वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी वापसी को बेहद यादगार बना दिया है। भारत के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे वनडे मुकाबले में उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाते हुए सिर्फ 65 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया। क्रीज पर टिकते ही कैंपबेल ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ दी और अपनी 68 गेंदों की कुल पारी में 101 रन बनाए। इस विस्फोटक शतकीय पारी के दौरान उनके बल्ले से 9 चौके और 5 गगनचुंबी छक्के निकले। इसी के साथ कैंपबेल एकदिवसीय क्रिकेट में वेस्टइंडीज की तरफ से पांचवां सबसे तेज शतक ठोकने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं।
सीरीज में लगातार जारी है जॉन कैंपबेल का शानदार फॉर्म
कैंपबेल इस पूरी एकदिवसीय श्रृंखला के दौरान बेहतरीन लय में नजर आ रहे हैं। इससे पहले ग्रीनफील्ड में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में भी उन्होंने 62 रनों की ठोस पारी खेली थी। उस मुकाबले में उन्होंने साथी बल्लेबाज जस्टिन ग्रीव्स के साथ मिलकर शतकीय साझेदारी निभाई थी। हालांकि पहले मैच में वेस्टइंडीज की टीम को एकतरफा और करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था, मगर कैंपबेल ने अपनी व्यक्तिगत लय को नहीं खोया और दूसरे वनडे में भी अपनी जबरदस्त बल्लेबाजी जारी रखी।
डोपिंग प्रतिबंध के विवादित दौर से शतकीय पारी तक का सफर
जॉन कैंपबेल का यह हालिया प्रदर्शन इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि वह एक लंबे विवाद और प्रतिबंध के बाद मैदान पर लौटे हैं। साल 2022 में जमैका एंटी-डोपिंग कमीशन ने कैंपबेल पर चार साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया था। असल में जब जांच अधिकारी उनके घर ब्लड सैंपल लेने पहुंचे, तब कैंपबेल ने रक्त का नमूना देने से साफ इनकार कर दिया था और डोपिंग परीक्षण प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया था।
डोपिंग रोधी नियमावली के अंतर्गत परीक्षण के लिए जैविक नमूना देने से इनकार करना एक अत्यंत गंभीर अपराध माना जाता है। इसी आधार पर अक्टूबर 2022 में JADCO के स्वतंत्र पैनल ने सुनवाई के बाद कैंपबेल को दोषी ठहराया और 4 साल की पाबंदी मुकर्रर की। हालांकि बाद में इस निलंबन की मियाद को कम करके 22 महीने कर दिया गया, जिसके पूरा होने के बाद अब उन्होंने मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से जोरदार वापसी दर्ज कराई है।

















