बिहार के विभिन्न जिलों में छोटे स्तर के उद्योगों का तेजी से विस्तार हो रहा है। राज्य के युवा अब दूसरे राज्यों में जाकर नौकरी करने के बजाय अपने ही घर पर रहकर नए स्टार्टअप और व्यवसाय शुरू करने में खासी रुचि दिखा रहे हैं। छोटे बाजारों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक में व्यावसायिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। कई नौजवानों की यह इच्छा होती है कि वे घर के करीब रहकर ही इतनी कमाई कर लें कि उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े। यदि आप भी कुछ इसी तरह का नया काम शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो जहानाबाद जिले के घोसी इलाके के रहने वाले अनुभवी जितेंद्र कुमार के इस सफल बिजनेस मॉडल से बहुत कुछ सीख सकते हैं। जितेंद्र पिछले पांच वर्षों से बाहर से बांस मंगवाकर उसके जरिए चाली, सीढ़ी, फर्नीचर और कई अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रहे हैं।
व्यवसाय शुरू करने से पहले इन महत्वपूर्ण बातों का रखें विशेष ध्यान
जितेंद्र कुमार का कहना है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस अनोखे और मुनाफे वाले बांस के व्यापार में कदम रखना चाहता है, तो उसे कुछ जरूरी बातों पर विशेष गौर करना होगा। आप चाहे किसी भी क्षेत्र या बाजार में अपना नया उद्यम शुरू करें, सबसे पहले वहां की लोकल मार्केट की नब्ज को समझना बेहद जरूरी है। बाजार में किस वस्तु की सबसे ज्यादा मांग बनी हुई है, इसी बात को ध्यान में रखकर ही कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। इस व्यापार की शुरुआत करने के लिए आपको शुरुआती दौर में कम से कम ₹200000 का पूंजी निवेश करना पड़ सकता है। कोई भी बिजनेस शुरू करने के बाद उसमें कड़ी मेहनत की जरूरत होती है और आपको हमेशा सतर्क व एक्टिव रहकर काम करना पड़ता है। आज के समय में बाजार के अधिकांश हिस्सों में बांस से बनी हुई चीजों की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है, इसलिए ग्राहकों की पसंद का हमेशा ख्याल रखना चाहिए।
लागत, माल की खपत और हर महीने होने वाली शुद्ध बचत का पूरा गणित
अपने व्यवसाय के बारे में विस्तार से बताते हुए जितेंद्र कहते हैं कि वे हर महीने कुल तीन ट्रक बांस मंगवाते हैं, जो एक महीने के भीतर पूरी तरह खत्म हो जाता है। एक ट्रक बांस की कीमत लगभग सवा लाख रुपए बैठती है, और इन कच्चे बांसों से वे करीब साढ़े चार लाख रुपए तक के विभिन्न सामान तैयार करते हैं। उनके इस काम में अभी कुल चार कारीगर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। महीने भर में सभी तरह के खर्च, लेबर कॉस्ट और अन्य चीजों को काटने के बाद उनके हाथ में शुद्ध रूप से ₹35000 की बचत बच जाती है। यदि आप भी पूरी लगन, ईमानदारी और मेहनत के साथ इस क्षेत्र में उतरते हैं, तो आप भी इसी तरह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। हालांकि, काम शुरू करने के लिए शुरुआती पूंजी का इंतजाम करना बेहद जरूरी होता है।
चेन्नई की कठिन नौकरी छोड़कर अपने ही घर पर शुरू किया आत्मनिर्भर बनने का सफर
जितेंद्र ने सिर्फ मैट्रिक तक की पढ़ाई की है और वे अपने गृह राज्य लौटने से पहले करीब दो साल तक चेन्नई में रहकर नौकरी करते थे। वहां उन्हें 12 घंटे की लंबी ड्यूटी के बदले मात्र ₹500 ही मिल पाते थे। स्थिति ऐसी थी कि छठ या दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर भी घर वापस लौटना बेहद मुश्किल हो जाता था और ट्रेनों में भारी भीड़ तथा धक्के खाते हुए सफर करना पड़ता था। इन्हीं परेशानियों से तंग आकर उन्होंने अपने घर पर ही रहकर खुद का कुछ काम शुरू करने का पक्का इरादा कर लिया। आज वे अपने परिवार के साथ रहकर ही बहुत अच्छी कमाई कर रहे हैं। वे राज्य के अन्य युवाओं से भी यही अपील करना चाहते हैं कि वे कुछ भी काम करें, लेकिन अपने परिवार के साथ रहकर ही करें। जब आप खुद एक सफल उद्यमी बनेंगे, तो न सिर्फ खुद कमाएंगे बल्कि अपने आसपास के कई अन्य युवाओं को भी रोजगार मुहैया कराएंगे। इस तरह आप समाज से बेरोजगारी की समस्या को दूर करने में भी अपना अहम योगदान दे सकते हैं। इसी सकारात्मक सोच के साथ वे आज अपना कारोबार आगे बढ़ा रहे हैं।
















