केंद्र सरकार ने बिना सीमा शुल्क (ड्यूटी-फ्री) आयात की जाने वाली कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और घरेलू बाजार में बिक्री से जुड़े नियमों में ढील दी है। नए दिशा-निर्देशों के तहत, आयातकों को सीमा शुल्क विभाग के पास बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा। इस अवधि के भीतर उन्हें कच्ची चीनी को रिफाइन करके सफेद या रिफाइंड चीनी के रूप में भारतीय बाजार में बेचना होगा। सरकार के इस कदम से चीनी मिलों और आयातकों को बंदरगाहों की देरी और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों से निपटने में बड़ी राहत मिलेगी।
निश्चित समय-सीमा की जगह लागू हुआ नया नियम
आयात नियमों में हुआ यह बदलाव पहले की व्यवस्था से काफी अलग है। इससे पहले, 20 अगस्त को जारी अधिसूचना में सरकार ने आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन करने और उसे घरेलू बाजार में बेचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक निश्चित तारीख तय की थी। देश भर के सभी आयातकों के लिए यह एक समान अंतिम समय-सीमा थी।
हालांकि, चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया था कि समुद्री जहाजों की आवाजाही में होने वाली देरी, बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और रिफाइनिंग प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण 31 अक्टूबर तक काम पूरा करना कठिन था। नई व्यवस्था में इस निश्चित कट-ऑफ तारीख को समाप्त कर दिया गया है। अब हर खेप के लिए दो महीने का समय उस दिन से गिना जाएगा, जिस दिन आयातक उस विशिष्ट खेप के लिए बिल ऑफ एंट्री दाखिल करेगा। इसका मतलब है कि अलग-अलग जहाजों से आने वाले माल के लिए अंतिम समय-सीमा भी अलग-अलग होगी।
लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह की भीड़ से मिलेगी राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कच्ची चीनी का आयात करने वाली कंपनियों को अक्सर समुद्री परिवहन में देरी का सामना करना पड़ता है। भारतीय बंदरगाहों पर जहाजों के लंगर डालने और माल उतरने में लगने वाला समय कई बार अनुमान से अधिक हो जाता है। माल उतरने के बाद उसे रिफाइनरी तक पहुंचाना और फिर रिफाइनिंग प्रक्रिया को पूरा करना एक लंबी प्रक्रिया है।
पुरानी व्यवस्था के तहत, यदि कोई जहाज अक्टूबर के महीने में देरी से बंदरगाह पर पहुंचता, तो आयातक के पास चीनी को रिफाइन करने और उसे बाजार में बेचने के लिए बहुत कम दिन बचते। इससे आयातकों पर भारी दबाव बन जाता था और नियम उल्लंघन का खतरा बढ़ जाता था। अब बिल ऑफ एंट्री से दो महीने की अवधि मिलने से आयातकों और रिफाइनरियों को राहत मिलेगी और वे सुचारू रूप से काम कर सकेंगे।
10 लाख टन कोटा और कीमतों पर नियंत्रण का लक्ष्य
सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। यह आयात टैरिफ-रेट कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था के तहत मंजूर किया गया था। इस नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार बना रहे और आम उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना न करना पड़े।
20 अगस्त की अधिसूचना ने आयात प्रक्रिया का खाका तैयार किया था, लेकिन सख्त समय-सीमा के कारण चीनी की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका थी। नियमों में ढील देकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका मकसद आयातित चीनी को जल्द से जल्द और बिना किसी बाधा के घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनाना है, ताकि बाजार में कीमतों में स्थिरता बनी रहे।
व्यापारियों और रिफाइनरों के लिए आपूर्ति योजना होगी आसान
चीनी रिफाइनरों, आयातकों और कमोडिटी व्यापारियों के लिए यह निर्णय बेहद फायदेमंद साबित होगा। अब कारोबारी बिना किसी हड़बड़ी के अपने जहाजों का शेड्यूल तय कर सकेंगे और रिफाइनिंग इकाइयों में काम की योजना बना सकेंगे। उन्हें इस बात की चिंता नहीं होगी कि देशव्यापी अंतिम तारीख नजदीक आ रही है और उनका माल अभी रिफाइनरी में ही है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से रिफाइनरियों की कार्यकुशलता में सुधार होगा। कंपनियां अपनी क्षमता के अनुसार रिफाइनिंग कर सकेंगी और बाजार में चीनी की आपूर्ति एक समान रूप से होती रहेगी। इससे बाजार में चीनी का अचानक से भारी स्टॉक आने या फिर किल्लत होने जैसी स्थितियों से बचा जा सकेगा।
मूल अनिवार्य शर्तें रहेंगी बरकरार
समय-सीमा में छूट देने के बावजूद, सरकार ने आयात योजना से जुड़ी मुख्य शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि केवल दायित्व पूरा करने की अवधि और तरीके में बदलाव किया गया है, आयात के मूल उद्देश्य में नहीं।
आयातकों के लिए यह अनिवार्य बना रहेगा कि वे आयात की गई पूरी कच्ची चीनी को रिफाइन करके घरेलू बाजार में ही बेचें। इस चीनी को बिना रिफाइन किए बेचने या देश से बाहर दोबारा निर्यात करने की इजाजत नहीं होगी। दो महीने का नया ढांचा केवल प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाने के लिए तैयार किया गया है, ताकि चीनी का आयात और उसका घरेलू बाजार में वितरण बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके।



















