मखाना उगाने वाले किसानों के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अब खत्म होने की कगार पर है क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक विशेष हार्वेस्टिंग मशीन तैयार कर ली है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के विशेषज्ञों ने इस अत्याधुनिक तकनीक को विकसित किया है ताकि खेती के इस जोखिम भरे चरण को आसान बनाया जा सके। वर्तमान में इस मशीन का अंतिम दौर का परीक्षण चल रहा है, जिसके नतीजे बहुत ही सकारात्मक रहे हैं।
मिथिला की पहचान और कटाई का कठिन संघर्ष
मखाना की खेती को मिथिला क्षेत्र की मुख्य पहचान माना जाता है, लेकिन इसकी कटाई का काम बेहद थकाऊ और खतरनाक होता है। किसानों को तालाबों के ठंडे पानी और कीचड़ के बीच घंटों बिताना पड़ता है और हाथों से मखाने के बीज जिन्हें गोड़िया कहा जाता है, निकालने पड़ते हैं। इस प्रक्रिया में न केवल अत्यधिक शारीरिक श्रम लगता है बल्कि जलीय जीवों के काटने और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा भी हमेशा बना रहता है। इसी बड़ी कठिनाई को दूर करने के लिए अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने यह यांत्रिक समाधान खोजा है।
मशीन की कार्यक्षमता और क्षमता
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मशीन का पूरा निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है और इस समय केवल इसका अंतिम ट्रायल चल रहा है। उनके अनुसार यह उन्नत मशीन पानी के भीतर जाकर बेहद कम समय में मखाने के बीजों को कुशलतापूर्वक बाहर निकाल सकती है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक यदि यह मशीन एक दिन में सात से आठ घंटे तक चलाई जाए, तो यह एक एकड़ के तालाब से लगभग आठ क्विंटल मखाना बीज आसानी से निकाल सकेगी। इससे न केवल किसानों के अनमोल समय और मेहनत की भारी बचत होगी, बल्कि कुल उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकेगी।
उत्पादन और बाजार में उपलब्धता
इस अनूठी मशीन के व्यावसायिक निर्माण की जिम्मेदारी अंबाला की एक निजी कंपनी को सौंपी गई है, जिसे इसके निर्माण के लिए लाइसेंस दिया गया है। वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि यह मशीन इस साल अगस्त के महीने तक देश के किसानों के लिए बाजार में खरीद के वास्ते उपलब्ध हो जाएगी। इस मशीन को पूरी तरह से विकसित करने में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों का भी महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग लिया गया है, जिन्होंने इसे डिजाइन करने में मदद की है।


















