वॉशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने जा रही अहम शिखर वार्ता से ठीक पहले बीजिंग ने ताइवान को लेकर अपने तेवर बेहद तल्ख कर लिए हैं। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए के सेवानिवृत्त मेजर जनरल लुओ युआन ने स्पष्ट लहजे में आगाह किया है कि यदि ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते ने अपनी कथित उकसावे भरी बयानबाजी और कदमों को नहीं रोका, तो ताइवान जलडमरूमध्य में हालात बेहद अनियंत्रित और हिंसक मोड़ ले सकते हैं। चीनी सैन्य विशेषज्ञ ने दोहराया है कि ताइवान का मुख्य भूमि चीन में विलय बीजिंग का एक ऐसा राष्ट्रीय संकल्प है जिसे किसी भी सूरत में बदला नहीं जा सकता।
शांगशान फोरम के मंच से सीधा संदेश
चीनी राजधानी बीजिंग में आयोजित शांगशान फोरम के दौरान यह तीखा बयान सामने आया। यह सुरक्षा सम्मेलन एशिया प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े रक्षा आयोजनों में गिना जाता है, जहां करीब 100 देशों के सैन्य अधिकारी, रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस मंच के इतर बोलते हुए लुओ युआन ने ताइवान के वर्तमान रुख को दोनों महाशक्तियों के बीच टकराव की सबसे संवेदनशील वजह बताया। अगले सप्ताह वॉशिंगटन में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की आमने-सामने बैठक होने वाली है, और ऐसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव पर इस प्रकार की सैन्य चेतावनी आना इस बात का संकेत है कि बीजिंग ताइवान को लेकर किसी भी किस्म का समझौता करने के मूड में नहीं है। बीजिंग का आधिकारिक रुख यही रहा है कि ताइवान उसका अविभाज्य भूभाग है और आवश्यकता पड़ने पर वह सैन्य बल का प्रयोग करके भी इसका नियंत्रण लेने से पीछे नहीं हटेगा।
विलियम लाई के रुख और लाल रेखाओं पर तकरार
सेवानिवृत्त मेजर जनरल लुओ युआन ने ताइवान के साथ अंतिम विलय की रूपरेखा और समयसीमा पर विस्तार से चर्चा की। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया चीन की समग्र राष्ट्रीय क्षमता, उसकी सामरिक रक्षा आवश्यकताओं, वैश्विक सुरक्षा तंत्र और ताइपे की तरफ से आने वाले उकसावों पर निर्भर करती है। उन्होंने विशेष रूप से ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते के उस बयान की तीखी आलोचना की जिसमें लाई ने चीन को एक विदेशी और शत्रुतापूर्ण शक्ति करार दिया था। बीजिंग इस शब्दावली को अपनी तय की गई लाल रेखाओं का खुला उल्लंघन मानता है। लुओ ने साफ किया कि चीन की सर्वोच्च प्राथमिकता शांतिपूर्ण तरीके से विलय हासिल करने की है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि शांति, सैन्य बल या कोई अन्य गैर-शांतिपूर्ण जरिया केवल रास्ते हैं, जबकि असली और अंतिम उद्देश्य ताइवान का एकीकरण ही है।
14 अरब डॉलर के अमेरिकी हथियार सौदे पर तकरार
चीन की नाराजगी सिर्फ ताइवान के आंतरिक राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने अमेरिका की नीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया है। लुओ युआन ने वाशिंगटन द्वारा ताइपे को दी जा रही सैन्य मदद और हथियार बिक्री को आग से खेलने के समान बताया। वर्तमान में ताइवान के लिए लगभग 14 अरब डॉलर मूल्य का एक बड़ा रक्षा पैकेज लंबित है, जो कथित तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है। शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा से ठीक पहले इस भारी भरकम रक्षा सौदे की चर्चा ने दोनों देशों के कूटनीतिक तनाव को शिखर पर पहुंचा दिया है। बीजिंग ने पूर्व में भी कई बार दोहराया है कि ताइवान का मसला अमेरिका-चीन द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐसी पहली लाल रेखा है जिसे पार करने की किसी को अनुमति नहीं दी जा सकती।



















