सोने के बाजार में इन दिनों गजब की सुस्ती छाई हुई है और कीमतें काफी समय से एक ही दायरे में अटकी हुई हैं। हालांकि बाजार के जानकारों का कहना है कि यह ठहराव बहुत लंबा नहीं चलने वाला है और आने वाले दिनों में कीमतों में एक बार फिर बड़ी उठापटक देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी दबाव और बॉन्ड यील्ड की चाल
कीमतों में इस सुस्ती की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से निकलकर सामने आ रही है। अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और वहां के रियल तथा बॉन्ड यील्ड काफी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। इन आर्थिक हालातों ने सोने की चमक को कुछ समय के लिए फीका कर दिया है और कीमती धातु पर लगातार भारी दबाव बना हुआ है।
जून के निचले स्तर से संभलने की कोशिश
बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले हफ्ते सोने ने अपने जून के निचले स्तर यानी 3,943 डॉलर प्रति औंस से थोड़ा ऊपर उठकर खुद को संभालने का प्रयास किया था। इसके उलट, अमेरिकी 10-वर्षीय टीआईपी यील्ड के 2.44 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है, जो साल 2025 के उच्च स्तर को भी पार कर सकता है।
मंदी के संकेत और बाजार की प्रतिक्रिया
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह यील्ड इस उच्च स्तर पर टिकी रहती है, तो यह मंदी के दौर के गहराने का सीधा संकेत होगा। ऐसी स्थिति शेयर बाजार के लिए नकारात्मक साबित हो सकती है और साथ ही सोने के भाव को नीचे की तरफ और ज्यादा धकेल सकती है। इन सब चुनौतियों के बीच हालांकि पिछले हफ्ते बाजार में एक मामूली रिकवरी भी दर्ज की गई थी।
लंदन बाजार में लौटी रौनक और डिप-बाइंग
लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर 1.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और भाव बढ़कर 4,067 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए। इस तेजी की बदौलत सोना एक बार फिर 4,000 डॉलर के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में कामयाब रहा। इस अचानक आए उछाल के पीछे मुख्य वजह डिप-बाइंग यानी भाव गिरने पर निवेशकों द्वारा की गई भारी खरीदारी थी। मजबूत डॉलर और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के बावजूद इस निचले स्तर की खरीदारी ने सोने को संभाल लिया।
तकनीकी पहलू और संभावित सपोर्ट स्तर
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि यह हालिया उछाल जनवरी से चले आ रहे मंदी के रुझान के बीच केवल एक आंशिक राहत भर है। यदि सोना यहां से फिसलता है, तो इसका अगला मजबूत सपोर्ट जोन 3,857 डॉलर से 3,887 डॉलर प्रति औंस के दायरे में देखा जा सकता है।
फेडरल रिजर्व के फैसलों पर टिकी निगाहें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय सोना करीब 4,048.98 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। जो लोग खरीदारी की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह समय बेहद सावधानी से बाजार पर नजर रखने का है। आगे की दिशा पूरी तरह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी।
घरेलू बाजार में सोने के भाव और अनुमान
ऐसी उम्मीद है कि इस हफ्ते ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन यदि फेडरल रिजर्व की तरफ से कोई सख्त रुख अपनाया जाता है या महंगाई के आंकड़े उम्मीद से बढ़कर आते हैं, तो डॉलर और मजबूत होगा। ऐसी स्थिति में सोने की कीमतों में फिर से भारी गिरावट आ सकती है। देश के घरेलू बाजार में सोने का मौजूदा भाव ₹1,24,750 के आसपास चल रहा है, जबकि पिछले हफ्ते का उच्च स्तर करीब ₹1,25,300 था। यदि कीमतें यहां से नीचे लुढ़कती हैं, तो यह स्तर ₹118,800 से ₹119,750 तक भी फिसल सकता है।



















