भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने एक नया इतिहास रचते हुए अपनी आर्थिक सेहत को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है। वित्तीय संकटों, बढ़ते बैड लोन और कमजोर बैलेंस शीट के पुराने दौर को पीछे छोड़ते हुए इन बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में न केवल अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा हासिल किया है, बल्कि अपने फंसे हुए कर्जों को भी कई दशकों के न्यूनतम स्तर पर ला खड़ा किया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह बदलाव पिछले चार-पांच वर्षों के दौरान किए गए लगातार सुधारों और अनुशासित क्रेडिट नीतियों का परिणाम है।
वित्तीय सेहत में ऐतिहासिक सुधार: तीन गुना बढ़ा कुल शुद्ध लाभ
सरकारी बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन में आया यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल शुद्ध लाभ बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यदि इसकी तुलना वित्त वर्ष 2021-22 (FY22) से की जाए, तो उस समय इन बैंकों का कुल मुनाफा महज ₹0.67 लाख करोड़ था। इस प्रकार मात्र चार वर्षों की अवधि में सरकारी बैंकों की कमाई में लगभग तीन गुना की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही, बैंकों की संपत्तियों की गुणवत्ता में भी क्रांतिकारी सुधार आया है। वित्त वर्ष 2022 में बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) अनुपात करीब 7.3 फीसदी के चिंताजनक स्तर पर था, जो लगातार गिरते हुए वित्त वर्ष 2026 में घटकर सिर्फ 1.9 फीसदी रह गया है। यह आंकड़ा भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बेहतर स्तरों में से एक माना जा रहा है।
बैंकिंग कारोबार में भारी उछाल: डिपॉजिट और कर्ज दोनों में वृद्धि
कमाई और बैड लोन में सुधार के साथ-साथ सरकारी बैंकों के समग्र व्यापार में भी अभूतपूर्व विस्तार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल कारोबार ₹283 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। इस वृद्धि का मुख्य आधार ग्राहकों के भरोसे में हुआ इजाफा और ऋण वितरण में आई तेजी है। वित्त वर्ष 2021-22 में इन बैंकों के पास कुल जमा राशि ₹107.2 लाख करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹156.3 लाख करोड़ के नए शिखर पर पहुंच गई। दूसरी ओर, अर्थव्यवस्था की क्रेडिट जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों ने ऋण वितरण में भी भारी तेजी दिखाई। FY22 में दिया गया कुल लोन और एडवांस ₹74.3 लाख करोड़ था, जो FY26 तक बढ़कर ₹127 लाख करोड़ के स्तर को छू चुका है।
छोटे उद्योगों और रिटेल सेक्टर को मिला मजबूत क्रेडिट सपोर्ट
सरकारी बैंकों की इस तेज वृद्धि में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा रिटेल लोन सेगमेंट का सबसे बड़ा योगदान रहा है। वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, MSME सेक्टर को दिए जाने वाले लोन में 19.6 फीसदी की जोरदार सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ, व्यक्तिगत आवश्यकताओं, ऑटो लोन और आवास ऋण से जुड़े रिटेल लोन सेगमेंट में 19.8 फीसदी का उछाल आया है। ऋण उपलब्धता में इस तेज वृद्धि से न केवल छोटे कारोबारियों को अपनी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है, बल्कि आम नागरिकों के लिए घर खरीदने और दैनिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करना भी अधिक आसान हुआ है।
पूंजीगत आधार हुआ मजबूत: CRAR बढ़कर 16.6% पर पहुंचा
सरकारी बैंकों की इस मजबूत वापसी के पीछे उनका सशक्त कैपिटल बेस भी एक प्रमुख कारक रहा है। किसी भी बैंक की वित्तीय स्थिरता और जोखिम सहने की क्षमता का मूल्यांकन उसके कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) से किया जाता है। बीते पांच वर्षों के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपने पूंजीगत ढांचे को काफी सुदृढ़ किया है। इस अवधि में बैंकों का CRAR 14.6 फीसदी से सुधरकर 16.6 फीसदी के उच्च स्तर पर आ गया है। पूंजी अनुपात में इस सुधार से बैंकों को भविष्य में उत्पन्न होने वाले किसी भी संभावित आर्थिक जोखिम से निपटने की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त हुई है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच राहत: सरकार ने लागू की ECLGS 5.0 योजना
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न व्यापारिक अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने मई 2026 में आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS 5.0) की शुरुआत की है। इस विशेष योजना का मुख्य उद्देश्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण प्रभावित होने वाले भारतीय कारोबारियों को तत्काल तरलता और वित्तीय सहायता प्रदान करना है। ECLGS 5.0 के तहत कुल क्रेडिट सपोर्ट की सीमा ₹2.55 लाख करोड़ निर्धारित की गई है। इस योजना के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को 100 फीसदी तक की शत-प्रतिशत गारंटी कवरेज दी जा रही है, जबकि गैर-MSME इकाइयों तथा शेड्यूल्ड पैसेंजर एयरलाइंस को 90 फीसदी तक का गारंटी कवर प्रदान किया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यवधानों के बावजूद परिचालन सुचारू बना रहे।



















