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गोंडा में किसान की सलाह, धान की पौध रोपते वक्त इन 5 बातों का रखें ख्यालव्यापार
7 जुल॰ 2026, 10:40 am (45 दिन पहले)· 3

गोंडा में किसान की सलाह, धान की पौध रोपते वक्त इन 5 बातों का रखें ख्याल

गोंडा में मानसून तेज होते ही धान की रोपाई शुरू हो गई है, प्रगतिशील किसान हरीओम मिश्र ने खेत तैयार करने से लेकर सही समय पर खाद-पानी देने तक की जरूरी बातें बताईं, जिनसे पैदावार बढ़ाई जा सकती है और लागत घटाई जा सकती है।

गोंडा जिले में मानसून की रफ्तार बढ़ते ही खेतों में धान की रोपाई का काम जोर पकड़ चुका है। किसान इस मौसम में जितनी जल्दी सक्रिय होते हैं, फसल की नींव उतनी ही मजबूत बनती है, लेकिन रोपाई के दौरान की गई एक छोटी चूक भी आगे चलकर पैदावार को नुकसान पहुंचा सकती है। प्रगतिशील किसान हरीओम मिश्र का कहना है कि पौध खेत में लगाने से ठीक पहले कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, वरना मेहनत और लागत दोनों बेकार जा सकते हैं।

खेत की तैयारी सबसे पहली शर्त

हरीओम मिश्र के मुताबिक धान की रोपाई से पहले खेत की गहरी और अच्छी जुताई जरूरी है। जुताई के बाद खेत में पलेवा यानी हल्की सिंचाई करके उसे पूरी तरह समतल किया जाना चाहिए। समतल खेत में पानी हर जगह बराबर मात्रा में ठहरता है, जिससे हर कोने में लगी पौध को एक जैसा पोषण और नमी मिलती है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि पूरी फसल एक साथ और एक समान गति से बढ़ती है, कहीं पौधे कमजोर और कहीं ज्यादा घने नहीं रह जाते।

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रोपाई के वक्त पानी का सही संतुलन जरूरी

हरीओम मिश्र समझाते हैं कि रोपाई के समय खेत में पानी न तो जरूरत से ज्यादा भरा होना चाहिए और न ही जमीन बिल्कुल सूखी होनी चाहिए। ज्यादा पानी भरने पर पौध की जड़ें ठीक से जमीन में नहीं टिक पातीं, वहीं सूखी जमीन में पौध रोपने पर जड़ें पकड़ ही नहीं बना पातीं। दोनों ही स्थितियों में पौध कमजोर रह जाती है और इसका असर सीधे आने वाले उत्पादन पर पड़ता है। यही वजह है कि रोपाई से ठीक पहले खेत में पानी की मात्रा नापतौल कर ही रखनी चाहिए।

पौध से पौध के बीच दूरी बनाए रखना जरूरी

हरीओम मिश्र के अनुसार धान की पौध को कभी भी बहुत घना करके नहीं लगाना चाहिए। पौध से पौध और कतार से कतार के बीच उचित फासला रखने पर हर पौधे तक हवा और धूप ठीक से पहुंचती है। इससे न सिर्फ पौधों की बढ़वार अच्छी होती है, बल्कि नमी और सीलन की वजह से फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी काफी कम हो जाता है। घनी रोपाई करने पर पौधे एक दूसरे से पोषण और रोशनी छीनते हैं, जिससे पूरी फसल कमजोर पड़ जाती है।

स्वस्थ पौध का चुनाव और समय पर खाद-सिंचाई

हरीओम मिश्र की सलाह है कि रोपाई के लिए हमेशा स्वस्थ और अच्छी क्वालिटी की पौध ही चुननी चाहिए। कमजोर या रोगग्रस्त पौध खेत में लगाने से पूरी फसल पर असर पड़ सकता है, क्योंकि एक बीमार पौध से रोग आसानी से आसपास के पौधों में फैल सकता है। इसके साथ ही समय पर खाद डालना और सिंचाई करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि पौध तेजी से जड़ पकड़े और मजबूती से बढ़े।

जल्दबाजी नहीं, धैर्य से मिलेगी बेहतर पैदावार

हरीओम मिश्र ने किसानों से अपील की है कि धान की रोपाई जल्दबाजी में बिल्कुल न करें। खेत की सही तैयारी, पानी की नपी-तुली मात्रा, पौधों के बीच उचित दूरी और स्वस्थ पौध का चुनाव, ये सभी छोटी-छोटी बातें मिलकर ही आगे चलकर अच्छी पैदावार की नींव तैयार करती हैं। उनका कहना है कि अगर किसान शुरुआत से ही इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, तो न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा बल्कि खेती पर आने वाली लागत भी नियंत्रण में रहेगी, जिसका सीधा फायदा किसान की आमदनी पर पड़ेगा।

सवाल-जवाब

हरीओम मिश्र कौन हैं?
वे गोंडा जिले के एक प्रगतिशील किसान हैं जिन्होंने धान की रोपाई से जुड़ी जरूरी सावधानियां बताई हैं।
धान की रोपाई से पहले खेत कैसे तैयार करें?
खेत की गहरी जुताई कर पलेवा से समतल बनाना चाहिए, जिससे पानी बराबर ठहरे और पौध एक समान बढ़े।
रोपाई के समय खेत में पानी कितना होना चाहिए?
न तो खेत में बहुत ज्यादा पानी भरा होना चाहिए और न ही जमीन बिल्कुल सूखी, दोनों ही स्थितियां जड़ों को कमजोर करती हैं।
पौधों के बीच कितनी दूरी रखनी चाहिए?
पौध से पौध और कतार से कतार के बीच उचित फासला रखना चाहिए, ताकि हवा-धूप अच्छी मिले और बीमारियां कम फैलें।
रोपाई के लिए कैसी पौध चुननी चाहिए?
हमेशा स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाली पौध चुनें, कमजोर या रोगग्रस्त पौध पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
इन तरीकों को अपनाने से किसानों को क्या फायदा होगा?
हरीओम मिश्र के मुताबिक इससे पैदावार बढ़ेगी, लागत कम होगी और किसानों की आमदनी में सुधार होगा।
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