60 लाख रुपये की नई प्रसंस्करण इकाई से चित्रकूट में फिर लौटेगी मोटे अनाज की खेती, किसानों को मिलेगा स्थानीय बाजारकर्नाटक भर में एफडीए की बड़ी कार्रवाई के तहत केएफसी आउटलेट और 5 सितारा होटलों से भारी मात्रा में बासी मीट बरामदअटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर अमित शाह ने याद किए पोखरण और कारगिल के ऐतिहासिक क्षणक्या अपना मकान बनाने के लिए कुकऑफ का खिताब कुर्बान करेंगी अनुपमा? वसुंधरा की नई चाल ने बढ़ाई उलझनबांग्लादेश की प्रत्यर्पण मांग पर भारत का रुख साफ, कूटनीतिक दबाव के बजाय अदालत तय करेगी कानूनी रास्तासकलडीहा के बिसुंधरी में 20 साल बाद बन रही सड़क पर भड़के ग्रामीण, नाली न बनने पर खुद खोदाई करने का अल्टीमेटमगॉल टेस्ट में भारत का दबदबा, पडिक्कल के पहले शतक के दम पर टीम इंडिया 288 पर मजबूतचित्रकूट के तुलसी पीठ में बना कांच का मंदिर, रामचरितमानस के प्रसंगों और रंगीन रोशनी से मोह रहा श्रद्धालुओं का मनसब्जी मंडी में मीठे आलू की पहचान कैसे करें: कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनोद प्रकाश ने बताए खरीदारी के आसान नियमउत्तर प्रदेश के मऊ में अमूल दूध और घर के मक्खन से बनता है खास बंद मक्खन, ₹30 में मिल रहा जबरदस्त स्वाद
60 लाख रुपये की नई प्रसंस्करण इकाई से चित्रकूट में फिर लौटेगी मोटे अनाज की खेती, किसानों को मिलेगा स्थानीय बाजारभारत
16 अग॰ 2026, 8:46 am (1 घंटे पहले)· 4

60 लाख रुपये की नई प्रसंस्करण इकाई से चित्रकूट में फिर लौटेगी मोटे अनाज की खेती, किसानों को मिलेगा स्थानीय बाजार

चित्रकूट में जिला खनिज मद से 60 लाख रुपये की लागत से श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई का निर्माण अंतिम दौर में है। इस इकाई के चालू होने से स्थानीय किसानों को ज्वार, बाजरा, कोदो और रागी जैसी फसलों के प्रसंस्करण और मार्केटिंग की सुविधा अपने ही जिले में मिलेगी।

बुंदेलखंड क्षेत्र के चित्रकूट जिले में पारंपरिक मोटे अनाजों यानी श्री अन्न की खेती को नया जीवन देने के लिए एक बड़ी योजना पर तेजी से काम चल रहा है। गनीवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में जिला खनिज मद से करीब 60 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जा रही है। वर्तमान में इस प्रसंस्करण केंद्र का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय किसानों को अपनी उपज का प्रसंस्करण कराने के लिए दूसरे जिलों या दूर-दराज के बाजारों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

चित्रकूट का इतिहास पारंपरिक रूप से मोटे अनाजों की पैदावार के लिए विख्यात रहा है। पूर्व समय में यहां के किसान बड़े पैमाने पर ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, सांवा, काकुन और रागी जैसी पोषक फसलों की खेती करते थे। हालांकि, समय बीतने के साथ स्थानीय स्तर पर इन अनाजों को बेचने, प्रसंस्कृत करने और उचित मूल्य दिलाने के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था मौजूद नहीं थी। मजबूरी में किसानों को अपनी तैयार फसल बेचने के लिए पड़ोसी जिलों में जाना पड़ता था, जिसके कारण भारी परिवहन खर्च और अतिरिक्त समय बर्बाद होता था। इसी वजह से लागत बढ़ने और मुनाफा घटने के कारण किसानों का रुझान इन फसलों से हटने लगा था और चित्रकूट में श्री अन्न की खेती लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गई थी।

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जिला प्रशासन की पहल और किसानों से संवाद

लुप्त होती इस कृषि परंपरा को दोबारा जीवित करने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष रणनीति तैयार की। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने स्थानीय किसानों के साथ सीधी बातचीत और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान किसानों को मोटे अनाजों के स्वास्थ्य लाभों, बाजार की बढ़ती मांग और सरकारी प्रोत्साहन के बारे में जागरूक किया गया। जिलाधिकारी के इस निरंतर प्रोत्साहन का सकारात्मक असर पड़ा और किसानों ने एक बार फिर अपने खेतों में श्री अन्न की बुआई शुरू कर दी। अब प्रशासन का मुख्य ध्यान किसानों की फसल को स्थानीय स्तर पर ही बाजार और प्रसंस्करण की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने पर केंद्रित है।

