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भारतीय वायुसेना की चिंताएं: तेजस से लेकर एम्का तक, हर बड़े रक्षा प्रोजेक्ट में क्यों आ रही है रुकावट?व्यापार
2 घंटे पहले· 0

भारतीय वायुसेना की चिंताएं: तेजस से लेकर एम्का तक, हर बड़े रक्षा प्रोजेक्ट में क्यों आ रही है रुकावट?

भारतीय वायुसेना के सामने फाइटर जेट्स की भारी कमी है और भविष्य के स्वदेशी प्रोजेक्ट्स में देरी ने इसे और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इंजन आपूर्ति की समस्याओं और डिजाइन में बदलाव के चलते 2035 तक लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल नजर आ रहा है।

Karan MalhotraKaran MalhotraCrime Correspondent 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर जेट्स की भीषण कमी से जूझ रही है। यह समस्या किसी से छिपी नहीं है, लेकिन सबसे गंभीर पहलू यह है कि अगले 10 सालों में स्थिति के सुधरने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 2035 से 2040 तक भारतीय वायुसेना के पास पर्याप्त लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैयार हो पाएगा, इस पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा हुआ है। विमान अधिग्रहण से जुड़ी हर योजना किसी न किसी तकनीकी या रणनीतिक बाधा में फंसी दिखाई देती है, जिससे आने वाला दशक काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है।

लड़ाकू विमानों की खरीद किसी सामान्य घरेलू उपकरण की खरीदारी जैसी नहीं होती। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्पष्ट किया था कि फाइटर जेट्स को बाजार से तुरंत नहीं खरीदा जा सकता। इनका निर्माण और अधिग्रहण एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। दुनिया में बहुत कम देश ही ऐसे विमान बनाने में सक्षम हैं और इनके साथ होने वाले सौदों में कई जटिल शर्तें जुड़ी होती हैं। इस कठिन स्थिति के लिए केवल नौकरशाही या सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और समय का प्रबंधन अक्सर नियंत्रण से बाहर होता है।

30 स्क्वाड्रन पर सिमटी ताकत

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों के लगभग 30 स्क्वाड्रन उपलब्ध हैं। एक स्क्वाड्रन में 18 विमान शामिल होते हैं, जबकि पाकिस्तान और चीन जैसे देशों की चुनौतियों को देखते हुए कम से कम 42 स्क्वाड्रन की अनिवार्य आवश्यकता है। चिंता का विषय यह भी है कि इस 30 स्क्वाड्रन की संख्या में मिग-29 और जैगुआर जैसे विमान भी शामिल हैं, जो निकट भविष्य में रिटायर होने वाले हैं। इससे स्क्वाड्रन की कुल संख्या में और गिरावट आएगी। हालांकि, भारत ने इस चुनौती से निपटने के लिए हाथ पर हाथ नहीं धरे थे, इसे समझने के लिए हमें स्वदेशी प्रयासों के इतिहास को देखना होगा।

स्वदेशी तेजस की राह में रोड़े

भारत की लंबी कोशिश रही है कि वह अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर न रहे। इस दिशा में सफलता के रूप में चौथी पीढ़ी के तेजस विमानों को विकसित किया गया है। वर्तमान में 40 तेजस विमान वायुसेना का हिस्सा हैं। इसके बाद अधिक आधुनिक तेजस मार्क-1ए तैयार किया गया, जो रडार और अन्य प्रणालियों के मामले में काफी उन्नत है। ये विमान चीनी चौथी पीढ़ी के जे-10सी लड़ाकू विमानों के मुकाबले कई मामलों में बेहतर माने जाते हैं, जिन्हें पाकिस्तान बड़ी संख्या में इस्तेमाल कर रहा है और अब बांग्लादेश को भी बेचने की तैयारी में है।

वायुसेना ने सरकारी उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 180 तेजस मार्क-1ए के ऑर्डर दिए थे, जिसके तहत पहला विमान फरवरी 2024 में मिलना था। लेकिन, ढाई साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी एक भी विमान नहीं मिल पाया है। इस देरी के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी जीई द्वारा एफ404 इंजनों की आपूर्ति में हो रही देरी है। अब तक कंपनी ने केवल 6 से 7 इंजन ही प्रदान किए हैं, जिससे पूरा कार्यक्रम पटरी से उतर गया है। इसके विपरीत, चीन और पाकिस्तान तेजी से अपने बेड़े को आधुनिक बना रहे हैं, जहां चीन पांचवीं पीढ़ी के जेट संचालित कर रहा है और छठी पीढ़ी के विकास में लगा है।

तेजस मार्क-2 और एम्का की अनिश्चितताएं

कहानी का अगला अध्याय तेजस मार्क-2 है, जिसे 4.5 पीढ़ी का हल्का विमान माना जाता है। यह राफेल जैसे विश्वस्तरीय जेट को टक्कर देने में सक्षम है। हालांकि, यह प्रोजेक्ट दो स्तरों पर फंसा हुआ है। इसके डिजाइन में कुछ कमियों के कारण व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। एचएएल की रिपोर्ट बताती है कि इस सुधार प्रक्रिया में कम से कम 10 महीने और लगेंगे। इसके अलावा, इसके लिए भी जीई के एफ414 इंजन पर निर्भरता है। रिपोर्टों के अनुसार, जीई ने इस इंजन की कीमत में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी कर दी है, जिससे एक इंजन की लागत करीब 200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यदि इंजन बदलने का निर्णय लिया जाता है, तो पूरी डिजाइन बदल जाएगी और प्रोजेक्ट 4 से 5 साल और पीछे चला जाएगा। 2030 तक इन विमानों के बेड़े में शामिल होने की संभावना अब धूमिल दिख रही है।

अंत में, एम्का प्रोजेक्ट की बात करें, जिसके तहत भारत 2035 तक पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी जेट बनाना चाहता है। इसमें भी इंजन की समस्या सबसे बड़ी बाधा है। इस जेट में भी शुरुआती चरण में एफ414 इंजन के इस्तेमाल का प्रस्ताव है, जो पहले ही विवादों में है। इसके अलावा, भारत सरकार ने अभी तक इस विमान के प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए कंसोर्टियम को अंतिम रूप नहीं दिया है, जबकि कंसोर्टियम को तीन साल के भीतर प्रोटोटाइप तैयार करना है।

इसका आप पर असर

भारत में: रक्षा उपकरणों की आपूर्ति में देरी से देश की हवाई सुरक्षा तैयारियों पर असर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में बड़े रक्षा सौदों की लागत और समयसीमा प्रभावित होगी।

सवाल-जवाब

भारतीय वायुसेना को कितने स्क्वाड्रन की जरूरत है?
चीन और पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है।
तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण क्या है?
इसकी डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी जीई द्वारा एफ404 इंजन की आपूर्ति में हो रही कमी है।
क्या तेजस मार्क-2 के प्रोजेक्ट में भी इंजन की समस्या है?
हाँ, तेजस मार्क-2 के लिए जीई एफ414 इंजन की आपूर्ति और उसकी कीमत में तीन गुना बढ़ोतरी ने इस पूरे प्रोजेक्ट को संकट में डाल दिया है।
एम्का (AMCA) प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है?
एम्का भारत का 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोजेक्ट है, लेकिन अभी तक इसके प्रोटोटाइप के लिए कंसोर्टियम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और इसमें भी इंजन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।
#व्यापार#भारतीयवायुसेना#तेजस#रक्षाबजट#लड़ाकूविमान#रक्षाउत्पादन

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