इस बार खरीफ सीजन में बुवाई का रकबा 16 फीसदी लुढ़का, धान और दलहन समेत हर फसल पर पड़ी मारव्यापार
1 घंटे पहले· 0

इस बार खरीफ सीजन में बुवाई का रकबा 16 फीसदी लुढ़का, धान और दलहन समेत हर फसल पर पड़ी मार

कमजोर मानसून की वजह से 10 जुलाई तक खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा घटकर 531.25 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले साल की इसी अवधि से 16 फीसदी कम है। धान, दलहन, तिलहन और कपास हर जगह गिरावट दर्ज हुई है।

इस बार मानसून की सुस्त चाल ने देश के गर्मी वाले फसल सीजन को पटरी से उतार दिया है। कृषि मंत्रालय की ताजा गिनती बताती है कि 10 जुलाई तक किसानों ने कुल 531.25 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई की है, जबकि पिछले साल ठीक इसी समय तक यह आंकड़ा 632.69 लाख हेक्टेयर पर था। यानी बुवाई का रकबा पूरे 16 फीसदी पीछे चल रहा है। खास बात यह है कि गिरावट किसी एक फसल तक सीमित नहीं है, धान से लेकर दलहन, तिलहन और कपास तक लगभग हर बड़ी फसल का दायरा सिकुड़ा है।

खरीफ की फसलें आमतौर पर जून में लगाई जाती हैं, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक देता है। लेकिन इस साल अल-नीनो के असर से बारिश कमजोर पड़ी और बुवाई पिछड़ती चली गई। भारत में आज भी ज्यादातर खेती नहरों या पक्की सिंचाई के बजाय मानसूनी बारिश के भरोसे होती है, इसलिए जैसे ही बारिश का कैलेंडर गड़बड़ाता है, उसका सीधा असर बुवाई के आंकड़ों पर दिखने लगता है।

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अल-नीनो की सबसे ज्यादा मार किन इलाकों पर

अल-नीनो का सबसे तगड़ा असर देश के 9 से 10 राज्यों में महसूस किया जाता है। इनमें महाराष्ट्र का मराठवाड़ा और विदर्भ इलाका, गुजरात के तटीय हिस्से, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरी कर्नाटक, उत्तर प्रदेश का पूर्वी हिस्सा और बुंदेलखंड शामिल हैं। ये वही इलाके हैं जहां खेती बड़े पैमाने पर बारिश पर टिकी है, इसलिए कमजोर मानसून की चोट यहां सबसे गहरी बैठती है।

धान और दलहन पर सबसे तीखी चोट

धान की बुवाई का रकबा 8.63 फीसदी घटकर 114.69 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो एक साल पहले 125.53 लाख हेक्टेयर था। दलहन की हालत और भी नाजुक है। कुल दलहन का रकबा 73.85 लाख हेक्टेयर से 23.31 फीसदी लुढ़ककर 56.63 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। दलहन के भीतर देखें तो अरहर का रकबा पिछले साल के 28.03 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 19.54 लाख हेक्टेयर रह गया। उड़द 13.29 लाख हेक्टेयर से गिरकर 9.34 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया, जबकि मूंग की बुवाई 24.08 लाख हेक्टेयर से सिमटकर 21.52 लाख हेक्टेयर रह गई।

मोटे अनाज और तिलहन भी फिसले

मोटे अनाज का दायरा भी पिछले साल के 127.30 लाख हेक्टेयर की तुलना में 22.47 फीसदी घटकर 98.69 लाख हेक्टेयर रह गया है। तिलहन की तस्वीर भी कुछ अलग नहीं है। इसका रकबा 149.18 लाख हेक्टेयर से 21 फीसदी घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर पर आ गया। तिलहन में सबसे अहम फसल सोयाबीन का रकबा 107.72 लाख हेक्टेयर से 16 फीसदी कम होकर 90.51 लाख हेक्टेयर रह गया।