60 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रही अत्याधुनिक इकाई

किसानों को उनकी ही चौखट पर सुविधाएं देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र गनीवा में 60 लाख रुपये की अनुमानित लागत से इस प्रसंस्करण इकाई का ढांचा खड़ा किया गया है। निर्माण कार्य की प्रगति की बात करें तो मुख्य भवन का फेब्रिकेशन और रंग-रोगन का कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही, प्रसंस्करण कार्य में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों की पहली खेप भी केंद्र में पहुंच चुकी है। शीघ्र ही इन मशीनों की स्थापना और परीक्षण का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद यह इकाई पूर्ण रूप से क्रियाशील हो जाएगी।

आटा, लड्डू और बिस्किट जैसे तैयार होंगे वेल्यू एडेड उत्पाद

इस नई इकाई के शुरू होने के बाद चित्रकूट के किसान निर्धारित सरकारी या पारदर्शी दरों का भुगतान करके अपनी ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, सांवा, काकुन और रागी की फसल का प्रसंस्करण यहीं करा सकेंगे। प्रसंस्करण के बाद इस केंद्र में मोटे अनाज से पौष्टिक आटा, स्वादिष्ट लड्डू, बिस्किट और कई प्रकार के तैयार खाद्य पदार्थ बनाए जाएंगे। इन तैयार उत्पादों को आकर्षक पैकिंग के साथ बाजार में उतारा जाएगा, जिससे उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी और किसानों को अपनी उपज का पहले से कहीं अधिक दाम मिल सकेगा।

स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के अनुसार, इस प्रसंस्करण इकाई के बनने से न केवल किसानों का समय और भाड़े का खर्च बचेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। जब पैकेज्ड उत्पाद सीधे बाजार में बिकेंगे, तो इससे श्री अन्न से जुड़े छोटे उद्योगों और कुटीर व्यवसायों का विस्तार होगा। इसके अलावा, प्रसंस्करण, पैकिंग और विपणन की पूरी श्रृंखला में स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सवाल-जवाब

चित्रकूट में श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई की स्थापना कहाँ और कितनी लागत से की जा रही है?
यह इकाई चित्रकूट के गनीवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में जिला खनिज मद से करीब 60 लाख रुपये की लागत से तैयार की जा रही है।
इस प्रसंस्करण इकाई में किन-किन अनाजों का प्रसंस्करण किया जा सकेगा?
इस केंद्र में किसान ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, सांवा, काकुन और रागी जैसे पारंपरिक श्री अन्न अनाजों का प्रसंस्करण करा सकेंगे।
प्रसंस्करण के बाद इस इकाई में कौन-कौन से उत्पाद तैयार किए जाएंगे?
इकाई में मोटे अनाज से पौष्टिक आटा, स्वादिष्ट लड्डू, बिस्किट और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार करके आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में बेचे जाएंगे।
इस इकाई के चालू होने से चित्रकूट के किसानों को क्या मुख्य लाभ होगा?
किसानों को फसल बेचने के लिए दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनका परिवहन (भाड़ा) खर्च और समय बचेगा तथा पैकेज्ड उत्पादों से अधिक मूल्य प्राप्त होगा।
इस प्रसंस्करण केंद्र के निर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है?
निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, भवन का फेब्रिकेशन और रंग-रोगन पूरा हो चुका है तथा मशीनों की पहली खेप भी कृषि विज्ञान केंद्र पहुंच चुकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 मिनट पहले

यह प्रशासनिक और कृषि सुधार की एक सकारात्मक पहल है, लेकिन आपराधिक दृष्टिकोण से यह देखना भी आवश्यक है कि जिला खनिज फंड जैसी विकास निधियों का उपयोग पूरी पारदर्शिता से हो और बिचौलियों या ठेकेदारों के स्तर पर कोई वित्तीय अनियमितता न बरती जाए। प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित होने पर ही किसानों को इस 60 लाख की इकाई का वास्तविक और सुरक्षित आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 मिनट पहले

यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है। हालांकि, केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से कृषि पुनरुद्धार संभव नहीं है। दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य, संगठित आपूर्ति श्रृंखला और राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्रदान करने के लिए आगे क्या रणनीतिक कदम उठाती है।

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