इंग्लैंड के खिलाफ संपन्न हुई हालिया T20 सीरीज के आखिरी मुकाबले में भारतीय टीम प्रबंधन ने अपनी प्लेइंग-11 में दो अत्यंत महत्वपूर्ण बदलाव किए। इस आखिरी मैच में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को अंतिम ग्यारह से बाहर का रास्ता दिखाया गया, जबकि उनके स्थान पर अनुभवी संजू सैमसन और सूर्यवंश शेडगे को अंतिम एकादश में शामिल होने का मौका मिला। हालांकि, इन बड़े रणनीतिक बदलावों के बावजूद टीम इंडिया इस मुकाबले को अपने पक्ष में नहीं कर पाई और उसे 56 रनों की बड़ी हार का सामना करना पड़ा। मैच की समाप्ति के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने वैभव सूर्यवंशी को टीम से बाहर रखने के अपने फैसले पर खुलकर बात की और इसके पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा किया।
टीम कॉम्बिनेशन को लेकर श्रेयस अय्यर का स्पष्टीकरण
मैच के बाद आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान श्रेयस अय्यर ने बताया कि आखिरी मुकाबले के लिए चुनी गई टीम परिस्थितियों के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ संयोजन बनाने के इरादे से चुनी गई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि टीम प्रबंधन की योजना थी कि बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज अभिषेक के साथ पारी की शुरुआत करने के लिए एक दाएं हाथ के बल्लेबाज को मैदान पर उतारा जाए। इसी विशेष रणनीति के चलते वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग-11 से बाहर बैठना पड़ा। अय्यर ने रेखांकित किया कि टीम के बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार थी, जिसके कारण वह स्वयं मध्य क्रम में एकमात्र दाएं हाथ के बल्लेबाज बचे थे। कप्तान ने वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा की जमकर सराहना करते हुए उन्हें एक उत्कृष्ट बल्लेबाज बताया, जिन्होंने अतीत में भारत को कई श्रृंखलाएं जिताने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि संजू सैमसन को मौका देना टीम के नए संयोजन को आजमाने का हिस्सा था।
वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन और संजू सैमसन की वापसी
इस द्विपक्षीय सीरीज के दौरान संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के बीच टीम में स्थान को लेकर दिलचस्प होड़ देखने को मिली। संजू सैमसन को इस पूरी T20 श्रृंखला में केवल दो मैचों में खेलने का अवसर मिला। पहले मैच में खराब बल्लेबाजी प्रदर्शन और गिरते फॉर्म के बाद उन्हें प्लेइंग-11 से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद के मध्यवर्ती तीन मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में खेलने के भरपूर मौके मिले, लेकिन वह भी इस अवसर का पूरा लाभ उठाने में असमर्थ रहे। इन तीन मैचों में वैभव सूर्यवंशी ने बेहद निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए केवल 14 के मामूली औसत से मात्र 42 रन बनाए। इस अवधि में उनका व्यक्तिगत उच्चतम स्कोर केवल 15 रनों का रहा। विशेष रूप से, इंग्लैंड के घातक तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने उन्हें बेहद परेशान किया और तीन पारियों में से दो बार वैभव सूर्यवंशी को अपना शिकार बनाया। आखिरी मैच में वापस लौटे संजू सैमसन ने भी 14 गेंदों में 27 रनों की एक तेज पारी खेली।
जोस बटलर का तूफानी शतक और मैच का लेखा-जोखा
इस अंतिम T20 मैच की बात करें तो टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने भारतीय गेंदबाजों पर चौतरफा हमला बोला। जोस बटलर की आतिशी शतकीय पारी के दम पर इंग्लैंड ने निर्धारित ओवरों में टीम इंडिया के सामने जीत के लिए 258 रनों का लक्ष्य खड़ा किया। जोस बटलर ने मैदान के हर कोने में रन बरसाते हुए 131 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। इस विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाने के कारण 201 रनों के स्कोर तक ही पहुंच सकी। भारत की तरफ से विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने 56 रन और मध्य क्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा ने 53 रन बनाकर संघर्ष करने का प्रयास किया और अपने-अपने अर्धशतक पूरे किए, लेकिन वे टीम को जीत की दहलीज तक नहीं पहुंचा सके।
भारतीय कप्तान के नाम जुड़ा अनचाहा रिकॉर्ड
इस अंतिम मैच में मिली शिकस्त के कारण भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम एक बेहद शर्मनाक और अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया। भारतीय क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास में यह पहली अवसर है जब टीम इंडिया को किसी द्विपक्षीय T20 सीरीज में कुल चार मैचों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। दूसरी ओर, इंग्लिश बल्लेबाज हैरी ब्रूक ने इस पूरी श्रृंखला के दौरान असाधारण प्रदर्शन किया। उन्होंने इस T20 सीरीज में कुल मिलाकर 200 से अधिक रन बटोरे और भारत के खिलाफ किसी द्विपक्षीय T20I सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने का वेस्टइंडीज के धाकड़ बल्लेबाज निकोलस पूरन का पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया।











