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नॉर्वे में ₹400 किलो तो भारत में बेहद सस्ती, जानें दुनिया भर में क्या हैं चीनी के दामव्यापार
22 अग॰ 2026, 6:14 am (3 घंटे पहले)· 0

नॉर्वे में ₹400 किलो तो भारत में बेहद सस्ती, जानें दुनिया भर में क्या हैं चीनी के दाम

वैश्विक आंकड़ों के विश्लेषण से खुलासा हुआ है कि विभिन्न देशों में चीनी की दरों में भारी अंतर है, जहां भारत में यह काफी सस्ती है वहीं नॉर्वे में इसके दाम ₹400 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

दुनिया भर के बाजारों में रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की कीमतों में व्यापक विभिन्नता देखने को मिलती है, और रसोई की एक प्रमुख आवश्यकता यानी चीनी भी इससे अछूती नहीं है। वैश्विक स्तर पर 79 देशों के आंकड़ों का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि भौगोलिक स्थितियों, स्थानीय उत्पादन क्षमता और आयात पर निर्भरता के कारण अलग-अलग राष्ट्रों में चीनी के फुटकर भावों में जमीन-आसमान का अंतर है। जहां भारत और उसके कुछ पड़ोसी देशों में चीनी की दरें आम उपभोक्ताओं की पहुंच में बनी हुई हैं, वहीं कई समृद्ध तथा आयात पर निर्भर यूरोपीय एवं एशियाई देशों में इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

यूरोपीय और अन्य विकसित राष्ट्रों में महंगी चीनी का बोझ

दुनिया भर में सबसे महंगी चीनी बेचने वाले देशों की सूची पर नजर डालें तो यूरोपीय देश नॉर्वे इस तालिका में शीर्ष स्थान पर कायम है। इस समृद्ध यूरोपीय राष्ट्र में चीनी की औसत कीमत 4.22 डॉलर प्रति किलोग्राम तक दर्ज की गई है, जो भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 400 रुपये प्रति किलो के बराबर बैठती है। भारत जैसे बड़े उत्पादक देश के दृष्टिकोण से यह दर अत्यधिक ऊंची मानी जाएगी। उच्च दरों के मामले में केवल अमीर देश ही आगे नहीं हैं, बल्कि आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा घाना जैसा देश भी इस सूची में काफी ऊपर है। घाना में उपभोक्ताओं को 1 किलोग्राम चीनी के लिए 3.37 डॉलर यानी करीब 323 रुपये देने पड़ते हैं।

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इसी क्रम में एशियाई व्यापारिक केंद्र हांगकांग भी पीछे नहीं है, जहां चीनी की कीमत 3.19 डॉलर प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है, जो भारतीय रुपये में बदलने पर लगभग 306 रुपये प्रति किलो बनती है। सबसे महंगी चीनी बेचने के मामले में यूरोपीय राष्ट्र आयरलैंड चौथे स्थान पर मौजूद है। आयरलैंड में औसत मूल्य 2.80 डॉलर प्रति किलोग्राम है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 268 रुपये बैठता है।

तकनीकी रूप से उन्नत देश जापान में भी चीनी की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं और वह इस तालिका में 6वें पायदान पर स्थित है। जापान के बाजारों में 1 किलो चीनी का भाव 2.68 डॉलर यानी करीब 257 रुपये है। इसी प्रकार, स्विट्जरलैंड में उपभोक्ताओं को प्रति किलोग्राम 2.37 डॉलर का भुगतान करना पड़ता है, जो भारतीय करेंसी में 227 रुपये के आसपास आता है। वहीं रूस में चीनी की औसत दर 1.99 डॉलर प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है, जो भारतीय रुपये में लगभग 191 रुपये के बराबर होती है।

अमेरिका, ब्राजील और सिंगापुर में मिठास की कीमतें

उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के प्रमुख देश अमेरिका की बात करें तो वहां चीनी की कीमत 1.80 डॉलर प्रति किलोग्राम बनी हुई है, जो भारतीय मुद्रा के अनुसार लगभग 172 रुपये प्रति किलो बैठती है। चीनी की महंगाई की इस वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका 20वें स्थान पर आता है। यद्यपि अमेरिका में गन्ने का उत्पादन किया जाता है, परंतु वहां गन्ने की सीमित उपलब्धता के कारण देश को अपनी कुल आवश्यकता का अधिकांश हिस्सा बाहरी देशों से मंगवाना पड़ता है। अमेरिका अपनी घरेलू खपत को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से भारत और ब्राजील से चीनी का आयात करता है।

