दौड़भाग भरी आधुनिक जीवनशैली में मानसिक दबाव और शारीरिक थकान आम बात हो चुकी है। सुबह से लेकर शाम तक कार्यालय के भारी कामकाज या घरेलू जिम्मेदारियों में उलझे रहने के बाद दिन ढलते-ढलते दिमाग पूरी तरह थक जाता है। ऐसी स्थिति में ऊर्जा पाने के लिए बहुत से लोग चाय या कॉफी का सेवन करते हैं, जिससे तात्कालिक तौर पर तो ताजगी महसूस होती है लेकिन सेहत पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। यदि आप बिना किसी नुकसान के अपने मस्तिष्क को आराम देने का कोई प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपाय तलाश रहे हैं, तो अपराजिता के फूलों की चाय यानी ब्लू टी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।
आयुर्वेद में खास महत्व रखते हैं नीले फूल
दिखने में अत्यंत सुंदर और आकार में छोटे ये नीले फूल न केवल आपके बगीचे की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी इनके अनेक औषधीय गुण बताए गए हैं। फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर चेतन शर्मा ने इस हर्बल पेय के फायदों और इसे तैयार करने की सटीक प्रक्रिया पर रोशनी डाली है। आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार अपराजिता के फूलों से तैयार होने वाली यह चाय मस्तिष्क की शक्ति बढ़ाने और मन को शांत रखने वाली मानी गई है। जो लोग लगातार मानसिक श्रम वाले कार्यों में जुटे रहते हैं, उन्हें अक्सर शाम के समय चिड़चिड़ापन और भारीपन घेर लेता है। ऐसी अवस्था में यह पेय मस्तिष्क की नसों को शांत करता है, जिससे तनाव घटता है और शरीर के भीतर से नई शक्ति का संचार होता है।
तनाव और चिंता से मिलती है मुक्ति
मौजूदा समय में अत्यधिक सोचना और एंग्जायटी होना एक बेहद आम समस्या बन चुका है। जो लोग भारी तनाव से जूझते हैं या जिन्हें अक्सर बेचैनी महसूस होती है, उनके लिए यह हर्बल टी बेहद गुणकारी साबित हो सकती है। यह शरीर में एक प्राकृतिक स्ट्रेस बस्टर के रूप में काम करती है। हालांकि किसी भी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या में केवल इसी उपाय पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना भी उतना ही आवश्यक है। इसके अलावा आयुर्वेद में इस पौधे को शीत वीर्य यानी ठंडी तासीर वाला कहा गया है, जो शरीर के भीतर बढ़े हुए पित्त दोष को संतुलित करने का काम करता है।
शरीर को ठंडक और मौसम के बदलाव में लाभ
गर्मियों और बरसात के मौसम में इस चाय का सेवन करने से पेट और पूरे शरीर को शीतलता मिलती है, जिससे एसिडिटी और सिरदर्द जैसी परेशानियों में भी राहत मिलती है। बरसात के दिनों में जब मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव होता है और लोगों को बाल झड़ने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तब भी कई लोग इसका सेवन करते हैं। हालांकि बालों के कमजोर होने के कई आंतरिक कारण हो सकते हैं, लेकिन इस पेय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में पूरी सहायता करते हैं। यह चाय हर आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी है, विशेष तौर पर बुजुर्गों के लिए जिन्हें शाम के वक्त अधिक कमजोरी या थकान महसूस होती है।
चाय बनाने की आसान और सही विधि
इस अद्भुत नीले रंग की चाय को तैयार करना बहुत सरल है और इसमें बमुश्किल 5 मिनट का समय लगता है। इसे बनाने के लिए आवश्यक सामग्री में एक गिलास पानी और 2 से 3 ताजे अपराजिता के नीले फूल शामिल हैं। इसकी निर्माण विधि के तहत एक बर्तन में एक गिलास पानी लेकर उसमें इन फूलों को डाल दें। अब इसे धीमी आंच पर तब तक अच्छी तरह उबालें जब तक पानी की मात्रा घटकर केवल आधा गिलास न रह जाए। जैसे ही पानी का रंग गहरा नीला हो जाए, इसे छानकर अलग कर लें।
विशेषज्ञ की सलाह और सेवन का तरीका
आयुर्वेदिक डॉक्टर चेतन शर्मा का कहना है कि इस हर्बल टी में भूलकर भी चीनी, दूध या किसी अन्य बाहरी चीज का इस्तेमाल न करें। इसका वास्तविक स्वास्थ्य लाभ तभी प्राप्त होता है जब इसे बिना किसी मिलावट के पूरी तरह प्राकृतिक रूप में पिया जाए। यदि इसका स्वाद फीका लगे तो इसमें हल्का सा शहद या थोड़ा सा नींबू का रस मिलाया जा सकता है। खास बात यह है कि नींबू का रस डालते ही इस पेय का रंग नीले से बदलकर बैंगनी रंग का हो जाता है। हालांकि बुजुर्गों या किसी भी पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को इसे अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।


















