कमोडिटी बाजारों में आज सोने और चांदी की कीमतों में मिलाजुला लेकिन सतर्क रुझान बना हुआ है। घरेलू मोर्चे पर निवेशकों और ट्रेडर्स का रुख वैश्विक संकेतों और मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों के आधार पर तय हो रहा है, जिससे बुलियन सेक्टर में हलचल बनी हुई है।
एमसीएक्स पर बुलियन की चाल
घरेलू मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 1.55 लाख रुपये के स्तर से ऊपर संभला हुआ है और सतर्कता के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं दूसरी ओर चांदी की चमक में भी सुधार देखा गया है और इसके दाम 2.38 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर चुके हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि घरेलू वायदा बाजार में ये कीमतें वैश्विक रुझानों और करेंसी उतार-चढ़ाव के बीच तय हो रही हैं।
वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं का प्रदर्शन
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,395 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके मुकाबले हाजिर चांदी ने बेहतर प्रदर्शन किया है और यह लगभग 1.5 प्रतिशत के लाभ के साथ 65.5 डॉलर प्रति औंस के आसपास टिकी हुई है। वैश्विक स्तर पर चांदी की यह तेजी सोने के मुकाबले अधिक मजबूत रही है।
क्रूड ऑयल और अन्य ऊर्जा बाजार का हाल
ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करेक्शन देखने को मिला है लेकिन इसके बावजूद दाम ऊंचे बने हुए हैं। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में उतार-चढ़ाव जारी है और यह 82 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जबकि ब्रेंट क्रूड मामूली बढ़त के साथ 89 डॉलर प्रति औंस के करीब ट्रेड कर रहा है। इसके विपरीत नेचुरल गैस की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है और गैसोलीन के दाम भी नरम पड़े हैं।
पिछले हफ्ते जारी आंकड़ों से संकेत मिला था कि अमेरिकी महंगाई नियंत्रण में है, जबकि उपभोक्ता भावना और खुदरा बिक्री में कमजोरी आई है। इन आंकड़ों के आने से पहले जहां सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत थी, वहीं अब बाजार इसे घटकर करीब एक तिहाई मान रहा है। निवेशक अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की हालिया बैठक के मिनट्स और जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड चेयरमैन Kevin Warsh के भाषण का इंतजार कर रहे हैं ताकि आगे की दिशा मिल सके।
इस बीच, पश्चिम एशिया में तनाव तब और बढ़ गया जब Israel ने सप्ताहांत में Lebanon पर नए हवाई हमले किए, जबकि राष्ट्रपति Donald Trump Iran को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए नए आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रहे हैं। इसके बावजूद, पश्चिम एशियाई उत्पादक होर्मुज जलडमरूमध्य से चुपचाप लाखों बैरल कच्चा तेल निकाल रहे हैं, जिससे तेल की कीमतें काबू में हैं और मुद्रास्फीति के जोखिमों को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।



















