थाली तक पहुंच रही मिलावट: दूध, पनीर और घी से लेकर दवाइयों तक कैसे फैल रहा नकली सामान का जालव्यापार
2 घंटे पहले· 0

थाली तक पहुंच रही मिलावट: दूध, पनीर और घी से लेकर दवाइयों तक कैसे फैल रहा नकली सामान का जाल

देशभर में दूध, पनीर, घी, दवाइयों और कॉस्मेटिक्स में मिलावट के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, और नकली सामान का यह कारोबार हर साल असली व्यापार को करीब 4.8 लाख करोड़ रुपये की चोट पहुंचा रहा है।

रसोई से लेकर दवा की अलमारी तक, आज जो चीज हम बिना सोचे इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी असलियत पर भरोसा करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। बाजार में नकली और मिलावटी सामान का जाल इतना गहरा हो चुका है कि दूध, पनीर, जूस, घी और यहां तक कि दवाइयों में भी मिलावट खुलकर पकड़ी जा रही है। मुट्ठीभर लोग यह गोरखधंधा चलाकर लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं, लेकिन इसकी सबसे भारी कीमत आम आदमी अपनी सेहत गंवाकर चुका रहा है। सरकार और प्रशासन छापेमारी और कार्रवाई तो लगातार कर रहे हैं, फिर भी यह धंधा जड़ से खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।

महाराष्ट्र में नकली दूध का बड़ा खेल

इस मिलावटखोरी की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर महाराष्ट्र के धाराशिव से सामने आई, जहां नकली दूध का बड़ा कारोबार पकड़ा गया। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ तीन साल के भीतर करीब 4 करोड़ 63 लाख रुपये का नकली दूध बाजार में खपाया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस कारोबार में करीब 2 लाख 30 हजार किलो मिल्क पाउडर का इस्तेमाल किया गया। इसी पाउडर और दूसरी चीजों को मिलाकर करीब 23 लाख लीटर सिंथेटिक दूध तैयार किया गया और उसे बाजार में बेच दिया गया, जिसकी कुल कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई। यानी लोग महीनों तक जिसे शुद्ध दूध समझकर पी रहे थे, वह असल में कारखाने में बनाया गया नकली दूध था।

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राजस्थान में पकड़ा गया नकली पनीर

मिलावट का यह सिलसिला सिर्फ दूध तक नहीं रुका, बल्कि नकली पनीर भी सीधे लोगों की थाली तक पहुंच रहा है। राजस्थान के कई इलाकों में नकली पनीर बनाने और बेचने का काम खुलेआम चल रहा था। अलवर में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलकर कार्रवाई की और 545 किलो सिंथेटिक पनीर जब्त किया। इस पनीर को दोबारा किसी की थाली तक पहुंचने से रोकने के लिए जमीन में गाड़कर नष्ट किया गया। इसके अलावा कोटपूतली के नीमराना इलाके से भी 150 किलो मिलावटी पनीर पकड़ा गया, जिसके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। इन मामलों से साफ है कि नकली पनीर का धंधा किसी एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैला हुआ है।

दवाइयों, घी और कॉस्मेटिक्स में भी सेंध

नकली सामान का यह कारोबार खाने-पीने की चीजों तक ही नहीं रुका है। बीते कुछ ही हफ्तों में दवाइयों, घी, कॉस्मेटिक्स और रोजमर्रा के दूसरे सामानों में भी मिलावट के कई मामले उजागर हुए हैं। 11 जुलाई को उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ 63 लाख रुपये की नकली दवाइयां पकड़ी गईं, जो सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ हैं। इससे एक दिन पहले, 10 जुलाई को महाराष्ट्र के नांदेड़ में करीब 40 लाख रुपये का नकली कॉस्मेटिक्स सामान जब्त किया गया। 3 जुलाई को दिल्ली के ओखला में एक्सपायरी सामान बेचने के आरोप में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले 10 जून को अहमदाबाद में 31 लाख 80 हजार रुपये का नकली घी पकड़ा गया, तो 1 जून को राजस्थान के पोखरण में 14 हजार किलो मिलावटी घी और तेल जब्त हुआ। वहीं 26 जून को गुजरात के कच्छ में नकली शराब बनाने वाली एक पूरी फैक्ट्री ही पकड़ी गई। इन घटनाओं की कतार बताती है कि मिलावटखोरी अब किसी एक चीज या एक राज्य की समस्या नहीं रह गई।

कितना बड़ा है नकली सामान का यह बाजार

नकली यानी फर्जी प्रोडक्ट का कारोबार अब भारत के लिए एक बड़ी बीमारी बन चुका है। इससे एक तरफ जहां लोगों की सेहत खतरे में पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ असली कंपनियों और ईमानदार कारोबारियों को भी तगड़ी चोट लग रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नकली सामान की वजह से देश के असली कारोबार को हर साल करीब 4.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। यही रिपोर्ट यह भी बताती है कि बीते एक साल में हर तीन में से एक भारतीय किसी न किसी रूप में नकली सामान का शिकार बना है। इतना ही नहीं, शहरों में रहने वाले करीब 89 प्रतिशत लोग अपनी जिंदगी में कभी न कभी नकली सामान खरीद चुके हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अब अपवाद नहीं, बल्कि आम अनुभव बन चुकी है।

