बस्तर के किसान तुलसी कश्यप ने खीरे की खेती को अपनी कमाई का बड़ा जरिया बना लिया है। वे हर मौसम में खीरे की खेती करते हैं और इससे लाखों रुपये कमा रहे हैं। बाजार में खीरे की मांग साल भर बनी रहती है, लेकिन बरसात के मौसम में इसकी पैदावार खासतौर पर अच्छी होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस फसल में बीमारियों का खतरा भी बहुत कम रहता है, जिससे किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिल जाता है।
दो से तीन महीने में तैयार होने वाली फसल
खीरे की फसल महज दो से तीन महीने में तैयार हो जाती है और इस छोटी अवधि में भी बंपर उत्पादन देती है। आजकल होटल और रेस्टोरेंट में खीरे की भारी मांग रहती है, क्योंकि यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। यही वजह है कि सही तरीके से खेती करने पर किसान कम समय में ढाई से तीन लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।
खेत की तैयारी से लेकर बीज बोने तक का तरीका
तुलसी कश्यप बताते हैं कि खीरे की खेती शुरू करने से पहले खेत की जुताई करनी जरूरी है। इसके बाद रोटावेटर चलाकर दोबारा जुताई की जाती है, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद खेत में बेड बनाए जाते हैं। एक बेड से दूसरे बेड की दूरी साढ़े चार फीट रखी जाती है, जबकि एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच एक फीट की दूरी रखी जाती है। खेती के लिए पौधा तैयार करके भी लगाया जाता है और सीधे बीज डालकर भी बुवाई की जा सकती है। तुलसी कश्यप वीएनआर 212 वैरायटी के खीरे की खेती करते हैं। खाद के तौर पर डीएपी, पोटाश, सुपर फॉस्फेट के साथ-साथ गोबर खाद का इस्तेमाल किया जाता है। एक एकड़ खेत में करीब एक ट्रॉली गोबर खाद डाला जाता है।
डाउनी और पाउडरी मिल्ड्यू से बचाव जरूरी
खीरे की फसल में डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारियां लगने का खतरा रहता है। इनसे बचाव के लिए समय पर फफूंदनाशक का छिड़काव करना जरूरी होता है। बुवाई के करीब एक महीने बाद फसल तैयार हो जाती है और डेढ़ महीने के भीतर इसकी तुड़ाई पूरी तरह खत्म हो जाती है। त्योहारों के मौसम में खीरे की मांग और भी बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छा रेट मिलता है और मुनाफा और बढ़ जाता है।
बारिश में पानी निकासी और मल्चिंग का रखें ध्यान
पौधे को शुरुआती दिनों में ही रस्सी बांधकर बेल के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे फसल को सही आकार और सहारा मिलता है। अगर बरसात के मौसम में खीरे की खेती की जा रही है तो खेत में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था करना बेहद जरूरी है, क्योंकि पानी जमा हो जाने पर पौधा मर सकता है। मल्चिंग की हाईटेक विधि अपनाकर खेती करने पर किसानों को अतिरिक्त फायदा मिलता है, क्योंकि इससे नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं।
एक एकड़ में 60-70 हजार की लागत, तीन लाख तक मुनाफा
तुलसी कश्यप के मुताबिक, एक एकड़ में खीरे की खेती करने पर उनका करीब 60 से 70 हजार रुपये खर्च आया है। इस लागत के बदले उन्हें दो से तीन लाख रुपये तक का मुनाफा मिलने की उम्मीद है। कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली यह खेती अब क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।













