अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है, जिससे इसकी कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे माहौल में पूरी दुनिया की निगाहें उन प्रमुख देशों पर टिकी हुई हैं, जिनकी जमीन के भीतर अब भी बिना खनन किया गया विशाल स्वर्ण भंडार मौजूद है। भविष्य में वैश्विक सर्राफा बाजार की दिशा तय करने में इन देशों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है।
रूस और ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) द्वारा जनवरी 2025 में जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, भूगर्भ में छिपे सोने के मामले में रूस और ऑस्ट्रेलिया संयुक्त रूप से दुनिया में पहले स्थान पर हैं। इन दोनों ही देशों के पास 12,000-12,000 टन ऐसा सोना मौजूद है, जिसे आधुनिक तकनीकों से आसानी से निकाला जा सकता है। यह मात्रा पूरी दुनिया के कुल बिना खनन वाले सोने का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा बनती है।
रिपोर्ट में इस छिपे हुए खजाने का मूल्यांकन 4,362 अमेरिकी डॉलर प्रति ट्रॉय औंस की दर पर किया गया है। इस आधार पर आकलन करें तो रूस और ऑस्ट्रेलिया में से प्रत्येक के पास जमीन के नीचे दबा हुआ सोना लगभग 1.687 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का है।
शीर्ष पांच देशों की रैंकिंग और उनका भंडार
दुनिया में सबसे ज्यादा जमीनी सोने के मामले में दक्षिण अफ्रीका तीसरे पायदान पर आता है। इसके भूगर्भ में लगभग 5,000 टन सोना दबा हुआ है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत करीब 701 अरब डॉलर बैठती है। इसके बाद चौथे स्थान पर इंडोनेशिया का नाम आता है, जिसके पास 3,800 टन का स्वर्ण भंडार है। वहीं 3,200 टन के भंडार के साथ कनाडा इस वैश्विक सूची में पांचवें स्थान पर काबिज है।
छठे से दसवें स्थान तक के प्रमुख देश
अगर सूची में आगे बढ़ें तो चीन और अमेरिका पहले से ही वैश्विक खनन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन बिना खनन वाले भंडार के मामले में चीन 3,100 टन सोने के साथ छठे नंबर पर है। इसके ठीक पीछे अमेरिका 3,000 टन के भंडार के साथ सातवें स्थान पर स्थित है।
इसके बाद 2,500 टन के भंडार के साथ पेरू आठवें स्थान पर है, जबकि 2,400 टन सोने के साथ ब्राजील नौवें स्थान पर आता है। इस वैश्विक सूची में दसवां स्थान कजाकिस्तान का है, जिसके भूगर्भ में 2,300 टन सोना मौजूद है।
7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का संयुक्त मूल्य और आर्थिक संभावनाएं
इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया का 85 प्रतिशत से अधिक बिना निकाला गया सोना केवल इन्हीं शीर्ष 10 देशों की सीमाओं में मौजूद है। यदि इन दस देशों के कुल भूमिगत स्वर्ण भंडार का मूल्य जोड़ा जाए, तो यह आंकड़ा 7 ट्रिलियन डॉलर की विशाल राशि को पार कर जाता है।
इन आंकड़ों के आधार पर इंडोनेशिया, पेरू और ब्राजील जैसे उभरते हुए बाजारों में भविष्य में खनन क्षेत्र के भीतर बड़े निवेश की संभावनाएं खुल रही हैं। दुनिया भर की प्रमुख खनन कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने और कम लागत में सोने का निष्कर्षण करने के लिए इन क्षेत्रों का रुख कर सकती हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा संबल मिलेगा।
अफ्रीकी महाद्वीप में बढ़ रही नई खोजें
केवल स्थापित देश ही नहीं, बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप के कई अन्य देश भी सोने की नई खोजों के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका तो 5,000 टन के साथ तीसरे स्थान पर है ही, इसके अलावा घाना में 1,000 टन, माली में 800 टन और तंजानिया में 400 टन सोने के भंडार दर्ज किए गए हैं। इन देशों में नई खोजों और खनन गतिविधियों में काफी तेजी देखी जा रही है।



















