खेती किसानी की दुनिया में अब सिर्फ धान गेहूं तक बात नहीं रुकती है। कई किसान और उद्यमी अब इमारती लकड़ी वाले पेड़ों की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसमें देखभाल का खर्च कम होता है और लंबे समय में मुनाफा कहीं ज्यादा मिलता है। इसी कड़ी में सागवान यानी टीक की खेती किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, और खासकर टिश्यू कल्चर विधि से तैयार सागवान के पौधे अपनी तेज बढ़वार की वजह से सबका ध्यान खींच रहे हैं।
पलामू के सतीश दुबे की अनोखी पहल
झारखंड के पलामू जिले में व्यवसायी और प्रकृति प्रेमी सतीश दुबे ने अपने चार एकड़ के खेत को इमारती और फलदार पेड़ों का मॉडल बागान बना दिया है। नावाबाजार प्रखंड के बसना गांव में रहने वाले सतीश दुबे ने इस जमीन पर टिश्यू कल्चर विधि से तैयार सागवान के पौधे लगाकर आने वाले सालों के लिए मजबूत आमदनी का इंतजाम कर लिया है।
नागपुर से मंगाए 500 पौधे, दो साल में 25 से 30 फीट ऊंचाई
सतीश दुबे ने अपने चार एकड़ बागान में नागपुर से करीब 500 टिश्यू कल्चर सागवान के पौधे मंगवाकर लगाए। इन पौधों को रोपे हुए अभी सिर्फ दो साल हुए हैं, लेकिन इनकी ऊंचाई 25 से 30 फीट तक पहुंच चुकी है। सतीश दुबे बताते हैं कि टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों की सबसे खास बात यही है कि इनकी बढ़वार सामान्य सागवान के पौधों के मुकाबले काफी तेज होती है, साथ ही लकड़ी की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।
15 साल बाद एक पेड़ से एक लाख रुपये तक कमाई की उम्मीद
लोकल18 से बातचीत में सतीश दुबे ने बताया कि अगर सागवान के इन पौधों की करीब 15 साल तक सही देखभाल और सुरक्षा की जाए, तो एक पेड़ से करीब एक लाख रुपये तक का मुनाफा मिल सकता है। इमारती लकड़ी की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए आने वाले समय में इसके दाम और चढ़ सकते हैं। यही वजह है कि सागवान की खेती को किसानों के लिए एक बेहतर दीर्घकालिक निवेश माना जा रहा है।
शुरुआती सालों में देखभाल जरूरी, बाद में खर्च लगभग न के बराबर
सतीश दुबे के मुताबिक पौधे लगाते समय हर गड्ढे में 10 से 15 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद और जैविक सामग्री डाली गई थी। शुरुआती दो से तीन साल तक पौधों को नियमित सिंचाई, देखभाल और खरपतवार नियंत्रण की जरूरत पड़ती है। इसके बाद ये पौधे इतने मजबूत हो जाते हैं कि इन्हें किसी खास देखभाल की जरूरत नहीं रह जाती। रासायनिक खाद का इस्तेमाल भी बहुत कम करना पड़ता है, जिससे पूरी खेती की लागत काबू में रहती है।
अतिरिक्त जमीन वाले किसानों के लिए विकल्प
सतीश दुबे कहते हैं कि जिन किसानों के पास अतिरिक्त जमीन खाली पड़ी है, वे इमारती पौधों की खेती को आमदनी के एक वैकल्पिक जरिए के तौर पर अपना सकते हैं। टिश्यू कल्चर सागवान जैसी उन्नत किस्में तेज बढ़वार, अच्छी गुणवत्ता और ऊंचे बाजार भाव की वजह से किसानों को लंबे समय में आर्थिक सुरक्षा दे सकती हैं। पलामू का यह बागान इस बात की मिसाल है कि सही योजना और धैर्य के साथ इमारती पेड़ों की खेती आने वाले सालों में लाखों रुपये की कमाई का जरिया बन सकती है।











