बिहार के छपरा जिले के युवा अब पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर पशुपालन और पोल्ट्री व्यवसाय में अपार संभावनाएं तलाश रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र मांझी से प्राप्त तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ उठाकर ये युवा न केवल नगदी फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, बल्कि पोल्ट्री फार्मिंग और बकरी पालन जैसे क्षेत्रों में भी अपनी सफलता की इबारत लिख रहे हैं। इसी प्रेरणादायक सफर का हिस्सा कोपा निवासी आलमगीर, जिन्हें चांद के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने जयप्रकाश विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद एक अलग राह चुनी। नौकरी के पीछे भागने के बजाय उन्होंने खुद का उद्यम खड़ा करने का साहस दिखाया।
पिता की छोटी दुकान से मिली सफलता की प्रेरणा
आलमगीर के पोल्ट्री व्यवसाय का आधार उनके पिता के संघर्ष में छिपा है। उनके पिता छपरा में एक छोटी सी गुमटी लगाकर अंडे का व्यापार करते थे। अपनी पढ़ाई के दिनों में आलमगीर अक्सर दुकान पर अपने पिता की सहायता करते थे, जहाँ से उन्हें बाजार की बारीकियों को समझने का मौका मिला। इसी अनुभव ने उनके मन में स्वयं का मुर्गी पालन केंद्र शुरू करने का विचार पैदा किया। शुरुआत एक छोटे स्तर से हुई, जहाँ उन्होंने मुर्गियां पालना शुरू किया। यह प्रयोग इतना सफल रहा कि उन्हें दुकान के लिए अंडे और मांस के लिए मुर्गियां खुद के फार्म से ही उपलब्ध होने लगीं। दोनों उत्पादों की बिक्री ने उनकी आय को दोगुना कर दिया।
12 हजार मुर्गियों का साम्राज्य और बंपर सप्लाई
समय के साथ आलमगीर ने अपने काम का विस्तार किया और आज उनके पोल्ट्री फार्म में कुल 12 हजार मुर्गियां मौजूद हैं। इस विशाल फार्म से प्रतिदिन लगभग 11 हजार अंडों का उत्पादन होता है, जो स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि सीवान, गोपालगंज, वैशाली और पटना जैसे प्रमुख बाजारों में भी भेजे जाते हैं। आलमगीर बताते हैं कि ये मुर्गियां करीब 20 महीने तक अंडे देने की क्षमता रखती हैं, जिसके बाद इन्हें मांस के बाजार में बेच दिया जाता है, जिससे उनकी आय का दूसरा स्रोत भी बना रहता है।
दूसरों के लिए बने रोजगार का जरिया
आलमगीर ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि उन्होंने अपने फार्म के माध्यम से करीब 12 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार भी दिया है। उनके कर्मचारी मुर्गियों के आहार, उनके स्वास्थ्य की देखरेख और अंडों की पैकिंग जैसे महत्वपूर्ण कामों को संभालते हैं। वे आज के युवाओं को संदेश देते हैं कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रदान किए जाने वाले मुफ्त प्रशिक्षण और सरकारी ऋण योजनाओं का लाभ उठाकर कोई भी उद्यमी इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक शुरू कर सकता है।











