देशभर में चीनी के दामों में आई अप्रत्याशित तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। विभिन्न शहरों के खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें 60 से 67 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर को छू चुकी हैं। इस उछाल का असर न केवल सामान्य परिवारों के मासिक घरेलू बजट पर पड़ रहा है, बल्कि आगामी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए मिठाई निर्माताओं और विक्रेताओं की चिंता भी अत्यधिक बढ़ गई है। अपनी प्रसिद्ध और लजीज मिठाइयों के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाले शहर जोधपुर में चीनी के इस तरह महंगे होने के स्पष्ट प्रभाव नजर आने लगे हैं।
किचन का बजट बिगड़ा: एक महीने में ₹20 तक महंगी हुई चीनी
स्थानीय किराना कारोबार की स्थिति को स्पष्ट करते हुए जोधपुर के व्यापारी संजू बताते हैं कि चीनी की दरों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। संजू के अनुसार, "महज एक महीने पहले चीनी का भाव 45 से 48 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 63 से 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।" बाजार में हर बीतते दिन के साथ चीनी के दामों में दो से तीन रुपये की दैनिक वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है।
किसी भी आम भारतीय परिवार में सुबह की शुरुआत चाय के साथ होती है। सुबह की चाय से लेकर दिनभर के विभिन्न खाद्य और पेय पदार्थों में चीनी का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। ऐसे में चीनी की कीमत में प्रति किलो 20 रुपये तक की यह सीधी बढ़ोतरी मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भारी साबित हो रही है। इस मूल्य वृद्धि के कारण लोगों की नियमित खरीदारी के तरीके में भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जो मध्यमवर्गीय और गरीब ग्राहक पहले अपनी आवश्यकता अनुसार 2 से 5 किलो चीनी एक साथ खरीदकर घर ले जाते थे, वे अब वित्तीय तंगी के चलते मात्र 250 ग्राम (पाव भर) चीनी खरीदने के लिए विवश हैं।
मिठाई उद्योग पर दबाव: रक्षाबंधन पर बढ़ेंगी कीमतें
जोधपुर की पारंपरिक मिठाइयों की मांग केवल राजस्थान या भारत के अन्य राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इनकी भारी खपत होती है। हाल ही में स्थानीय स्तर पर एक मिठाई व्यवसायी को विदेशी ग्राहक से 100 बॉक्स मिठाई भेजने का महत्वपूर्ण ऑर्डर भी प्राप्त हुआ है। हालांकि, निर्माण प्रक्रिया की मुख्य सामग्री यानी चीनी के भाव आसमान छूने से मिठाइयों को तैयार करने की लागत में बहुत बड़ा इजाफा हो चुका है।
मिठाई व्यवसायियों का कहना है कि लागत बढ़ने के बाद पुरानी दरों पर व्यापार करना संभव नहीं रह गया है। नतीजतन, ग्राहकों के लिए मिठाइयों के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बन चुका है। रक्षाबंधन पर्व के आगमन से ठीक पहले जोधपुर की अधिकांश मिठाई दुकानों पर दरों में स्पष्ट उछाल देखना तय है। इस पूरी परिस्थिति में बड़े व्यापारी तो शुगर मिलों से सीधे थोक माल खरीदकर या पहले से उपलब्ध स्टॉक के सहारे खुद को संभाल रहे हैं, लेकिन छोटे व मध्यम श्रेणी के दुकानदारों के साथ-साथ आम नागरिकों को महंगाई का सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
छोटे कारोबारियों पर मार: सरकारी दखल की मांग
बढ़ती महंगाई पर अपनी बात रखते हुए स्थानीय निवासी रेवती लाल पालीवाल कहते हैं कि लोग पहले से ही दैनिक राशन और जरूरत के सामान की ऊंची कीमतों से परेशान हैं। रेवती लाल पालीवाल के अनुसार, "रोजमर्रा की चीजों पर इस तरह 15 से 20 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, तो सामान्य आय वाले परिवारों के लिए घर चलाना नामुमकिन हो जाएगा।" जनता का मानना है कि खाद्य वस्तुओं के दाम इस प्रकार अनियंत्रित रहने से आम परिवार की वित्तीय स्थिति बिगड़ जाएगी।
त्योहारों के इस मुख्य मौसम में आम नागरिकों और स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने सरकार से स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। निवासियों और व्यापारियों की सामूहिक मांग है कि सरकार बाजार में हस्तक्षेप करे और रक्षाबंधन से पहले चीनी की बढ़ती दरों को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कड़े तथा ठोस कदम उठाए।



















