अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में थाई बात (THB) पर दबाव लगातार गहराता जा रहा है, जिससे यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिसलकर तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की चढ़ती कीमतें, सोने के भाव में कमजोरी और अमेरिकी मुद्रा की मजबूती इस गिरावट की मुख्य वजहें बनी हुई हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि अल्पकालिक दृष्टिकोण से बात को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि ऊर्जा लागत में इजाफा थाईलैंड के बाहरी संतुलन के लिए गंभीर चिंता पैदा कर रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में सबकी निगाहें बैंक ऑफ थाईलैंड (BoT) की आगामी बुधवार की नीतिगत समीक्षा बैठक पर टिक गई हैं, जहां ब्याज दरों और आर्थिक रुख को लेकर दिशा तय होगी।
थाई बात पर ऊर्जा कीमतों का दोहरा दबाव
थाईलैंड की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा का आयात एक बड़ा कारक है। कच्चे तेल के बढ़ते भाव देश के चालू खाते और व्यापार संतुलन पर सीधा नकारात्मक असर डालते हैं। इसके अलावा, सोने के वैश्विक दामों में नरमी भी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को बढ़ा रही है। तकनीकी विश्लेषण पर गौर करें तो चार्ट्स पर हालिया ऊंचे स्तरों के पास संभावित डबल-टॉप पैटर्न बनता दिखाई दे रहा है, जहां नजदीकी सपोर्ट स्तरों की अहम भूमिका होगी। वर्तमान में दैनिक मोमेंटम स्थिर बना हुआ है, जबकि आरएसआई (RSI) में बढ़त दर्ज की गई है, जो यह संकेत देती है कि हालिया उच्च स्तरों के आसपास निकट भविष्य में कंसॉलिडेशन देखने को मिल सकता है।
विश्लेषक सिम मोह सिओंग और क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, थाई बात पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मजबूत डॉलर स्थानीय मुद्रा को कमजोर कर रहे हैं। दूसरी ओर, बैंक ऑफ थाईलैंड के डिप्टी गवर्नर पिती के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक ऊर्जा की ऊंची कीमतों के बावजूद अपने उदार मौद्रिक नीति रुख को बनाए रखने की गुंजाइश देखता है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि देश में मुद्रास्फीति का दबाव अभी नियंत्रण में है और घरेलू आर्थिक सुधार की गति अभी भी असमान बनी हुई है, इसलिए नीतिगत समर्थन जारी रखना जरूरी हो सकता है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भी हलचल तेज
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में केवल थाई बात ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख मुद्राएं भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की बुधवार को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) बैठक से पहले उतार-चढ़ाव से जूझ रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी ने मंगलवार को अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल की और पिछले दिन की गिरावट को पलटते हुए 0.7000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर अपनी बढ़त दर्ज की। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की यह रिकवरी ऐसे समय में आई है जब ग्रीनबैक पूरी मजबूती के साथ टिका हुआ है। अब बाजार बुधवार को ऑस्ट्रेलिया में जारी होने वाले महंगाई के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो मुद्रा की भावी चाल तय करेंगे।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) में लगातार तीसरे कारोबारी दिन लिवाली का दौर जारी रहा। यह जोड़ी अपने एक महीने के निचले स्तर से उबरते हुए आगे बढ़ रही है। बुधवार के फेडरल रिजर्व के फैसले और शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान (BoJ) की मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले जापानी मुद्रा दबाव में है। बाजार में यह धारणा प्रबल हो रही है कि बैंक ऑफ जापान ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी से पीछे हट सकता है, जिसके चलते येन कमजोर पड़ा है और अमेरिकी डॉलर लगभग दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे इस करेंसी जोड़ी को ठोस समर्थन मिला है।
सोने में हल्की रिकवरी और डॉलर इंडेक्स की रैली
कमोडिटी बाजार की बात करें तो मंगलवार को अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान सोने के भाव में हल्की बढ़त देखने को मिली। इससे पहले दिन में पीली धातु नकारात्मक दायरे में कारोबार कर रही थी। कच्चे तेल की कीमतों में आई मामूली गिरावट ने बाजार को थोड़ी राहत दी, लेकिन मजबूत अमेरिकी डॉलर ने सोने की तेजी को एक सीमित दायरे में बांधे रखा, क्योंकि ट्रेडर फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। सूचकांक तीन दिनों में 0.6% चढ़कर 102.00 के पार निकल गया, जो दो सप्ताह का नया उच्च स्तर है। निवेशक एक बार फिर डॉलर की ओर लौट रहे हैं, क्योंकि वित्तीय बाजार बुधवार को फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को यथावत रखने के साथ-साथ सख्त रुख बनाए रखने की उम्मीद कर रहे हैं। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच किसी तत्काल शांति समझौते की घटती उम्मीदों ने भी सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है।
