ऑनलाइन बाजार में भी घुसपैठ

नकली सामान बेचने वालों ने अब सिर्फ गली-मोहल्ले की दुकानों पर निर्भर रहना छोड़ दिया है। इन लोगों ने ऑनलाइन बाजार को भी अपना अड्डा बना लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में नकली सामान की खरीदारी अब ऑनलाइन माध्यम से हो रही है, जहां ग्राहक को असली और नकली का फर्क पहचानना और भी मुश्किल हो जाता है। कई लोगों का यह भी कहना है कि पिछले कुछ समय में उनके अपने इलाकों में नकली सामान की मौजूदगी साफ तौर पर बढ़ी है।

किन चीजों में सबसे ज्यादा मिलावट

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सबसे ज्यादा मिलावट कृषि से जुड़े सामानों में देखने को मिल रही है, जिनमें अनाज, दाल, फल और सब्जियां शामिल हैं। इसके अलावा कपड़े, दवाइयां, रोजाना इस्तेमाल की चीजें और गाड़ियों के कलपुर्जे भी नकली सामान की चपेट में हैं। आंकड़ों की मानें तो कृषि उत्पादों में करीब 35 प्रतिशत तक मिलावट पाई गई है, जबकि कपड़ों में यह आंकड़ा 31 प्रतिशत, दवाइयों में 28 प्रतिशत, रोजाना इस्तेमाल की चीजों में 27 प्रतिशत और गाड़ियों के कलपुर्जों में 22 प्रतिशत तक पहुंच गया है। साफ है कि हमारी रोजमर्रा की जरूरत की लगभग हर श्रेणी में नकली का खतरा मौजूद है।

बड़े ब्रांड भी उतरे मैदान में

नकली सामान की मार सिर्फ आम आदमी या छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बड़ी विदेशी और लग्जरी कंपनियां भी इससे खासी परेशान हैं। अपने ब्रांड की साख बचाने के लिए कई लग्जरी कंपनियां अब बाजार में नकली माल की पहचान के लिए निजी जांचकर्ताओं की मदद ले रही हैं। ये जांचकर्ता आम ग्राहक बनकर बाजार में उतरते हैं, नकली सामान का स्रोत पता लगाते हैं और फिर कंपनियां उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई करती हैं।

नकल पकड़ने में AI का सहारा

अब इस लड़ाई में तकनीक भी बड़ा हथियार बनकर उभर रही है। नकली सामान बेचने वालों के नेटवर्क पर नजर रखने के लिए अमेरिका की सिग्ना टेकलॉ कॉर्प. जैसी कंपनियां जांच के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली माल कहां से और कैसे बाजार में पहुंच रहा है। असल बात यह है कि बाजार में फैला नकली सामान सिर्फ पैसों के नुकसान की कहानी नहीं है, यह सीधे लोगों की सेहत और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इससे पार पाने के लिए जहां प्रशासन की सख्ती जरूरी है, वहीं आम लोगों को भी खरीदारी करते वक्त पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

सवाल-जवाब

महाराष्ट्र के धाराशिव में नकली दूध का कितना बड़ा मामला पकड़ा गया?
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक तीन साल में करीब 4 करोड़ 63 लाख रुपये का नकली दूध बेचा गया, जिसमें करीब 2 लाख 30 हजार किलो मिल्क पाउडर का इस्तेमाल हुआ।
कितना सिंथेटिक दूध बनाकर बेचा गया?
करीब 23 लाख लीटर सिंथेटिक दूध तैयार कर बाजार में बेचा गया, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई।
राजस्थान में नकली पनीर को लेकर क्या कार्रवाई हुई?
अलवर में 545 किलो सिंथेटिक पनीर जब्त कर जमीन में दबाकर नष्ट किया गया, जबकि कोटपूतली के नीमराना इलाके से 150 किलो मिलावटी पनीर पकड़ा गया।
नकली सामान से भारत के असली कारोबार को हर साल कितना नुकसान हो रहा है?
एक रिपोर्ट के मुताबिक नकली सामान की वजह से देश के असली कारोबार को हर साल करीब 4.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किन चीजों में सबसे ज्यादा मिलावट पाई गई है?
सबसे ज्यादा मिलावट कृषि उत्पादों में करीब 35 प्रतिशत तक पाई गई, इसके बाद कपड़ों में 31, दवाइयों में 28, रोजाना इस्तेमाल की चीजों में 27 और गाड़ियों के कलपुर्जों में 22 प्रतिशत तक मिलावट का दावा है।
क्या आम लोग भी नकली सामान का शिकार हो रहे हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक बीते एक साल में हर तीन में से एक भारतीय नकली सामान का शिकार बना, और करीब 89 प्रतिशत शहरी लोग कभी न कभी नकली सामान खरीद चुके हैं।
नकली सामान पकड़ने में तकनीक की क्या भूमिका है?
अमेरिका की सिग्ना टेकलॉ कॉर्प. जैसी कंपनियां जांच के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर नकली सामान बेचने वाले नेटवर्क का पता लगा रही हैं।

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