आज के दौर में महिलाएं केवल पारंपरिक दायरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार और उद्योग के मोर्चे पर भी पुरुषों के साथ बराबरी से आगे बढ़ रही हैं। इसी सोच को अमलीजामा पहनाने के लिए आजमगढ़ जिले में महिलाओं को उद्यमी बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक ग्रामीण स्वरोजगार योजना की शुरुआत की गई है। इस पहल का मुख्य मकसद शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपने परिवार के साथ-साथ समाज के विकास में भी अहम भूमिका निभा सकें।
ग्रामीण इलाकों में आर्थिक मजबूती का अभियान
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को आर्थिक तौर पर संबल प्रदान करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत पूरे जिले में कुल 30,218 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जाना है। इन समूहों के जरिए 4 लाख 85 हजार महिलाओं को स्वरोजगार के नए और बेहतर अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जिले में अब तक 6,854 स्वयं सहायता समूह पहले ही गठित किए जा चुके हैं, जिनकी मदद से 1 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को इस बड़े मिशन से जोड़ा जा चुका है।
जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता
इस अभियान के तहत सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण इलाकों के सबसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशन कार्ड धारक परिवारों की महिलाओं को चिन्हित किया जा रहा है ताकि इस योजना का सीधा लाभ उन तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इस प्रक्रिया से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने की योजना है। इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उपायुक्त डॉ. आराधना त्रिपाठी ने विस्तार से जानकारी साझा की है।
प्रशिक्षण के साथ वित्तीय सहायता का प्रावधान
स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न प्रकार के व्यवसायों का हुनर सिखाया जा रहा है, ताकि वे प्रशिक्षण प्राप्त करके अपना खुद का काम शुरू कर सकें। महिलाएं कृषि से जुड़े कार्यों, स्वास्थ्य सेक्टर और अपनी खुद की कैंटीन चलाने जैसे कई व्यवसायों में कदम रख सकती हैं। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए समूह के पास उपलब्ध फंड के अलावा, सीसीएल के जरिए बहुत ही कम ब्याज दर पर 3 से 5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जा रही है। इस वित्तीय मदद का लाभ उठाकर महिलाएं न केवल अपना खुद का कारोबार खड़ा कर सकती हैं, बल्कि आसपास की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए रास्ते खोल सकती हैं।



















