चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वॉशिंगटन से अपनी तीन दिवसीय महत्वपूर्ण अमेरिकी यात्रा पूरी करके वापस लौट चुके हैं। इस बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापारिक संबंध, ईरान, यूक्रेन, ताइवान और AI जैसे कई गंभीर वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि दोनों देशों ने अपने व्यापारिक तनाव को कम करने और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन कई महत्वपूर्ण मामलों पर दोनों महाशक्तियों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से बरकरार दिखाई दिए। इस तीन दिनों की यात्रा के दौरान व्यापार युद्ध को टालने पर तो सहमति बनी, लेकिन किसी भी बड़े आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जा सके।
शी जिनपिंग की रवानगी के बाद ट्रंप का सोशल मीडिया संदेश और सख्त हिदायत
चीनी राष्ट्रपति के रवाना होते ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दोनों नेताओं की एक खास तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि उनके ठीक पीछे मेलानिया ट्रंप और पेंग लियुआन भी मौजूद हैं। ट्रंप ने इस तस्वीर के साथ 'अमेरिका इज बैक' लिखकर एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर इस सकारात्मक संदेश के समानांतर, बैठक के भीतर ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से चीनी नेतृत्व को एक बेहद सख्त चेतावनी भी दी गई, जिससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे का कूटनीतिक तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है।
ईरान को लेकर कड़ा रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक संकट
इस शिखर वार्ता के दौरान पश्चिमी एशिया, विशेषकर ईरान का मुद्दा काफी हावी रहा। चीन में अमेरिका के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। डेविड पर्ड्यू के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग को बहुत स्पष्ट शब्दों में आगाह किया कि ईरान को किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद देना अमेरिका को कतई स्वीकार नहीं होगा। चीनी पक्ष ने इस चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी प्रशासन को आश्वस्त किया कि उनकी ओर से ईरान को ऐसी कोई सहायता प्रदान नहीं की जाएगी। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन के रास्ते ईरान को हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति की जा रही है, और ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए चीनी बाजार के जरिए तेल बेचने की कोशिशें हो रही हैं।
शिखर बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच ईरान युद्ध के वर्तमान हालातों पर भी गहन चर्चा हुई, हालांकि इस बातचीत के सभी बारीक विवरणों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। ईरान से जुड़ा यह संकट इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिमी एशिया से भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला तेल का व्यापार बाधित होता है, तो इसका सीधा और बेहद हानिकारक असर चीनी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसी रणनीतिक चिंता के बीच, शी जिनपिंग ने अमेरिका और ईरान दोनों से बातचीत की मेज पर वापस लौटने की अपील की है ताकि जून में तैयार किए गए समझौते के ढांचे के आधार पर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
व्यापारिक मोर्चे पर राहत की सांस, लेकिन किसी बड़े समझौते की कमी
इस तीन दिवसीय बैठक का सबसे ठोस और सकारात्मक परिणाम आर्थिक मोर्चे पर देखने को मिला। दोनों देशों ने लंबे समय से चले आ रहे व्यापार युद्ध को टालने और पूर्व में घोषित युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। हालांकि, इस मुलाकात के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच किसी नए या बड़े व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो सके। इस व्यापार युद्धविराम के बढ़ने से वैश्विक बाजारों को अस्थायी रूप से बड़ी राहत मिली है, जो लगातार नए शुल्कों के डर से अस्थिर बने हुए थे। वार्ता समाप्त होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अच्छी प्रगति हुई है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इस प्रगति से अमेरिकी किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके निर्यात के रास्ते आसान होंगे।



















