जोधपुर में 'खाली डोसा': स्वाद के साथ अब शिक्षा की अलख, पहले सात दिनों की कमाई से बनेंगे स्कूलव्यापार
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जोधपुर में 'खाली डोसा': स्वाद के साथ अब शिक्षा की अलख, पहले सात दिनों की कमाई से बनेंगे स्कूल

जोधपुर के सरदारपुरा में 'खाली डोसा' आउटलेट ने एक अनूठी पहल की है, जहां उद्घाटन के शुरुआती सात दिनों की पूरी बिक्री जरूरतमंद बच्चों के लिए क्लासरूम बनाने में खर्च की जाएगी।

जोधपुर के सरदारपुरा में दक्षिण भारतीय व्यंजनों का एक नया केंद्र 'खाली डोसा' चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर लोग किसी रेस्तरां में स्वाद लेने के लिए जाते हैं, लेकिन यहां के संचालक ने अपने व्यवसाय को समाजसेवा के साथ जोड़कर एक मिसाल पेश की है। इस आउटलेट के मेन्यू में मसाला डोसा, मैसूर डोसा, रवा डोसा और चीज डोसा जैसे पसंदीदा विकल्पों के साथ-साथ इडली, वड़ा और उत्तपम जैसे पारंपरिक व्यंजन भी शामिल किए गए हैं, जो खाने के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।

'आपकी प्लेट, किसी की स्लेट'

इस आउटलेट के पीछे की मुख्य प्रेरणा 'आपकी प्लेट, किसी की स्लेट' नामक एक विशेष अवधारणा है। रवि भाटी ने अपने नए आउटलेट की शुरुआत के समय निर्णय लिया कि वे अपनी व्यावसायिक शुरुआत को केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रखेंगे। इसके तहत, आउटलेट शुरू होने के शुरुआती सात दिनों के दौरान होने वाली कुल बिक्री की 100 प्रतिशत राशि शिक्षा के क्षेत्र में दान की जाएगी। इस धनराशि का सीधा उपयोग गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए नए क्लासरूम बनाने हेतु किया जाएगा, ताकि वे बेहतर शैक्षणिक माहौल में अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।

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समाजसेवा का संकल्प और जुड़ाव

रवि भाटी के अनुसार, यह विचार उनके मन में उस समय आया जब वे अपनी नई ब्रांच की ओपनिंग की योजना बना रहे थे। उन्होंने महसूस किया कि समाज से उन्हें जो प्रेम और सहयोग मिला है, उसे वापस लौटाना उनका कर्तव्य है। इस नेक कार्य के लिए उन्होंने 'राउंड टेबल इंडिया' नामक संस्था के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया। उनके बचपन के मित्र और इस संस्था के साथ जुड़े योगेश भाटी ने भी इस पहल में सहयोग दिया है। उनका मानना है कि छोटे-छोटे स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास ही बड़े बदलाव लाते हैं और समाज के वंचित वर्ग के बच्चों का भविष्य संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राउंड टेबल इंडिया की भूमिका

राउंड टेबल इंडिया के प्रतिनिधियों ने इस बारे में विस्तार से बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का संगठन है, जिसका इतिहास लगभग 100 साल पुराना है। भारत में भी यह संस्था पिछले 65 वर्षों से सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। यह संस्था मुख्य रूप से सरकारी विद्यालयों में बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, जिसमें क्लासरूम का निर्माण, शौचालय की सुविधा और अन्य शैक्षिक सुविधाएं शामिल हैं। रवि भाटी द्वारा मुनाफे के बजाय शुरुआती सात दिनों की पूरी सेल्स दान में देने का वादा इस संगठन के लिए एक बहुत बड़ा योगदान है। इससे एकत्रित फंड को सीधे उन स्कूलों में लगाया जाएगा जिन्हें बुनियादी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है, जिससे न केवल संसाधनों का सृजन होगा बल्कि बच्चों के सीखने के अनुभव में भी सकारात्मक सुधार आएगा।

सवाल-जवाब

जोधपुर के 'खाली डोसा' आउटलेट की अनूठी पहल क्या है?
इस आउटलेट ने अपने उद्घाटन के पहले सात दिनों की 100 प्रतिशत बिक्री को शिक्षा के लिए दान करने का फैसला किया है।
इस राशि का उपयोग कहां किया जाएगा?
एकत्रित की गई पूरी राशि का उपयोग जरूरतमंद बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में क्लासरूम बनाने में किया जाएगा।
इस काम में किस संस्था का सहयोग लिया जा रहा है?
रवि भाटी ने 'राउंड टेबल इंडिया' के साथ मिलकर यह योजना बनाई है, जो स्कूलों में बुनियादी ढांचा तैयार करती है।
राउंड टेबल इंडिया क्या काम करती है?
यह करीब 100 साल पुरानी संस्था भारत में सरकारी स्कूलों में क्लासरूम, शौचालय और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का कार्य करती है।

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