पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक राह
उत्तर प्रदेश के Gonda जिले के एक प्रगतिशील किसान Pawan Kumar Maurya ने अपनी मेहनत और समझदारी से खेती के मायने बदल दिए हैं। पहले वे अन्य किसानों की तरह गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों पर ही निर्भर थे, लेकिन इसमें लागत के हिसाब से मुनाफा नहीं मिल पा रहा था। अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए उन्होंने खेती के तौर तरीकों में बदलाव करने का निर्णय लिया और सब्जी उत्पादन में कदम रखा।
वैज्ञानिक पद्धति का लाभ
Pawan Kumar Maurya ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करने के बजाय खेती को ही अपना मुख्य व्यवसाय चुना। वे बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही खेतों में काम करने का अनुभव था, क्योंकि उनके पिता भी किसान थे। अब वे आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके खेती को प्रोफेशनल तरीके से कर रहे हैं। वर्तमान में वे लगभग 5 बीघा जमीन पर Namdhari वैरायटी की भिंडी की फसल उगा रहे हैं।
बेड विधि से बेहतर पैदावार
खेती के सफल होने का सबसे बड़ा राज 'बेड विधि' है। Pawan Kumar Maurya खेत में बेड तैयार करके उस पर बुवाई करते हैं। इस तकनीक का बड़ा फायदा यह है कि इससे पौधे मजबूत होते हैं और लंबे समय तक फल देते हैं। इसके अलावा, बेड के बीच खाली जगह होने से सिंचाई करना आसान हो जाता है, जिससे जलभराव की समस्या नहीं होती और पौधों में सड़न का खतरा भी कम हो जाता है।
मुनाफे का गणित
TrendKia की रिपोर्ट के अनुसार, 1 एकड़ जमीन में भिंडी की खेती करने पर लगभग 15 से 20 हजार रुपये की लागत आती है। Pawan Kumar Maurya का कहना है कि सही समय पर फसल बाजार में पहुंचने और अच्छे रेट मिलने पर 1 एकड़ से ही लाखों रुपये की कमाई करना संभव है। उनकी योजना है कि आने वाले समय में वे अपनी खेती का रकबा और अधिक बढ़ाएंगे ताकि मुनाफे को और बेहतर किया जा सके।













