रामपुर के स्वार क्षेत्र में मिर्च की खेती करने वाले किसान मोहम्मद आसिफ अली ने महंगी रासायनिक खाद के बजाय गोबर की खाद को अपनी खेती का मुख्य आधार बना लिया है। बढ़ती लागत से जूझ रहे किसानों के बीच उनका यह तरीका न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधार रहा है, बल्कि जेब पर पड़ने वाला बोझ भी हल्का कर रहा है। आसिफ अली का मानना है कि खेत की अच्छी तैयारी ही बेहतर फसल की पहली सीढ़ी होती है।
दो एकड़ में मिर्च की तैयारी, प्रति एकड़ 150 क्विंटल गोबर खाद
मोहम्मद आसिफ अली पिछले कई वर्षों से मिर्च की खेती करते आ रहे हैं। इस बार उन्होंने दो एकड़ जमीन में मिर्च की फसल लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। खेत तैयार करते समय उन्होंने प्रति एकड़ करीब 150 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डाली है। उनका कहना है कि जैविक खाद मिट्टी को भुरभुरा बना देती है, जिससे पौधों की जड़ें आसानी से फैल पाती हैं और फसल की शुरुआत मजबूत होती है। यही वजह है कि वह हर साल खेत की तैयारी के दौरान गोबर की खाद को सबसे पहली प्राथमिकता देते हैं।
गोबर खाद से घट जाता है रासायनिक उर्वरक पर होने वाला खर्च
आसिफ अली के मुताबिक उन्हें गोबर की खाद करीब 70 से 75 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल जाती है। शुरुआत में इसे खरीदने और खेत में डालने में जरूर खर्च आता है, लेकिन इसका फायदा बाद में साफ दिखता है। जब मिट्टी पहले से पोषक तत्वों से भरपूर हो जाती है तो रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाता है। यानी शुरुआती निवेश आगे चलकर किसान की कुल लागत घटाने में मदद करता है।
खेत तैयार करने का पूरा तरीका
आसिफ अली बताते हैं कि सबसे पहले खेत की गहरी जुताई की जाती है, ताकि मिट्टी ढीली हो सके। इसके बाद पूरे खेत में गोबर की खाद को बराबर मात्रा में फैलाया जाता है और रोटावेटर की मदद से इसे मिट्टी में अच्छी तरह मिला दिया जाता है। इसके बाद खेत को समतल करके क्यारियां तैयार की जाती हैं, ताकि पानी का निकास बेहतर रहे और पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती रहे। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यही है कि मिर्च की रोपाई से पहले मिट्टी को पूरी तरह उपजाऊ बनाया जा सके।
जैविक खाद से मिट्टी को मिलती है नई ताकत
आसिफ अली कहते हैं कि प्राकृतिक तरीके अपनाने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे पौधे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। इससे फसल की रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है और बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद बनी रहती है। कृषि विशेषज्ञों का भी कहना है कि अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी की संरचना सुधारने में बड़ी भूमिका निभाती है। इससे मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है, जमीन के भीतर मौजूद सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और पौधों को धीरे-धीरे जरूरी पोषक तत्व मिलते रहते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेताते हैं कि किसानों को कच्ची या अधपकी खाद के बजाय हमेशा पूरी तरह सड़ी हुई गोबर खाद का ही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि अधपकी खाद फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकती है।
स्वार क्षेत्र मिर्च उत्पादन के लिए है खास पहचान
रामपुर की स्वार तहसील मिर्च उत्पादन के लिए जानी जाती है। यहां हर साल बड़ी संख्या में किसान मिर्च की खेती करते हैं और तैयार फसल आसपास की मंडियों के साथ-साथ दूसरे शहरों तक भी भेजी जाती है। अच्छी पैदावार और बेहतर कमाई की चाहत में अब किसान फसल लगाने से पहले खेत की तैयारी पर खास ध्यान दे रहे हैं। अगर मिर्च की रोपाई से पहले मिट्टी की सही तैयारी की जाए और जैविक खाद का संतुलित इस्तेमाल किया जाए, तो फसल को शुरुआती दौर में ही मजबूती मिल सकती है। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है, बल्कि खेती की कुल लागत को नीचे लाने में भी यह तरीका कारगर साबित हो सकता है।











