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कच्चे माल और तेल की महंगाई से एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ा दबावव्यापार
11 अक्तू॰ 2026, 11:07 am (17 दिन पहले)· 3

कच्चे माल और तेल की महंगाई से एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ा दबाव

कमोडिटी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रोजमर्रा के उपभोग उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे सितंबर तिमाही में उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

घरेलू बजट को लंबे समय से प्रभावित कर रही महंगाई अब रोजमर्रा के उपभोग उत्पाद बनाने वाली उपभोक्ता कंपनियों (एफएमसीजी) की बैलेंस शीट पर भी भारी पड़ने लगी है। प्रमुख कमोडिटीज और कच्चे माल की दरों में तेज उछाल आने से विनिर्माण लागत बढ़ गई है, जिसके चलते चालू वित्तवर्ष 2026-27 की सितंबर में समाप्त हुई दूसरी तिमाही में इन कंपनियों के शुद्ध मुनाफे पर दबाव देखने को मिल सकता है। उत्पादन व्यय में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब मांग का ढांचा भी असमान बना हुआ है, हालांकि इसके बावजूद कई प्रमुख कंपनियों को अपनी कुल बिक्री और राजस्व में 10 फीसदी से ज्यादा यानी दोहरे अंक की बढ़त मिलने की उम्मीद बरकरार है।

कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों और कमोडिटीज की कीमतों में उछाल

आईसीआईसीआई डायरेक्ट के वित्तीय आकलन के अनुसार, पैकेजिंग सामग्री में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल और उससे जुड़े डेरिवेटिव उत्पादों की दरों में आई तेज बढ़ोतरी ने विनिर्माताओं के खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी है। इसके अलावा अन्य औद्योगिक कमोडिटीज की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों के परिचालन समीकरण को और जटिल बना दिया है। नोमुरा के बाजार विश्लेषण में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि सितंबर महीने के दौरान कई अनिवार्य कच्चे मालों के भाव पिछले साल की समान अवधि के स्तर से लगातार ऊपर बने रहे। इनपुट लागत में आई इस तेजी के चलते कंपनियों के परिचालन लाभ की वृद्धि दर उनके राजस्व विस्तार की तुलना में पीछे छूटने की संभावना जताई गई है। साथ ही, वित्तीय लागतों के तहत ब्याज और कर देनदारियों का असर भी आने वाले नतीजों में साफ दिखाई देगा।

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मानसून की बेरुखी और ग्रामीण मांग पर मंडराता खतरा

लागत संकट के अलावा मांग का मोर्चा भी विनिर्माताओं के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहा है। देश के कई हिस्सों में कम और असमान मानसूनी बारिश के कारण कृषि उत्पादन सीधे तौर पर प्रभावित होने की आशंका है, जिससे ग्रामीण आय और मांग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। यदि आने वाले समय में खाद्य वस्तुओं की महंगाई में और तेजी आती है, तो इसका नकारात्मक असर शहरी उपभोक्ताओं के खर्च करने के तौर-तरीकों पर भी पड़ सकता है। वित्तीय अनुमानों के मुताबिक, बढ़ी हुई इनपुट लागत का यह दबाव वित्तवर्ष 2026-27 की पूरी दूसरी छमाही के दौरान कंपनियों के परिचालन मार्जिन पर बना रह सकता है, जिससे वित्त वर्ष के उत्तरार्ध में भी वित्तीय प्रदर्शन प्रभावित रहने के संकेत हैं।

डाबर और मैरिको का कारोबारी प्रदर्शन और रणनीति

इस कठिन आर्थिक माहौल के बीच डाबर इंडिया और मैरिको जैसी दिग्गज कंपनियों ने सितंबर तिमाही के दौरान अपने राजस्व में दहाई अंक की वृद्धि दर्ज करने का अनुमान प्रस्तुत किया है। दोनों कंपनियों को अपने बुनियादी कारोबार और चुनिंदा उत्पाद श्रेणियों में मांग बने रहने का सहारा मिला है। डाबर इंडिया ने अपने तिमाही अपडेट में स्पष्ट किया है कि उसके घरेलू एवं व्यक्तिगत देखभाल (एचपीसी) खंड के साथ-साथ बिना डॉक्टर के पर्चे वाली दवाओं (ओटीसी) और पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधीय उत्पादों पर महंगाई का गंभीर दबाव बना रहा। इस अवधि में कंपनी का ऑपरेशनल मार्जिन प्रभावित जरूर हुआ, लेकिन उत्पादों की कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी करने और लागत नियंत्रण के ठोस उपायों से दबाव को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।

दूसरी ओर, पैराशूट नारियल तेल और सफोला जैसे प्रसिद्ध ब्रांड्स का संचालन करने वाली मैरिको को अपने मार्जिन में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। कंपनी ने रेखांकित किया कि जहां कच्चे तेल से जुड़े डेरिवेटिव्स महंगे हुए हैं, वहीं नारियल तेल के मुख्य घटक खोपरा की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से करीब 35 फीसदी नीचे बनी रही हैं। खोपरा के इस घटे हुए दाम और अनुकूल उत्पाद मिश्रण के मेल से मैरिको को सालाना आधार पर अपने सकल मार्जिन में ठोस सुधार की उम्मीद बंधी है।

गोदरेज कंज्यूमर पर प्रमुख ब्रांड्स की लागत का असर

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) ने भी इस बात की तस्दीक की है कि दूसरी तिमाही के दौरान कच्चे माल के खर्च में नया उछाल दर्ज हुआ है। वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंतिम चरण में कुछ कमोडिटी भावों में जो नरमी देखी गई थी, वह दूसरी तिमाही में पलट गई और कीमतों में दोबारा तेजी आ गई। कंपनी के प्रमुख घरेलू और व्यक्तिगत उत्पादों जैसे हिट, गुडनाइट, गोदरेज नंबर-1 और सिंथॉल पर कमोडिटीज की महंगाई का सीधा असर पड़ा है। इसके अतिरिक्त, असमान मानसूनी परिस्थितियों और अल नीनो के मजबूत होने की आशंका ने उपभोग को प्रभावित किया है। हालांकि, पिछले साल की इसी तिमाही के कमजोर तुलनात्मक आधार के चलते कंपनी को इस बार भी एक मजबूत प्रदर्शन दर्ज करने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

कंपनियों के मुनाफे पर दबाव की मुख्य वजह क्या है?
पैकेजिंग में काम आने वाले कच्चे तेल के उत्पादों और अन्य अनिवार्य कमोडिटीज की बढ़ती लागत से उत्पादन खर्च बढ़ गया है।
क्या सितंबर तिमाही में कंपनियों की बिक्री में भी गिरावट आई है?
नहीं, डाबर और मैरिको जैसी कंपनियों को इस तिमाही में अपने राजस्व में 10 फीसदी से ज्यादा की दोहरे अंक की वृद्धि का अनुमान है।
मैरिको को मार्जिन सुधार की उम्मीद क्यों है?
कंपनी के मुताबिक खोपरा के दाम अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 35 फीसदी कम हैं, जिससे उसे ग्रॉस मार्जिन में बढ़त मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण मांग को लेकर क्या चिंता जताई गई है?
देश के कई क्षेत्रों में कम और असमान बारिश के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने और ग्रामीण मांग सुस्त रहने की आशंका है।
गोदरेज कंज्यूमर के किन ब्रांड्स पर लागत का असर देखा जा रहा है?
कंपनी के प्रमुख ब्रांड्स जैसे हिट, गुडनाइट, गोदरेज नंबर-1 और सिंथॉल पर कमोडिटीज की महंगाई का प्रभाव पड़ रहा है।
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