ताजमहल की मिट्टी में छिपा है मुनाफे का खजाना: आगरा की 8 फसलें जो किसानों की किस्मत बदल रहींव्यापार
4 घंटे पहले· 0

ताजमहल की मिट्टी में छिपा है मुनाफे का खजाना: आगरा की 8 फसलें जो किसानों की किस्मत बदल रहीं

आगरा सिर्फ ताजमहल के लिए नहीं, अपनी उपजाऊ ज़मीन पर उगने वाली बंपर फसलों के लिए भी मशहूर है। आलू से लेकर पेठे वाले कद्दू तक, यहां की 8 फसलें किसानों को कम लागत में अच्छा मुनाफा दे रही हैं।

ताजमहल की पहचान से दुनिया भर में जाने जाने वाला आगरा खेती-किसानी के मामले में भी किसी से पीछे नहीं है। यहां की ज़मीन को बेहद उपजाऊ माना जाता है—कुछ इलाकों को छोड़ दें तो अधिकांश भूमि फसल उगाने के लिए मुफीद है। शहर और इसके आसपास के देहाती इलाकों में बड़े पैमाने पर तरह-तरह की फसलें लहलहाती हैं। आइए जानते हैं उन 8 प्रमुख फसलों के बारे में, जिन्होंने आगरा के किसानों की आमदनी को मजबूत आधार दिया है।

आलू: आगरा की पहचान बनी फसल

आगरा में आलू की खेती सबसे बड़े स्तर पर होती है। यहां का आलू इतना नामी है कि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ कई दूसरे राज्यों तक इसकी सप्लाई पहुंचती है। यही वजह है कि आलू को आगरा की कृषि पहचान का हिस्सा माना जाता है।

भिंडी और बैगन: नदी किनारे की नमी का फायदा

आलू की ही तरह भिंडी की पैदावार भी यहां बड़े पैमाने पर होती है। किसानों के मुताबिक आगरा की भिंडी देशी खाद और डी.ए.पी. के सहारे उगाई जाती है, और अच्छी देशी खाद की बदौलत इसकी पैदावार भी जोरदार रहती है। यहां की भिंडी लंबी, चमकदार और खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है।

बैगन की खेती भी आगरा में खूब प्रसिद्ध है। यहां मोटे और गोल आकार वाले बैगन की खासी मांग रहती है। किसान बताते हैं कि नदी किनारे की नमी की वजह से बैगन की क्वालिटी बेहतरीन होती है। पैदावार के बाद इसे सीधे मंडी भेजा जाता है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है। आगरा का बैगन यहां के अलावा कई जिलों और राजस्थान व मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों तक भेजा जाता है।

टमाटर: हर मौसम की अलग किस्म

उपजाऊ ज़मीन का फायदा टमाटर की खेती को भी मिलता है, जो यहां व्यापारिक स्तर पर होती है। किसान मौसम के हिसाब से अलग-अलग किस्म का टमाटर उगाते हैं। गर्मियों में तैयार होने वाली किस्म देखने में बिल्कुल देशी जैसी लगती है और स्वाद भी देशी टमाटर जैसा ही होता है—फर्क बस इतना कि इसका छिलका थोड़ा मोटा होता है।

पालक: एक बार बुआई, कई बार कटाई

यमुना का किनारा और आसपास बहने वाली नदियां आगरा की ज़मीन में नमी बनाए रखती हैं, और नमी वाली इसी ज़मीन में पालक तेज़ी से बढ़ता है। किसान बताते हैं कि पालक की खेती में लागत कम और मुनाफा अच्छा रहता है। बीज रोपने के करीब 45 से 50 दिन बाद यह कटाई के लायक हो जाता है। सबसे बड़ी बात यह कि एक बार बुआई करने पर पालक को तीन से चार बार काटा जा सकता है, जिससे किसानों की कमाई कई गुना बढ़ जाती है।

मूंग: कम लागत, ज्यादा डिमांड

सब्जियों के अलावा मूंग की फसल भी आगरा में बड़े स्तर पर ली जाती है। कम लागत और बेहतर मुनाफे की वजह से किसान इसे उगाना पसंद करते हैं। यहां की मूंग देशी तरीके से तैयार होती है, इसलिए खाने में बेहद स्वादिष्ट रहती है और इससे बनी दाल व दूसरी चीज़ें लोगों को खूब भाती हैं। यही कारण है कि आगरा की मूंग की मांग बनी रहती है और यह राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों तक पहुंचती है।

कद्दू: मशहूर पेठे की असली जड़

आगरा का पेठा जिस फल से बनता है, वह असल में कद्दू है—और इसी वजह से यहां कद्दू की भारी मांग रहती है। किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती करते हैं। सफेद कद्दू से पेठा तैयार किया जाता है, जबकि हरा कद्दू सब्जी और रायते जैसे व्यंजनों में काम आता है। किसानों का कहना है कि कद्दू की खेती से उन्हें अच्छा लाभकारी मूल्य मिलता है। आगरा के व्यापारी इसे खरीदकर पेठा बनाने वालों तक पहुंचाते हैं।

लौकी: जैविक खेती की मिसाल

लौकी की फसल भी आगरा में काफी लोकप्रिय है, जो बड़ी-बड़ी बेलों पर उगती है। इसे जैविक खेती और देशी खाद के सहारे तैयार किया जाता है। किसान बताते हैं कि इसमें किसी तरह के केमिकल या इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं होता, और यही वजह है कि आसपास के इलाकों में यहां की लौकी सबसे ज्यादा मशहूर है। स्वाद के मामले में भी यह बेहद लाजवाब होती है।

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