अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अधिकांश प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले बढ़त दर्ज की है, जिसका मुख्य आधार रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा मौद्रिक नीति को और कड़ा किए जाने की प्रबल संभावना है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का केंद्रीय बैंक आगामी सप्ताह अपनी अगली बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों यानी 0.25 प्रतिशत की एक और वृद्धि कर सकता है। अमेरिकी डॉलर को छोड़कर अन्य प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के सामने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली गिरावट के साथ 0.7120 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि एशियाई सत्र में यह 0.7100 के अहम स्तर से ऊपर मजबूती से बना रहा। नवीनतम बाजार आंकड़ों के अनुसार, इस मुद्रा जोड़ी का भाव 0.7132 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर 0.7115 से 0.23 प्रतिशत अधिक है।
केंद्रीय बैंक के नीतिगत रुख और मुद्रास्फीति की चिंताएं
मुद्रा की इस मजबूती के पीछे नीतिगत बयानों की अहम भूमिका रही है। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलॉक ने संसदीय ट्रेजरी कमेटी के समक्ष मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों को लेकर आगाह किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सबसे मुख्य सवाल यह है कि अब तक की गई मौद्रिक सख्ती क्या महंगाई को उचित समय सीमा के भीतर लक्ष्य तक वापस लाने के लिए पर्याप्त साबित होगी। इस बयान ने निवेशकों के बीच यह भरोसा गहरा किया है कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए दरों में और इजाफा करने से पीछे नहीं हटेगा। पारंपरिक अर्थशास्त्र में मुद्रास्फीति को किसी मुद्रा की क्रय शक्ति घटाने वाला नकारात्मक कारक माना जाता था, परंतु आधुनिक वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सीमा पार पूंजी प्रवाह सुगम होने के कारण स्थिति भिन्न है। जब मध्यम स्तर की महंगाई केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ाने पर विवश करती है, तो उच्च प्रतिफल की तलाश में जुटे वैश्विक निवेशक उस देश में पूंजी लगाते हैं, जिससे स्थानीय मुद्रा की मांग सीधे तौर पर बढ़ जाती है।
दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारी भी मूल्य वृद्धि को लेकर सतर्क रुख बनाए हुए हैं। मिनियापोलिस फेड बैंक के अध्यक्ष नील काशकारी ने फॉक्स न्यूज के संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स कार्यक्रम में कहा कि उच्च मुद्रास्फीति नीति निर्माताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में महंगाई अत्यधिक बनी हुई है, न कि केवल कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण। इस बयान से अमेरिकी डॉलर को भी समर्थन मिला, जिसने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले उसके नुकसान को सीमित रखा।
तकनीकी स्तर और चार्ट विश्लेषण
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो इस मुद्रा जोड़ी के लिए 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 0.7141 पर तात्कालिक प्रतिरोध के रूप में देखा गया था, जबकि नवीनतम गणना में 20 EMA का स्तर 0.7143 के आसपास दर्ज हुआ है। जब तक कीमत इस अल्पकालिक अवरोध को निर्णायक रूप से पार नहीं करती, तब तक नीचे की ओर दबाव का जोखिम बना रह सकता है और कारोबारी किसी भी उछाल पर बिकवाली की रणनीति अपना सकते हैं। हालांकि, दीर्घकालिक प्रवृत्ति सकारात्मक बनी हुई है क्योंकि 50 EMA (0.7107) और 200 EMA (0.6956) के साथ चार्ट पर गोल्डन क्रॉस की स्थिति मौजूद है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 49 के स्तर पर तटस्थ क्षेत्र में है, जबकि 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 0.7094 से 0.7238 के दायरे में स्थित हैं। बाजार के लिए धुरी स्तर 0.7126 पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध 0.7138 और दूसरा 0.7144 पर देखा जा रहा है, जबकि समर्थन स्तर 0.7120 और 0.7109 पर मौजूद हैं। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है।
रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की कार्यप्रणाली और मौद्रिक औजार
ऑस्ट्रेलिया का केंद्रीय बैंक देश के लिए ब्याज दरें तय करने और समग्र मौद्रिक नीति के प्रबंधन का दायित्व संभालता है। इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा एक वर्ष में 11 नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं, जबकि आवश्यकता पड़ने पर आपात बैठकें भी बुलाई जाती हैं। बैंक का प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मानक 2 से 3 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर हासिल करना तय किया गया है। इसके साथ ही मुद्रा की स्थिरता, पूर्ण रोजगार और ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की आर्थिक समृद्धि व कल्याण में योगदान देना इसके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है।
इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ब्याज दरों में समायोजन बैंक का प्राथमिक साधन है। अपेक्षाकृत उच्च ब्याज दरें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान करती हैं, जबकि दरों में कटौती इसे कमजोर करती है। असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में बैंक गैर-पारंपरिक औजारों जैसे क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा लेता है। इसके तहत वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदकर वित्तीय तंत्र में नकदी पहुंचाई जाती है, जिससे आमतौर पर मुद्रा कमजोर होती है। इसके विपरीत, आर्थिक सुधार और मुद्रास्फीति बढ़ने के चरण में क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक अतिरिक्त संपत्तियों की खरीद रोक देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड्स के मूलधन का पुनर्निवेश बंद कर देता है, जो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक या तेजी का कारक बनता है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई, रोजगार आंकड़े और उपभोक्ता धारणा जैसे व्यापक आर्थिक संकेतक भी मुद्रा की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
वैश्विक वित्तीय बाजारों और परिसंपत्तियों की हलचल
वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी व्यापक गतिविधियों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कैनेडियन डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रहा। वहीं एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर/येन 157.00 के स्तर से नीचे खिसक गया, क्योंकि बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में ब्याज दर जांच किए जाने के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को मजबूती प्रदान की। बैंक ऑफ जापान ने अपनी नीति सामान्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप रहा। जापान में सार्वजनिक अवकाश और रूस-यूक्रेन तथा मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
कमोडिटी बाजार में सोने के भाव में कमजोरी देखी गई। शुक्रवार को 4,400 डॉलर के स्तर के समीप विफल रहने के बाद सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जहां निवेशक मध्य पूर्व संकट और मुद्रास्फीति पर इसके संभावित प्रभावों पर नजर बनाए हुए हैं। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन ने रिकवरी की रफ्तार तेज की और 6 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के बाद 0.088 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार किया, जिसे स्पॉट ईटीएफ के जरिए संस्थागत मांग का समर्थन प्राप्त हो रहा है। अमेरिकी आर्थिक परिदृश्य की बात करें तो चालू सप्ताह में घरेलू आंकड़ों का प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है, जहां गुरुवार को आने वाली नई आवास बिक्री रिपोर्ट पर नजर रहेगी, जिसके जुलाई की तेज गिरावट के बाद अगस्त में 2.6 प्रतिशत सुधरकर 623K रहने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके अलावा पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट्स पर यथास्थिति बनाए रखने तथा आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले वैश्विक घटनाक्रमों पर निवेशकों की करीबी नजर बनी हुई है।















