नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के निवासियों के लिए पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रिया को और अधिक आसान तथा किफ़ायती बना दिया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा सगे संबंधियों के बीच प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर लगने वाले भारी-भरकम शुल्कों को समाप्त करने के निर्णय के बाद नोएडा विकास प्राधिकरण ने अपने नियमों में नया विस्तार किया है। प्राधिकरण की ओर से लागू यूनिफाइड नीति के तहत अब ससुर और बहू के बीच होने वाले संपत्ति हस्तांतरण पर भी ट्रांसफर शुल्क वसूल नहीं किया जाएगा। इस नए संशोधन से पारिवारिक परिसंपत्तियों के हस्तांतरण पर लगने वाली लाखों रुपये की फीस से राहत मिलेगी और लोगों को मात्र 5,000 रुपये का मामूली प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा।
यूनिफाइड पॉलिसी और प्राधिकरणों का एकसमान ढांचा
अतीत में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर अलग-अलग दर से शुल्क वसूले जाते थे। इससे आम नागरिकों को काफी प्रशासनिक और वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इन सभी समस्याओं का समाधान निकालने के उद्देश्य से यूनिफाइड स्कीम को लागू किया गया था, ताकि तीनों औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में संपत्ति हस्तांतरण के नियमों और शुल्कों को पूरी तरह से एकसमान बनाया जा सके। जब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल की शुरुआत में गिफ्ट डीड के जरिए पारिवारिक हस्तांतरण पर लगने वाले चार्ज को खत्म करने का निर्णय लिया, तो नोएडा प्राधिकरण ने भी इसका दायरा बढ़ाते हुए अपनी नीतियों में संशोधन किया। पहले जहां ट्रांसफर चार्ज, रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी का बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता था, अब उसे बेहद न्यूनतम कर दिया गया है।
ससुर और बहू को मिली बड़ी छूट और नई प्रक्रिया
नोएडा प्राधिकरण द्वारा किए गए नवीनतम प्रावधान के अनुसार, यदि कोई ससुर अपनी बहू के नाम किसी मकान, प्लॉट अथवा व्यावसायिक संपत्ति को हस्तांतरित करता है, या फिर बहू अपने ससुर को कोई संपत्ति हस्तांतरित करती है, तो उस पर लगने वाला मुख्य ट्रांसफर चार्ज पूरी तरह से माफ रहेगा। इस प्रकार के संपत्ति ट्रांसफर के दौरान आवेदक से प्राधिकरण केवल 5,000 रुपये की निश्चित प्रोसेसिंग फीस ही वसूल करेगा। हालांकि, राज्य सरकार के नियमानुसार जरूरी स्टांप शुल्क देय रहेगा, परंतु कुल मिलाकर यह खर्च पहले लगने वाले हस्तांतरण शुल्क की तुलना में बेहद कम रहेगा। इस निर्णय से परिवार के भीतर संपत्तियों के स्वामित्व का विवाद रहित पुनर्गठन करना आसान हो जाएगा।
नीति के तहत कौन-कौन से पारिवारिक रिश्ते हैं शामिल
नोएडा प्राधिकरण की यूनिफाइड पॉलिसी में 'रक्त संबंधी' (ब्लड रिलेशन) की परिभाषा को चरणबद्ध तरीके से विस्तार दिया गया है। शुरुआती चरण में इस छूट के दायरे में केवल पति-पत्नी, पिता-पुत्र, पिता-पुत्री, माता-पुत्र, माता-पुत्री, भाई-बहन, भाई-भाई तथा बहन-बहन जैसे निकटतम पारिवारिक सदस्यों को ही शामिल किया गया था। बाद में नीति का दायरा पहली बार बढ़ाते हुए इसमें दादा-दादी तथा नाना-नानी को भी जोड़ दिया गया। अब नवीनतम विस्तार के अंतर्गत ससुर और बहू के रिश्ते को भी इस सूची में जगह दी गई है। इसके परिणामस्वरूप इन सभी प्राथमिक और विस्तारित पारिवारिक संबंधों के मध्य संपत्ति का लेन-देन बहुत ही कम लागत में संभव हो गया है।
1 करोड़ रुपये की संपत्ति के हस्तांतरण का उदाहरण
इस नीति से होने वाले वित्तीय लाभ को एक व्यावहारिक उदाहरण के जरिए आसानी से समझा जा सकता है। पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत यदि नोएडा में रहने वाला कोई व्यक्ति 1 करोड़ रुपये के मूल्यांकन वाली संपत्ति अपने बेटे या अन्य किसी सदस्य को ट्रांसफर करता था, तो उस पर 10 प्रतिशत की दर से हस्तांतरण शुल्क देना पड़ता था। इसका सीधा अर्थ था कि संपत्ति स्वामी को 10 लाख रुपये केवल ट्रांसफर फीस के रूप में चुकाने होते थे। यूनिफाइड स्कीम के तहत इस 10 प्रतिशत के हस्तांतरण शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है, जिससे आवेदक को सीधे 10 लाख रुपये का वित्तीय लाभ मिलता है। अब 1 करोड़ रुपये की संपत्ति ट्रांसफर करने पर मात्र 5,000 रुपये का प्रोसेसिंग चार्ज और निर्धारित नियम के अनुसार स्टांप शुल्क ही देना होगा।



