विश्व स्तर पर चीनी उत्पादन के मामले में भारत के बाद ब्राजील का दूसरा सबसे बड़ा स्थान है। विशाल उत्पादन क्षमता के बावजूद ब्राजील में चीनी की औसत दर 1.12 डॉलर यानी लगभग 107 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहती है। इस सूची में ब्राजील 59वें पायदान पर काबिज है। दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्व एशियाई देश सिंगापुर महंगाई के मामले में 21वें स्थान पर है, जहां उपभोक्ताओं को 1 किलोग्राम चीनी के लिए 1.89 डॉलर चुकाने पड़ते हैं, जो भारतीय रुपये में लगभग 181 रुपये के बराबर है।

खाड़ी देशों में आयात पर निर्भरता और मूल्य स्थिति

मध्य पूर्व के खाड़ी देशों में प्राकृतिक रूप से पानी की भारी कमी के कारण गन्ने की खेती संभव नहीं हो पाती है। इस वजह से इन देशों को अपनी संपूर्ण घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बाहरी देशों से चीनी का आयात करना पड़ता है। खाड़ी क्षेत्र में चीनी की सबसे ऊंची दरें कुवैत में देखी जाती हैं, जो वैश्विक तालिका में 30वें स्थान पर स्थित है। कुवैत में 1 किलोग्राम चीनी का भाव 1.62 डॉलर है, जो भारतीय मुद्रा के रूप में 155 रुपये प्रति किलो बैठता है।

खाड़ी के एक अन्य प्रमुख देश सऊदी अरब की स्थिति देखें तो वह वैश्विक सूची में 47वें स्थान पर आता है। सऊदी अरब में चीनी का औसत फुटकर मूल्य 1.25 डॉलर प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है, जो भारतीय रुपये के हिसाब से करीब 120 रुपये बैठता है।

भारत और उसके पड़ोसी राष्ट्रों का तुलनात्मक विश्लेषण

यदि वैश्विक आंकड़ों के सबसे निचले पायदानों की बात करें, तो 79 देशों की इस सूची में भारत और उसका पड़ोसी देश पाकिस्तान सबसे नीचे आते हैं, जिसका अर्थ है कि यहां चीनी सबसे सस्ती दरों पर उपलब्ध है। भारत में चीनी का औसत बाजार भाव लगभग 55 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं पाकिस्तान में स्थानीय मुद्रा के अनुसार चीनी 175 से 200 रुपये प्रति किलो के बीच बिकती है, जिसे भारतीय रुपये में परिवर्तित करने पर यह दर 53 से 60 रुपये के आसपास ठहरती है। पाकिस्तान में लगभग 8 चीनी मिलें संचालित हैं और वहां की अधिकांश घरेलू जरूरतें स्थानीय उत्पादन से ही पूरी की जाती हैं।

भारत के अन्य पड़ोसी देशों में चीन का रुख करें तो वहां चीनी की कीमत 5.28 युआन प्रति किलोग्राम है, जो भारतीय मुद्रा में 72 से 75 रुपये के बीच बैठती है। बांग्लादेश इस सूची में 69वें स्थान पर है, जहां चीनी की दर 0.86 डॉलर यानी भारतीय रुपये में लगभग 82 रुपये प्रति किलोग्राम है। श्रीलंका 68वें स्थान पर आता है और वहां चीनी का मूल्य 0.88 डॉलर यानी करीब 84 रुपये प्रति किलो रहता है। बांग्लादेश और श्रीलंका दोनों ही देश अपनी चीनी की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से आयात पर ही आश्रित रहते हैं।

सवाल-जवाब

दुनिया में सबसे महंगी चीनी किस देश में बिकती है?
79 देशों के आंकड़ों के अनुसार यूरोपीय देश नॉर्वे में चीनी सबसे महंगी बिकती है, जहां इसकी औसत कीमत 4.22 डॉलर यानी लगभग 400 रुपये प्रति किलोग्राम है।
भारत में चीनी की औसतन कीमत कितनी है?
भारत में चीनी का औसत भाव लगभग 55 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो वैश्विक तुलना में काफी कम है।
पाकिस्तान में चीनी का क्या भाव है?
पाकिस्तान में चीनी 175 से 200 स्थानीय रुपये प्रति किलो बिकती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 53 से 60 रुपये बैठती है।
अमेरिका चीनी का आयात किन देशों से करता है?
अमेरिका अपनी जरूरत की अधिकांश चीनी भारत और ब्राजील से आयात करता है क्योंकि वहां गन्ने की पैदावार सीमित मात्रा में होती है।
दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन सा है?
भारत के बाद ब्राजील दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
खाड़ी देशों में चीनी महंगी क्यों बिकती है?
खाड़ी देशों में पानी की कमी के कारण गन्ने की खेती नहीं हो पाती है, जिसके कारण उन्हें अपनी अधिकांश चीनी आयात करनी पड़ती है।
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