त को इंडिया हाउस की इमारत पर भारतीय ध्वज के साथ यूनियन जैक फहराना शिष्टाचार के लिहाज से उचित होगा। इस बाबत उन्होंने लंदन में भारत के उच्चायुक्त को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए थे।

9 और 10 अगस्त: संशोधित पत्र और भविष्य पर सहमति

नेहरू के पत्र के जवाब में लॉर्ड माउंटबेटन ने 9 अगस्त 1947 को पुनः एक पत्र लिखा। उन्होंने अपनी पिछली सूची से 15 अगस्त 1947 की तारीख को हटा दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आजादी के पहले दिन भारत की इमारतों पर यूनियन जैक नहीं फहराया जाएगा। हालांकि, माउंटबेटन ने प्रस्ताव दिया कि भविष्य में 15 अगस्त के दिन दोनों नए डोमिनियन (भारत और पाकिस्तान) के उच्चायुक्त मिलकर इस बात पर विचार कर सकते हैं कि यूनियन जैक फहराया जाए या नहीं।

इसके बाद 10 अगस्त 1947 को नेहरू ने माउंटबेटन को एक संक्षिप्त और महत्वपूर्ण संदेश भेजा। उन्होंने 9 अगस्त के पत्र के लिए धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि वे अगले वर्ष 15 अगस्त के सवाल पर पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर विचार करने के लिए सहमत हैं। नेहरू ने इस मुद्दे का तुरंत फैसला न करके भविष्य के अंतर-सरकारी विचार-विमर्श पर छोड़ दिया।

कराची में 10 अगस्त: जोगेंद्रनाथ मंडल की भूमिका

जिस समय दिल्ली में झंडे के प्रोटोकॉल को लेकर नेहरू और माउंटबेटन के बीच पत्र लिखे जा रहे थे, ठीक उसी दिन यानी 10 अगस्त 1947 को कराची में पाकिस्तान की नई संविधान सभा की शुरुआती प्रक्रिया चल रही थी। इस सत्र में बंगाल के प्रमुख दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।

जोगेंद्रनाथ मंडल का मानना था कि अनुसूचित जाति के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए मुस्लिम लीग के साथ राजनीतिक सहयोग आवश्यक है। 1946 में हुए भीषण कलकत्ता दंगों (डायरेक्ट एक्शन डे) के समय भी उन्होंने दलित समुदाय से साम्प्रदायिक हिंसा से दूर रहने की अपील की थी। इसी राजनीतिक संबंध के कारण वे मोहम्मद अली जिन्ना के काफी करीब आए।

10 अगस्त को अस्थायी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद अगले दिन यानी 11 अगस्त 1947 को मंडल ने आधिकारिक रूप से मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान की संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष घोषित किया। इसके बाद जिन्ना ने अपना प्रसिद्ध भाषण दिया जिसमें उन्होंने नए देश में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों की बात कही थी। इस प्रकार 10 अगस्त 1947 का दिन भारतीय उपमहाद्वीप के दो अलग-अलग राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बना।

सवाल-जवाब

माउंटबेटन ने 5 अगस्त 1947 को नेहरू को क्या प्रस्ताव भेजा था?
माउंटबेटन ने 10 विशेष दिनों की एक सूची भेजी थी जिस पर वे चाहते थे कि भारतीय ध्वज के साथ यूनियन जैक भी फहराया जाए।
15 अगस्त पर यूनियन जैक फहराने के प्रस्ताव पर नेहरू ने क्या निर्णय लिया?
नेहरू ने स्पष्ट किया कि 15 अगस्त को भारत की सरकारी इमारतों पर केवल भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) ही फहराया जाएगा।
लंदन स्थित इंडिया हाउस के लिए क्या नियम तय किया गया था?
नेहरू ने निर्देश दिया कि 15 अगस्त को लंदन स्थित इंडिया हाउस पर भारतीय ध्वज के साथ यूनियन जैक भी फहराया जा सकता है।
10 अगस्त 1947 को कराची में क्या हुआ था?
कराची में पाकिस्तान की नई संविधान सभा की बैठक हुई जिसमें जोगेंद्रनाथ मंडल को अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया।
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