मॉडर्न-डे क्रिकेट की दुनिया में, विशेष तौर पर टी20 फॉर्मेट के आने के बाद से बल्लेबाज हर मैच में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। ये आंकड़े सबसे कम गेंदों पर अर्धशतक या शतक जड़ने से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब पारंपरिक रेड-बॉल क्रिकेट में शतक बनना भी बहुत बड़ी बात मानी जाती थी और मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था। ऐसे ही चुनिंदा खिलाड़ियों में भारतीय क्रिकेटर करुण नायर का नाम भी शामिल है। करुण नायर की अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि वह विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बाद टेस्ट फॉर्मेट में ट्रिपल सेंचुरी लगाने वाले इतिहास के केवल दूसरे भारतीय बल्लेबाज बने थे।
शाप बन गया जीवन का सबसे बड़ा मुकाम
हालांकि, करुण नायर के लिए उनका यह रिकॉर्डेड ट्रिपल सेंचुरी स्कोर एक तरह से अभिशाप साबित हो गया। यह अभिशाप ऐसा घातक सिद्ध हुआ कि वह भारतीय राष्ट्रीय टीम में अपनी वापसी के लिए लंबे समय तक तरसते रह गए। जब साल 2025 में लगभग आठ साल के लंबे अंतराल के बाद इंग्लैंड दौरे के लिए उनकी टीम इंडिया में वापसी हुई भी, तो वह उस महत्वपूर्ण अवसर को पूरी तरह से गंवा बैठे। यही मुख्य वजह है कि इस मिले हुए बड़े मौके को सही ढंग से न भुना पाने की स्थिति में अब उनका इंटरनेशनल क्रिकेट करियर लगभग समाप्त माना जा रहा है।
तिहरे शतक के बाद मिले सिर्फ सात मुकाबले
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में ऐसा दुर्लभ ही देखने को मिलता है कि कोई खिलाड़ी अपने देश के लिए ट्रिपल सेंचुरी जड़े और उसके बाद उसे टीम में आगे खेलने के पर्याप्त मौके न मिलें। इस पूरे घटनाक्रम में कुछ हद तक करुण नायर की खराब किस्मत भी जिम्मेदार हो सकती है या शायद उनके खेल में निरंतरता का अभाव रहा हो। करुण ने भले ही टीम इंडिया के लिए टेस्ट मैच में तिहरे शतक जैसी ऐतिहासिक पारी खेली हो, लेकिन उसके बाद जब भी उन्हें मैदान पर खेलने का मौका मिला, वह हर बार उस अवसर को भुनाने में नाकाम साबित हुए।
निरंतरता और प्रदर्शन का कड़ा नियम
हकीकत का एक पहलू यह भी है कि सिर्फ एक बार तिहरा शतक जड़ देने मात्र से कोई भी खिलाड़ी भारतीय टीम में हमेशा के लिए अपनी जगह सुरक्षित नहीं कर सकता है। किसी भी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम में लंबे समय तक अपनी दावेदारी बनाए रखने के लिए हर उस मौके पर रन बनाने होते हैं जब उसे मैदान पर उतारा जाता है। यदि कोई खिलाड़ी ऐसा करने में असफल रहता है, तो चयनकर्ताओं की ओर से सख्त और उचित कदम उठाए जाते हैं, जो ठीक वैसा ही करुण नायर के मामले में भी देखने को मिला।



