एक नजर में पूरी तस्वीर

  • कुल खरीफ फसलें: 632.69 से घटकर 531.25 लाख हेक्टेयर, यानी 16 फीसदी की गिरावट।
  • धान: 125.53 से 114.69 लाख हेक्टेयर, 8.63 फीसदी कम।
  • कुल दलहन: 73.85 से 56.63 लाख हेक्टेयर, 23.31 फीसदी की गिरावट।
  • अरहर: 28.03 से 19.54 लाख हेक्टेयर, करीब 30.28 फीसदी नीचे।
  • उड़द: 13.29 से 9.34 लाख हेक्टेयर, 29.72 फीसदी कम।
  • मूंग: 24.08 से 21.52 लाख हेक्टेयर, 10.63 फीसदी की गिरावट।
  • मोटे अनाज: 127.30 से 98.69 लाख हेक्टेयर, 22.47 फीसदी कम।
  • कुल तिलहन: 149.18 से 117.83 लाख हेक्टेयर, 21 फीसदी की गिरावट।
  • सोयाबीन: 107.72 से 90.51 लाख हेक्टेयर, 16 फीसदी कम।
  • कपास: 93.95 से 79.54 लाख हेक्टेयर, 15.33 फीसदी की गिरावट।
  • गन्ना: 56.72 से बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर, 1.51 फीसदी की बढ़त।
  • जूट / मेस्टा: 6.16 से बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर, 1.94 फीसदी ऊपर।

गन्ना और जूट ने थामी उम्मीद

गिरावट की इस लंबी लिस्ट के बीच कुछ फसलों ने राहत भी दी है। गन्ने की खेती का रकबा 56.72 लाख हेक्टेयर से हल्का बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी तरह जूट या मेस्टा का दायरा भी 6.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। हालांकि नकदी फसलों में कपास की चमक फीकी रही। इस खरीफ सीजन में अब तक कपास की बुवाई 15.33 फीसदी घटकर 79.54 लाख हेक्टेयर रह गई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह 93.95 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी थी। कुल मिलाकर तस्वीर यही कहती है कि मानसून की चाल जब तक तेज नहीं होती, बुवाई का यह फासला किसानों की चिंता बढ़ाता रहेगा।

सवाल-जवाब

इस साल खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा कितना घटा है?
10 जुलाई तक कुल खरीफ बुवाई का रकबा 16 फीसदी घटकर 531.25 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 632.69 लाख हेक्टेयर था।
बुवाई घटने की मुख्य वजह क्या है?
इस साल अल-नीनो के असर से मानसून कमजोर रहा, जिससे बारिश देर से हुई और बुवाई पिछड़ गई। भारत में ज्यादातर खेती अब भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है।
धान की बुवाई का रकबा कितना रह गया?
धान का रकबा 8.63 फीसदी घटकर 114.69 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि एक साल पहले यह 125.53 लाख हेक्टेयर था।
दलहन में सबसे ज्यादा गिरावट किसमें आई?
कुल दलहन का रकबा 23.31 फीसदी घटा है। अरहर का रकबा 28.03 से घटकर 19.54 लाख हेक्टेयर और उड़द 13.29 से घटकर 9.34 लाख हेक्टेयर रह गया।
किन फसलों की बुवाई बढ़ी है?
गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर और जूट या मेस्टा का रकबा बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गया है।
अल-नीनो का सबसे ज्यादा असर किन राज्यों पर पड़ता है?
इसका सबसे ज्यादा असर 9 से 10 राज्यों में दिखता है, जिनमें महाराष्ट्र का मराठवाड़ा और विदर्भ, गुजरात के तटीय क्षेत्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरी कर्नाटक, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड शामिल हैं।
कपास और तिलहन की क्या स्थिति है?
कपास का रकबा 15.33 फीसदी घटकर 79.54 लाख हेक्टेयर और कुल तिलहन का रकबा 21 फीसदी घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर रह गया है।

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