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मई में खुदरा महंगाई दर 3.93% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से बढ़ा दबावव्यापार
12 जून 2026, 10:14 pm (46 दिन पहले)· 0

मई में खुदरा महंगाई दर 3.93% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से बढ़ा दबाव

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी के चलते मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई दर भी बढ़कर 4.78 प्रतिशत पर पहुंच गई।

खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़ने का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे ठीक पहले अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर 3.48 प्रतिशत रही थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़े बताते हैं कि मई में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर भी बढ़कर 4.78 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 4.20 प्रतिशत के स्तर पर थी।

किन वस्तुओं के दाम सबसे ज्यादा बढ़े

बीते महीने जिन चीजों की कीमतों में सबसे तेज उछाल देखने को मिला, उनमें कीमती धातुओं से बने आभूषण, टमाटर, अदरक, किशमिश और मुनक्का प्रमुख रहे। इसके उलट आलू, मटर, जीरा, मोटर कार, जीप, मोटरसाइकिल और स्कूटर जैसी वस्तुओं की महंगाई दर सबसे नीचे रही, यानी इन पर कीमतों का दबाव अपेक्षाकृत कम रहा।

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आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए बढ़ाया महंगाई का अनुमान

मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले लेते समय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई दर को ही आधार बनाता है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह खुदरा महंगाई यानी मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के स्तर पर, दोनों ओर 2 प्रतिशत की घट-बढ़ के दायरे में, बनाए रखे। पिछले हफ्ते आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों को देखते हुए बढ़ाया गया अनुमान

रिजर्व बैंक ने इस अनुमान को ऊपर ले जाने की वजह वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और उसके चलते पेट्रोल तथा डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ने वाले असर एवं बढ़ती लागत को बताया था। आंकड़ों के अनुसार, मई से लेकर अब तक पेट्रोल की खुदरा कीमतों में कुल 7.4 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विश्व बैंक ने घटाया भारत की वृद्धि दर का अनुमान

विश्व बैंक के ताजा अनुमान के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026-27 में घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ जाएगी, जबकि बीते साल यह 7.7 प्रतिशत रही थी। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। अपनी रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा था कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और दूसरे कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण निजी मांग में कमी आएगी, जिससे वृद्धि दर की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है।

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