मानसून की दस्तक के साथ ही बालाघाट समेत पूरे देश के किसान अपने खेतों में नई फसल के सपने लेकर उतर चुके हैं। खेती का यह सीजन उनके लिए किसी नए वर्ष की शुरुआत जैसा होता है, जहां कड़ी मेहनत से बेहतर पैदावार की उम्मीद जगी होती है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती फसलों को आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से बचाना है। अक्सर किसान अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए खेतों के चारों ओर लोहे के तार की फेंसिंग करवाते हैं, जो न केवल अत्यंत महंगी साबित होती है, बल्कि कई बार पशुओं को गंभीर चोटें भी पहुंचा देती है। इस समस्या के समाधान के लिए उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञ अनिल निखाटे ने किसानों को प्रकृति के साथ जुड़कर सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रभावी सलाह दी है।
प्राकृतिक घेराबंदी और उसके लाभ
तार की फेंसिंग के बजाय खेतों की मेड़ पर कांटेदार और घने पेड़ लगाना एक दूरदर्शी कदम है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें लागत नाममात्र की होती है और यह पशुओं के लिए भी सुरक्षित है। लोहे के तारों से पशुओं के शरीर में गहरे घाव और संक्रमण का डर रहता है, जबकि कांटेदार पौधों की सुरक्षा व्यवस्था पशुओं को बिना गंभीर नुकसान पहुंचाए खेत से दूर रखती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी पशु को इन कांटों से मामूली चोट लग भी जाए, तो वह समय के साथ आसानी से ठीक हो जाती है, जो कि लोहे के जंग लगे तारों के मुकाबले काफी सुरक्षित है।
फेंसिंग के लिए सर्वोत्तम पेड़
मेड़ की सुरक्षा के लिए 'करौंदा' सबसे उत्तम विकल्प माना जाता है। इस पौधे की खास बात यह है कि इसे किसी विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है और इसकी घनी झाड़ियां तथा नुकीले कांटे एक मजबूत रक्षा दीवार का काम करते हैं। साथ ही, किसान इसके फलों की बाजार में बिक्री कर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, बबूल के पेड़ को भी मेड़ पर लगाना एक फायदेमंद विकल्प है, जो एक स्थायी सुरक्षा चक्र प्रदान करता है।
अतिरिक्त आमदनी के लिए अन्य विकल्प
खेतों की सुरक्षा को और अधिक आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाने के लिए किसान मेहंदी और बोगनवेलिया जैसे झाड़ीदार पौधों का चयन भी कर सकते हैं। ये पौधे न केवल टिकाऊ होते हैं, बल्कि जानवर इन्हें खाना भी पसंद नहीं करते, जिससे सुरक्षा घेरा सालों-साल बना रहता है।
यदि किसान सुरक्षा के साथ-साथ अच्छी आय भी कमाना चाहते हैं, तो वे बांस की खेती पर विचार कर सकते हैं। बांस एक झाड़ीनुमा पेड़ है जो फेंसिंग और आर्थिक लाभ दोनों देता है, और यह लगभग पांच वर्षों तक खेत को सुरक्षित रखने में सक्षम है। इसके अतिरिक्त, मालाबार नीम एक बेहतरीन विकल्प है जिससे भविष्य में लगभग 3000 रुपये तक की कमाई हो सकती है। किसान अपनी मेड़ पर आम, नीम और जामुन जैसे फलदार और छायादार पेड़ों को लगाकर भी अपनी संपत्ति को सुरक्षित और लाभदायक बना सकते हैं।











