पुरानी गाड़ी खरीदने का विचार बना रहे लोगों के लिए अब फंडिंग की प्रक्रिया काफी सरल हो चुकी है। बाजार में सक्रिय डीलर्स और वित्तीय संस्थान ग्राहकों को बहुत कम औपचारिकताएं पूरी करने पर ही वाहन ऋण मुहैया करा रहे हैं। पहले जहां इस तरह के कर्जों को पाने में लंबा वक्त लगता था, वहीं अब डीलर्स की तरफ से महज चौबीस घंटे के अंदर ही आवेदन स्वीकृत कर गाड़ी सुपुर्द करने के दावे किए जा रहे हैं। इसके चलते बिहार के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोग भी बेहद सहज कागजी कार्रवाई के जरिए अपनी पसंद की गाड़ी घर लाने में कामयाब हो रहे हैं।
आवश्यक दस्तावेजों की सूची
इस पूरी फंडिंग प्रक्रिया में बहुत ज्यादा कागजी कार्रवाई या पेचीदगियों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस आसान व्यवस्था के तहत मुख्य रूप से पहचान पत्र, आवासीय प्रमाण और बैंक खातों के लेन-देन से जुड़े दस्तावेज ही प्रस्तुत करने होते हैं। इनमें मूल रूप से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बीते छह महीनों का बैंक विवरण और पासपोर्ट आकार की तस्वीरें शामिल होती हैं। आमतौर पर प्रयुक्त वाहनों पर ऋण के लिए बहुत भारी-भरकम आय प्रमाण की अनिवार्यता नहीं होती है। हालांकि, जब कोई ग्राहक किसी बड़े या पारंपरिक बैंक का रुख करता है, तो नौकरीपेशा लोगों के लिए वेतन पर्ची और कारोबारियों के लिए दो से तीन साल का आयकर रिटर्न, निवास प्रमाण पत्र तथा वाहन का कोटेशन जैसे अतिरिक्त कागज भी मांगे जा सकते हैं।
वित्त पोषण और डाउन पेमेंट का गणित
वाहन ऋण के जरिए वित्तीय संस्थान वाहन के कुल मूल्यांकन का सत्तर प्रतिशत से लेकर पचासी प्रतिशत तक की राशि उधार के रूप में देते हैं। मिलने वाली यह फंडिंग पूरी तरह से आवेदक की साख और उसके सिबिल स्कोर पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी प्रयुक्त वाहन का कुल मूल्य पांच लाख रुपए आंका जाता है, तो खरीदार को लगभग अस्सी हजार से एक लाख रुपए तक का न्यूनतम डाउन पेमेंट अपनी जेब से देना होता है। बाकी बची हुई रकम का भुगतान बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा ऋण के माध्यम से कर दिया जाता है। यह सुविधा उन लोगों के लिए खासी मददगार साबित होती है जो एकमुश्त बड़ी रकम चुकाने में असमर्थ होते हैं।
सरकारी कर्मियों के लिए विशेष लाभ
इसके अतिरिक्त, सरकारी सेवा से जुड़े लोगों के लिए वित्त कंपनियों द्वारा खास रियायतें भी दी जा रही हैं। सरकारी महकमों में कार्यरत ग्राहकों को ऋण पर लगने वाली ब्याज दरों में खास छूट का फायदा मिलता है। सामान्य तौर पर पुरानी गाड़ियों पर मिलने वाले इन कर्जों की ब्याज दरें सात प्रतिशत से दस प्रतिशत के दायरे में रहती हैं, जो आवेदक की पात्रता के आधार पर तय की जाती हैं। कम कागजी प्रक्रिया, तेज रफ्तार से मिलने वाली स्वीकृति और किफायती ब्याज दरों के चलते आज पुरानी गाड़ियों को वित्त पोषित कराना आम जनता के लिए बेहद सुगम माध्यम बन चुका है।



















