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देश के 11 हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू, रायपुर भी शामिलछत्तीसगढ़
26 अग॰ 2026, 10:08 am (1 घंटे पहले)· 2

देश के 11 हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू, रायपुर भी शामिल

केंद्र सरकार ने रायपुर सहित 11 हवाई अड्डों के निजीकरण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां सफल बोलीदाता को 50 वर्षों के लिए संचालन की कमान मिलेगी।

केंद्र सरकार ने रायपुर हवाई अड्डे सहित देश के 11 हवाई अड्डों के संचालन को निजी क्षेत्र को सौंपने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस संबंध में निविदाएं आमंत्रित करने और बोली लगाने की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। वर्तमान समय में रायपुर स्थित हवाई अड्डे की देखरेख और संचालन का दायित्व एयरपोर्ट अथॉरिटी निभा रही है। हालांकि, टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उच्चतम बोली लगाने वाली निजी कंपनी को इस हवाई अड्डे का पूरा प्रशासनिक व परिचालन नियंत्रण सौंप दिया जाएगा। इससे पहले जयपुर, मुंबई, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों का प्रबंधन निजी कंपनियों को दिया जा चुका है, जहां यात्रियों को टिकट की कीमतों और पार्किंग शुल्क में वृद्धि का सामना करना पड़ा है।

लीज अवधि और हस्तांतरण की समयसीमा

एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार निविदा, बोली और संपत्ति के हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम दो वर्षों की समयसीमा लगेगी। जिस व्यावसायिक संस्था की बोली सबसे अधिक होगी, उसे 50 वर्षों की अवधि के लिए रायपुर हवाई अड्डे के संचालन का अधिकार प्राप्त होगा। इसका अर्थ यह है कि वर्ष 2028 के पश्चात अगले 50 सालों तक इस हवाई अड्डे का प्रबंधन निजी कंपनी के हाथों में रहेगा। इस व्यावसायिक व्यवस्था के बदले निजी संचालक केंद्र सरकार को एक निश्चित धनराशि का भुगतान करेगा।

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सुरक्षा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल का प्रबंधन

प्रबंधन का हस्तांतरण होने के बावजूद हवाई अड्डे की मुख्य सुरक्षा व्यवस्था और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की जिम्मेदारी पूरी तरह से एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास ही बनी रहेगी। हवाई परिसर की सुरक्षा का जिम्मा पहले की भांति सीआईएसएफ के जवानों के पास रहेगा, जिसमें निजी कंपनी का किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा। निजी संस्थाएं अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाती हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपणन करती हैं। इस वजह से रायपुर से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं की शुरुआत होने और वहां मौजूद यात्री सुविधाओं का आधुनिकीकरण होने की प्रबल संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

प्रमुख संभावित बोलीदाता और हवाई अड्डों के समूह

रायपुर हवाई अड्डे पर मौजूद आधुनिक टर्मिनल भवन, विशाल रनवे, विस्तृत पार्किंग क्षेत्र और यात्रियों की निरंतर बढ़ती संख्या को देखते हुए देश के बड़े कॉर्पोरेट समूहों के इस निविदा प्रक्रिया में शामिल होने की उम्मीद है। इस होड़ में अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स, जीएमआर एयरपोर्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, जीवीके ग्रुप और आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं। सरकार ने निजीकरण की इस प्रक्रिया के अंतर्गत 11 हवाई अड्डों को कुल पांच समूहों में विभाजित किया है

  • समूह 1: वाराणसी, गया और कुशीनगर।
  • समूह 2: तिरुचिरापल्ली और तिरुपति।
  • समूह 3: अमृतसर और कांगड़ा।
  • समूह 4: भुवनेश्वर और हुबली।
  • समूह 5: रायपुर और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर)।

सवाल-जवाब

रायपुर हवाई अड्डे का निजीकरण कब से लागू होगा?
टेंडर और हस्तांतरण की प्रक्रिया में लगभग दो साल का समय लगेगा, जिसके बाद 2028 से अगले 50 सालों के लिए निजी कंपनी इसका संचालन संभालेगी।
क्या निजीकरण के बाद हवाई अड्डे की सुरक्षा भी निजी हाथों में जाएगी?
नहीं, हवाई अड्डे की सुरक्षा पहले की तरह सीआईएसएफ जवानों के पास रहेगी और एयर ट्रैफिक कंट्रोल भी एयरपोर्ट अथॉरिटी के नियंत्रण में ही रहेगा।
निजीकरण से रायपुर के यात्रियों को क्या लाभ हो सकता है?
निजी कंपनियों द्वारा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और वैश्विक ब्रांडिंग के कारण रायपुर से नई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने की संभावना है।
रायपुर के साथ किन अन्य हवाई अड्डों का निजीकरण किया जा रहा है?
रायपुर के साथ वाराणसी, गया, कुशीनगर, तिरुचिरापल्ली, तिरुपति, अमृतसर, कांगड़ा, भुवनेश्वर, हुबली और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) शामिल हैं।
निजीकरण की होड़ में कौन सी बड़ी कंपनियां शामिल हो सकती हैं?
बोली प्रक्रिया में अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स, जीएमआर एयरपोर्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, जीवीके ग्रुप और आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी प्रमुख कंपनियों के शामिल होने की उम्मीद है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·55 मिनट पहले

यह नीतिगत निर्णय बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए यात्रियों पर बढ़ने वाले वित्तीय भार जैसे शुल्क वृद्धि और टिकट महंगे होने की आशंका पर भी कड़ी निगरानी रखनी होगी। 50 साल की लंबी लीज अवधि यह तय करती है कि इसका असर आने वाले दशकों तक क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और विमानन क्षेत्र पर रहेगा, हालांकि सुरक्षा का जिम्मा सीआईएसएफ के पास रहना एक सकारात्मक और स्थिर पहलू है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·55 मिनट पहले

50 साल की लंबी लीज और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की इस दौड़ में यह सुनिश्चित करना बेहद अहम होगा कि सार्वजनिक और निजी हितों के बीच संतुलन बना रहे। पूर्व के अनुभवों से यह स्पष्ट है कि जब भी हवाई अड्डों का नियंत्रण निजी हाथों में जाता है, तो पार्किंग और अन्य उपभोक्ता शुल्कों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होती है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ता है। यद्यपि सुरक्षा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सीआईएसएफ के पास रहने से संप्रभुता और सुरक्षा के मोर्चे पर चिंताएं कम होती हैं, फिर भी नियामक संस्थाओं को यह निगरानी रखनी होगी कि बोली लगाने वाली कंपनियां नियमों का पूर्ण पालन करें और बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर यात्रियों का वित्तीय शोषण न हो सके।

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