बस्तर के मूलचंद ठाकुर का गुलाब फॉर्मूला: 45 दिन में शुरू कमाई, 4 साल तक उत्पादन और सालाना लाखों का मुनाफाव्यापार
15 घंटे पहले· 0

बस्तर के मूलचंद ठाकुर का गुलाब फॉर्मूला: 45 दिन में शुरू कमाई, 4 साल तक उत्पादन और सालाना लाखों का मुनाफा

आर्मी से रिटायर होने के बाद जगदलपुर के मूलचंद ठाकुर ने एक एकड़ में पॉलीहाउस के जरिए गुलाब की हाईटेक खेती शुरू की और अब उन्हें सालाना 6 से 10 लाख रुपए तक का मुनाफा हो रहा है.

गुलाब की फसल को कम जोखिम और अच्छी आमदनी देने वाली खेती के रूप में जाना जाता है. इसे खुले सामान्य खेतों में भी उगाया जा सकता है और पॉलीहाउस के अंदर भी. यह एक सीजनल फसल है, जिसकी खास बात यह है कि एक बार पौधे लगा देने के बाद लगातार चार साल तक गुलाब का उत्पादन लिया जा सकता है. छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर निवासी मूलचंद ठाकुर ने सेना से रिटायरमेंट के बाद इसी खेती में हाथ आजमाया और अच्छा-खासा मुनाफा कमाकर दिखाया.

गुलाब की खेती पर छत्तीसगढ़ सरकार की सब्सिडी

जगदलपुर के मूलचंद ठाकुर ने आर्मी से रिटायर होने के बाद कोई दूसरी नौकरी तलाशने के बजाय गुलाब की हाईटेक खेती को अपनाया और आज वे इसमें पूरी तरह सफल हैं. उनका मानना है कि दूसरे किसान भी उनके इस तरीके को अपनाकर खेती कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं. खास बात यह है कि गुलाब की खेती के लिए पॉलीहाउस तैयार करने पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी मिलती है.

गुलाब की खेती आखिर किस तरह की जाती है, इसी विषय को समझने के लिए लोकल 18 की टीम ने किसान मूलचंद ठाकुर से बातचीत की. उन्होंने बताया कि गुलाब एक सीजनल फसल है और सीजन के दौरान इसमें बढ़िया मुनाफा होता है. फिलहाल वे पॉलीहाउस के भीतर ही गुलाब उगा रहे हैं.

45 दिन बाद ही शुरू हो जाता है उत्पादन

मूलचंद ठाकुर ने बताया कि वे एक एकड़ रकबे में गुलाब की खेती कर रहे हैं और इसके लिए खेत वाली जमीन की जरूरत नहीं पड़ती. सबसे पहले एक बार हल चलाया जाता है, उसके बाद जुताई होती है और फिर रोटावेटर चलाया जाता है. एक बेड से दूसरे बेड के बीच एक फीट की दूरी रखी जाती है और हर बेड तीन फीट चौड़ा होता है. पौधे से पौधे के बीच भी एक फीट का फासला रखा जाता है. पौधों को बेड के दोनों किनारों पर लगाया जाता है और बीच में ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की जाती है. पौधे लगाने के लगभग 45 दिन बाद उत्पादन शुरू हो जाता है, जो चार साल तक चलता रहता है.

कीटों से बचाव के लिए नियमित स्प्रे जरूरी

इस खेती में 19:19:19, 05:23:34 और 00:34:12:61 जैसे उर्वरकों का इस्तेमाल किया जाता है. गर्मी के मौसम में फसल में लगने वाली बीमारियों पर खास नजर रखनी पड़ती है. इस दौरान थ्रिप्स और माइट्स जैसे कीट हमला करते हैं, जिन्हें काबू में रखने के लिए दवाइयों का छिड़काव जरूरी हो जाता है. गर्मी की वजह से इल्ली का प्रकोप भी बढ़ जाता है, इसी कारण नियमित अंतराल पर स्प्रे करते रहना पड़ता है.

एक एकड़ में करीब 22 हजार पौधे लगाए जाते हैं, जिन पर लगभग चार लाख रुपए की लागत आती है. इसके अलावा खाद, मजदूरी और दूसरे खर्चों पर हर महीने तकरीबन 60 हजार रुपए खर्च होते हैं. सीजन के समय इससे अच्छी आमदनी होती है, जबकि सामान्य दिनों में भी सारे खर्च निकालने के बाद करीब 40 हजार रुपए तक की बचत हो जाती है. अगर पूरे साल का औसत देखा जाए और बाजार में अच्छा भाव मिले, तो सालाना 6 से 10 लाख रुपए तक का मुनाफा कमाया जा सकता है.

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