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39 हजार करोड़ का 'घातक' ड्रोन: रडार को चकमा देने में राफेल-तेजस से भी निकलेगा आगेव्यापार
9 जुल॰ 2026, 7:38 am (45 दिन पहले)· 2

39 हजार करोड़ का 'घातक' ड्रोन: रडार को चकमा देने में राफेल-तेजस से भी निकलेगा आगे

भारत अपना महत्वाकांक्षी स्टील्थ लड़ाकू ड्रोन कार्यक्रम 'घातक' को रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (RPSA) के रूप में तेज गति से आगे बढ़ा रहा है। यह तकनीक दुश्मन की रडार प्रणालियों को मात देने में सक्षम होगी और भविष्य के हवाई युद्ध में गेम चेंजर साबित होगी।

भारत ने हाल ही में फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने का एक बड़ा करार किया है, जिसकी कुल लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल जेट मौजूद हैं और नए विमानों के शामिल होने के बाद यह आंकड़ा 150 तक पहुंच जाएगा, जिससे वायुसेना में राफेल के 8 से अधिक स्क्वाड्रन तैयार हो जाएंगे। इसके साथ ही देश स्वदेशी स्तर पर तेजस फाइटर जेट के विकास पर भी काम कर रहा है। इन तमाम प्रगति के बीच, रक्षा वैज्ञानिकों का ध्यान अब एक बेहद खास प्रोजेक्ट पर है जो हवाई युद्ध की पूरी परिभाषा बदल सकता है। यह 'घातक' नाम का एक स्टील्थ ड्रोन है, जिसे रडार और किसी भी प्रकार के एयर डिफेंस सिस्टम से छिपकर हमला करने के लिए विकसित किया जा रहा है।

39 हजार करोड़ का सुरक्षा निवेश

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारत ने अपने स्टील्थ मानव रहित लड़ाकू विमान (UCAV) कार्यक्रम को अब रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (RPSA) की श्रेणी में अपग्रेड कर दिया है। करीब 39 हजार करोड़ रुपये के निवेश वाला यह प्रोजेक्ट केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि एक पूर्ण सैन्य अधिग्रहण योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम भारतीय वायुसेना की युद्ध लड़ने की क्षमता और रणनीतियों में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

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तकनीकी नींव और SWIFT का योगदान

इस पूरे प्रोजेक्ट की आधारशिला SWIFT (Stealth Wing Flying Testbed) के परीक्षणों के जरिए रखी गई थी। इसमें फ्लाइंग-विंग स्टील्थ डिजाइन, ऑटोनोमस फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और विमान के अंदर हथियार रखने के लिए इंटरनल वेपन्स बे जैसी आधुनिक तकनीकों का सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया है। इन तकनीकों का मुख्य लक्ष्य रडार की पकड़ में न आना और दुश्मन के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले हवाई क्षेत्र में आसानी से घुसपैठ करना है। RPSA कार्यक्रम अब इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर उत्पादन और मौजूदा विमानों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने की ओर ले जा रहा है।

प्राइवेट पार्टनरशिप और आत्मनिर्भर भारत

इस प्रोजेक्ट की खासियत इसका डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DCPP) मॉडल है। इसमें निजी रक्षा कंपनियों को भी विकास और निर्माण का हिस्सा बनाया जा रहा है ताकि आधुनिक कंपोजिट सामग्री, एवियोनिक्स, सेंसर और AI तकनीक में उनकी विशेषज्ञता का लाभ लिया जा सके। यह मॉडल न केवल 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को गति दे रहा है, बल्कि सार्वजनिक और निजी भागीदारी को भी मजबूती दे रहा है। राफेल और तेजस अपनी जगह बेहतरीन हैं, लेकिन वे स्टील्थ तकनीक से लैस नहीं हैं, जबकि घातक प्रोग्राम के तहत आने वाले ड्रोन नेक्स्ट जनरेशन के होंगे जिन्हें पकड़ना दुश्मन के एयर डिफेंस के लिए नामुमकिन होगा।

फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में भूमिका

युद्ध के मैदान में 'घातक' को एक अकेले प्लेटफॉर्म के बजाय एक फोर्स मल्टीप्लायर के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। यह उन मिशनों के लिए मुफीद है जो पायलट वाले विमानों के लिए जानलेवा हो सकते हैं, जैसे कि दुश्मन के एयर डिफेंस को नष्ट करना या सटीक हमले करना। इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (MUM-T) है, जहाँ Su-30MKI और भविष्य के AMCA जैसे विमान कमांड संभालेंगे और ये ड्रोन सेंसर या हमलावर के रूप में उनका साथ देंगे। इससे दुश्मन के लिए असली खतरे को पहचानना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

AI और स्वायत्त क्षमता

घातक प्रोजेक्ट में AI और सेंसर फ्यूजन का गहरा इस्तेमाल है। युद्ध के दौरान दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बावजूद यह ड्रोन स्वयं खतरे को भांपने, सही रास्ता चुनने और लक्ष्य को प्राथमिकता देने में सक्षम होगा। यदि यह प्रोजेक्ट अपनी समयसीमा के भीतर पूरा होता है, तो भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास स्वदेशी स्टील्थ लड़ाकू ड्रोन और स्वायत्त स्ट्राइक क्षमता मौजूद है। यह परियोजना भारतीय वायुसेना को नेटवर्क सेंट्रिक और AI आधारित भविष्य की लड़ाई के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।

सवाल-जवाब

घातक प्रोजेक्ट क्या है?
घातक भारत का एक महत्वाकांक्षी स्टील्थ मानव रहित लड़ाकू विमान (UCAV) कार्यक्रम है, जिसे रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (RPSA) के तहत विकसित किया जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 39 हजार करोड़ रुपये है।
यह राफेल और तेजस से कैसे अलग है?
राफेल और तेजस स्टील्थ नहीं हैं, जबकि घातक एक स्टील्थ ड्रोन होगा जिसे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम आसानी से नहीं पकड़ पाएंगे।
इस ड्रोन का मुख्य सैन्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के रडार को चकमा देना, खतरनाक मिशनों में फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करना और AI की मदद से सटीक हमले करना है।
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