इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की T20 सीरीज में मिली करारी हार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम लगातार आलोचनाओं के घेरे में है। पूरे दौरे पर भारतीय टीम विपक्षी टीम के सामने बेहद कमजोर नजर आई। इस निराशाजनक प्रदर्शन पर खेल जगत के कई दिग्गज अपनी राय रख रहे हैं, लेकिन इसी बीच भारतीय टीम के खिलाड़ी चेतेश्वर पुजारा ने उन कारणों का खुलासा किया है जिन्होंने टीम की कमजोरी को उजागर किया है। पुजारा के अनुसार, इस दौरे पर टीम की नाकामी के पीछे सिर्फ खराब खेल नहीं, बल्कि कुछ बुनियादी खामियां जिम्मेदार थीं।
मध्यक्रम की विफलता और ऑलराउंडर का न होना
पुजारा ने जियोहॉटस्टार पर बातचीत के दौरान दोनों टीमों के मध्यक्रम के प्रदर्शन की तुलना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंग्लैंड के पास पांचवें, छठे, सातवें और आठवें नंबर पर ऐसे मजबूत खिलाड़ी मौजूद थे जिन्होंने लगातार टीम के स्कोर में अपना योगदान दिया। इसके विपरीत, भारत ने पांचवें नंबर पर तिलक वर्मा और छठे नंबर पर शिवम दुबे को मौका दिया था, लेकिन ये खिलाड़ी इंग्लैंड के मध्यक्रम की तरह प्रभावी पारियां खेलने में पूरी तरह असमर्थ रहे।
इसके अलावा, टीम में एक विशेषज्ञ ऑलराउंडर की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी। इंग्लैंड दौरे के शुरू होने से पहले ही स्टार खिलाड़ी हार्दिक पंड्या चोट के कारण बाहर हो गए थे, जो इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ खेलते हुए नजर आए थे। उनके विकल्प के तौर पर चुने गए नितीश कुमार रेड्डी भी टीम के रवाना होने से ठीक पहले चोटिल हो गए। इस वजह से टीम इंडिया को बिना किसी प्रमुख ऑलराउंडर के मैदान पर उतरना पड़ा, जिसने टीम के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया।
फील्डिंग के बेहद खराब स्तर पर पुजारा की नाराजगी
पुजारा ने टीम इंडिया की खराब फील्डिंग को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि एक युवा और नई टीम होने के नाते बल्लेबाजी और गेंदबाजी में उतार-चढ़ाव को एक बार के लिए स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन मैदान पर लचर फील्डिंग के लिए कोई बहाना नहीं होना चाहिए। T20 जैसे छोटे और बेहद तेज प्रारूप में फील्डिंग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, जहां एक-एक रन बचाना और मुश्किल कैच पकड़ना मैच का रुख बदल देता है।
पूरी सीरीज के दौरान भारतीय खिलाड़ियों का मैदान पर प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। इस खराब फील्डिंग और रणनीतिक कमियों के कारण भारत को पांच मैचों की सीरीज में 4-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस दौरे की शुरुआत में टीम को आयरलैंड के खिलाफ खेले गए दोनों मैचों में भी पराजय झेलनी पड़ी थी, जिससे टीम का आत्मविश्वास पूरी तरह डगमगा गया।











