छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक सदर बाजार व्यापारिक इलाके में वक्फ संपत्ति पर वर्षों से जारी अवैध कब्जे को छुड़ाने के लिए कानूनी प्रक्रिया सख्त कर दी गई है। राज्य वक्फ अधिकरण द्वारा जारी किए गए आधिकारिक फैसले का अनुपालन कराते हुए वक्फ बोर्ड की टीम ने विवादित परिसर पर बेदखली का नोटिस चिपका दिया है। इस सरकारी आदेश के माध्यम से कब्जाधारी को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए 45 दिनों के भीतर पूरी जगह खाली करके उसका कब्जा संबंधित संस्था को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
अतिक्रमण की जद में आईं संपत्तियों का ब्योरा
बेदखली की कार्रवाई के दायरे में आई यह कीमती जायदाद रायपुर के अंजुमन-ए-सैफी दाऊदी बोहरा जमात के नाम पर दर्ज एक पंजीकृत वक्फ जायदाद है। लंबे समय से इस अचल संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर विवाद चल रहा था, जिसकी औपचारिक सुनवाई छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ अधिकरण की न्यायिक पीठ में पूरी हुई। साक्ष्यों के आधार पर अधिकरण ने अवैध कब्जे को खारिज करते हुए जमीन और दुकान को तुरंत खाली कराने के आदेश पारित किए थे।
अधिकरण के फैसले के अनुसार, अवैध कब्जे की चपेट में आए कुल ढांचे में दो अलग-अलग हिस्सों की जमीन और निर्माण शामिल हैं। इनमें मकान नंबर 923 और मकान नंबर 924 के तहत आने वाली लगभग 900 वर्गफुट जमीन मुख्य रूप से शामिल है। इसके अलावा, इसी वक्फ भूखंड से संलग्न मकान नंबर 523 और मकान नंबर 524 में स्थित व्यावसायिक दुकान और उससे जुड़ा गोदाम भी इसी पंजीकृत संपत्ति का अभिन्न अंग हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि नियत अवधि खत्म होते ही संपत्ति का भौतिक प्रभार संबंधित वक्फ प्रबंधन को स्थानांतरित करना अनिवार्य होगा।
प्रदेश भर में अवैध कब्जों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत
राजधानी के मुख्य बाजार में हुई इस त्वरित कानूनी पहल को पूरे प्रदेश के संदर्भ में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों और ग्रामीण अंचलों में स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की वक्फ संपत्तियों पर गैर-कानूनी तरीके से काबिज लोगों की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। कई इलाकों में व्यावसायिक दुकानों, आवासीय मकानों और कृषि भूखंडों पर लोगों ने सालों से कब्जा जमा रखा है। सदर बाजार में की गई यह सख्त कार्रवाई बाकी अतिक्रमणकारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।
वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक अधिकरण से प्राप्त होने वाले सभी आदेशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन कराया जाएगा। गैर-कानूनी ढंग से कब्जा जमाए बैठे लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 45 दिनों की निर्धारित अल्टीमेटम अवधि समाप्त होने के बाद कब्जाधारी खुद संपत्ति छोड़ता है या फिर आगे प्रशासनिक कदम उठाने पड़ेंगे।





















