दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित आमने-सामने की बातचीत का खाका तैयार हो गया है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सप्ताह अमेरिका की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर पहुंच रहे हैं. इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. चीन की राजधानी बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर इस दौरे की पुष्टि करते हुए बताया है कि शी जिनपिंग 23 सितंबर से 25 सितंबर तक अमेरिका में मौजूद रहेंगे. दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और रणनीतिक वर्चस्व को लेकर जारी तल्खी के बीच इस बैठक को वैश्विक भू-राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
वैश्विक शांति और द्विपक्षीय रिश्तों पर विस्तृत चर्चा का एजेंडा
इस उच्चस्तरीय वार्ता के संदर्भ में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने स्पष्ट किया कि दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच आपसी संबंधों के अलावा अंतरराष्ट्रीय शांति और विकास से जुड़े तमाम प्रमुख वैश्विक मामलों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा. चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता कायम करने, आपसी संवाद तथा सहयोग को आगे बढ़ाने और मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने के मकसद से अमेरिका के साथ मिलकर काम करने को तैयार है. बीजिंग का मानना है कि दोनों शक्तियों के बीच संवाद के माध्यम से आपसी टकराव को सीमित किया जा सकता है.
ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप खुद करेंगे स्वागत
अमेरिकी प्रशासन ने भी इस शिखर सम्मेलन को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं. इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य व्यापार, उन्नत तकनीक और व्यापक रणनीतिक मतभेदों की वजह से उपजे तनाव को कम करना है. एक अमेरिकी अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जब चीनी राष्ट्रपति बुधवार को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर उतरेंगे, तब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत रूप से वहां उपस्थित रहकर उनका स्वागत करेंगे. दोनों नेताओं के बीच मुख्य औपचारिक बैठक गुरुवार, यानी 25 सितंबर को निर्धारित की गई है. इससे पहले मई के महीने में जब डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर गए थे, तब बीजिंग पहुंचने पर चीन के उपराष्ट्रपति ने उनकी अगवानी की थी. डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एयर फोर्स वन में मौजूद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि वह शी के साथ लगभग हर मुद्दे पर खुलकर बात करेंगे.
व्यापारिक विवाद, टैरिफ और ताइवान संकट पर रहेगा मुख्य ध्यान
इस शिखर वार्ता की मेज पर आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे की चुनौतियां सबसे ऊपर रहने वाली हैं. दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बीते करीब एक साल से टैरिफ को लेकर एक अस्थायी सहमति या समझ बनी हुई है, लेकिन अब तक किसी औपचारिक और स्थायी व्यापार समझौते पर दस्तखत नहीं हो सके हैं. व्यापारिक मतभेदों और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के अलावा ताइवान का संवेदनशील मामला भी बातचीत का केंद्र रहेगा. ताइवान के इर्द-गिर्द रणनीतिक और सैन्य तनातनी लंबे समय से वाशिंगटन और बीजिंग के रिश्तों में सबसे नाजुक और टकराव वाला बिंदु बनी हुई है, जिस पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे.



















