पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में अपना नया बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहे युवाओं को बैंक लोन की प्रक्रिया में देरी का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के तहत आवेदन करने के बावजूद कई आवेदक बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस समस्या का मुख्य कारण आवेदन पत्रों में अधूरी जानकारी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट की कमियां पाई गई हैं। उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि आवेदक अपनी फाइल में सभी जरूरी तकनीकी और वित्तीय ब्योरे सही तरीके से दर्ज करेंगे, तो बैंक लोन की मंजूरी में अनावश्यक देरी नहीं होगी।
प्रोजेक्ट रिपोर्ट में व्यावसायिक ब्योरा सही दर्ज करना क्यों जरूरी है
उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार ने बताया कि जिन युवाओं ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना या अन्य सरकारी योजनाओं के अंतर्गत लोन के लिए आवेदन किया है, उन्हें सबसे पहले अपने दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। किसी भी बिजनेस लोन के आवेदन में प्रोजेक्ट रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है, क्योंकि इसी से प्रस्तावित उद्यम की पूरी व्यावसायिक और वित्तीय रूपरेखा स्पष्ट होती है।
उन्होंने आवेदकों को सलाह दी कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करते समय व्यावसायिक जरूरतों का गहन अध्ययन करें। इसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि बिजनेस के लिए किस प्रकार की मशीनरी खरीदी जानी है, कच्चा माल कहां से और कैसे जुटाया जाएगा, तथा उद्यम संचालन के लिए कितने टर्म लोन की जरूरत है। इसके साथ ही दैनिक कामकाज के लिए आवश्यक कैश क्रेडिट या सीसी लोन की राशि का भी बारीकी से ब्योरा देना अनिवार्य है। यदि इन सभी बिंदुओं का सटीक विवरण फाइल में शामिल किया जाएगा, तो लोन स्वीकृत होने में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी।
अधूरी जानकारी से रिजेक्ट हो रहे आवेदन और विभाग की मदद
उद्योग विभाग के अनुसार, कई युवाओं द्वारा जमा किए गए आवेदनों में पूरी और स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती है। फॉर्म में अधूरी जानकारी या आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण ही बैंक ऐसे आवेदनों को खारिज या पेंडिंग कर देते हैं। अमरेश कुमार ने भरोसा दिलाया कि यदि किसी आवेदक ने सभी दस्तावेज और प्रोजेक्ट रिपोर्ट पूरी तरह सही तैयार की है, और इसके बावजूद बैंक बेवजह फाइल को लटकाते हैं, तो जिला उद्योग विभाग आवेदक की पूरी मदद करेगा और बैंक प्रबंधन से बात करके समस्या का समाधान कराएगा।
मेरठ में लोन लक्ष्य और योजना के मुख्य आकर्षण
मेरठ जिले में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश शासन की ओर से कुल 2300 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में इस निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 400 से अधिक आवेदनों का लोन स्वीकृत किया जा चुका है। शेष बचे लक्ष्यों के अनुरूप भी योग्य आवेदकों को चरणबद्ध तरीके से लोन उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके तहत युवाओं को अपना बिजनेस शुरू करने के लिए 500000 रुपये तक का लोन बिना किसी बैंक गारंटी के प्रदान किया जाता है। योजना के अंतर्गत लिए गए लोन का पूरा ब्याज उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाता है, जिससे यह लोन युवाओं के लिए ब्याज-मुक्त साबित होता है। इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को 10% की सरकारी सब्सिडी का लाभ भी दिया जाता है।



















