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बिहार के रामेश्वर प्रसाद सिंह ने खीरे की खेती से बदली आर्थिक स्थिति, 60 दिन में हो रही है लाखों की कमाईव्यापार
9 जुल॰ 2026, 7:33 am (45 दिन पहले)· 3

बिहार के रामेश्वर प्रसाद सिंह ने खीरे की खेती से बदली आर्थिक स्थिति, 60 दिन में हो रही है लाखों की कमाई

वैशाली जिले के किसान रामेश्वर प्रसाद सिंह ने पारंपरिक फसलों को छोड़कर खीरे की आधुनिक खेती अपनाई है, जिससे वे कम समय में बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी यह सफलता अब क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

बिहार के वैशाली जिले में खेती का परिदृश्य अब तेजी से बदल रहा है। यहाँ के किसान अब धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर आधुनिक और मुनाफे वाली खेती की ओर रुख कर रहे हैं। वैशाली के नामीदही गांव के रहने वाले रामेश्वर प्रसाद सिंह ने खीरे की व्यावसायिक खेती करके सफलता की एक नई इबारत लिखी है। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक और सूझबूझ के साथ खेती की जाए, तो कम समय में ही बड़ा आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है। उनकी यह मेहनत न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को संवार रही है, बल्कि गांव के अन्य निवासियों और युवाओं के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल बनी है।

परिवर्तन की शुरुआत और उन्नत तकनीक

रामेश्वर प्रसाद सिंह पहले पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, मक्का और धान की बुआई किया करते थे, लेकिन उन फसलों में लागत के मुकाबले लाभ बहुत कम मिलता था। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया। विभाग की सलाह के बाद उन्होंने खीरे की खेती का चयन किया। इस खेती में उन्होंने उन्नत किस्म के बीजों का चयन किया, साथ ही जैविक खाद के प्रयोग और समयबद्ध सिंचाई पर विशेष ध्यान दिया। आधुनिक कृषि तकनीकों ने न केवल उनकी पैदावार में भारी बढ़ोतरी की है, बल्कि इसे अन्य किसानों के लिए भी एक आसान विकल्प बना दिया है क्योंकि इसमें लागत काफी कम आती है।

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कम समय में बड़ी पैदावार और बाजार पहुंच

खीरे की खेती की सबसे बड़ी विशेषता इसका कम समय में तैयार होना है। रामेश्वर के अनुसार, फसल बुआई के महज 45 से 60 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाती है। एक बार फसल तैयार हो जाने पर, इसकी तुड़ाई का सिलसिला कई हफ्तों तक लगातार चलता रहता है। रामेश्वर द्वारा उत्पादित खीरे की मांग स्थानीय बाजारों के अलावा हाजीपुर और राजधानी पटना में भी बहुत अधिक रहती है। इसे अन्य नजदीकी शहरों में भी बड़े पैमाने पर भेजा जाता है। बाजार में लगातार बढ़ती मांग के कारण, उन्हें अपनी उपज को बेचने के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ता और उन्हें सही दाम मिल जाते हैं।

ग्रामीण समृद्धि की नई उम्मीद

रामेश्वर प्रसाद सिंह एक ही सीजन में लाखों रुपये का मुनाफा अर्जित कर रहे हैं, जिसने उनके पूरे परिवार के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है। उनकी इस सफलता को देखकर गांव के युवाओं का रुझान भी खेती की तरफ बढ़ रहा है। अब वहां के कई किसान सब्जियों की उन्नत किस्मों की खेती अपनाकर अपनी आय दोगुनी करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक ढंग से खेती करना और बाजार की जरूरतों को समझना बेहद फायदेमंद है। नामीदही के किसानों ने यह सिद्ध कर दिया है कि कम जमीन और सही नियोजन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाई जा सकती है।

सवाल-जवाब

खीरे की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
खीरे की फसल आमतौर पर बुआई के 45 से 60 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाती है।
रामेश्वर प्रसाद सिंह वैशाली के किस गांव के रहने वाले हैं?
वे वैशाली जिले के नामीदही गांव के निवासी हैं।
फसल कटाई के बाद कहां भेजी जाती है?
तैयार खीरे को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ हाजीपुर, पटना और आसपास के अन्य शहरों में भेजा जाता है।
खीरे की खेती में लाभ का क्या कारण है?
इस फसल में लागत कम आती है और यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत और मुनाफा मिलता है।
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