भारतीय टी20 टीम से संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर किए जाने का मामला अब गर्माता जा रहा है। पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सिलेक्टर्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इंग्लैंड के खिलाफ जारी सीरीज के पहले टी20 मैच के तुरंत बाद संजू को टीम से ड्रॉप कर दिया गया और उनकी जगह युवा वैभव सूर्यवंशी को शामिल किया गया। पार्थिव का मानना है कि भले ही वैभव को मौका देना भावनाओं के स्तर पर एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन किसी अनुभवी खिलाड़ी को हटाकर ऐसा करना पूरी तरह गलत है।
संजू के करियर का पुराना संघर्ष और मौजूदा स्थिति
पार्थिव पटेल ने स्पष्ट किया कि हालांकि अतीत में संजू सैमसन के साथ निरंतरता की कमी एक बड़ी समस्या रही है, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में उन्हें बाहर करने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता। जियोस्टार से बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 11 से 12 वर्षों में संजू के करियर के साथ निरंतरता के अभाव का ठप्पा लगातार लगा रहा है, जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित करता है।
भावनात्मक बनाम तार्किक निर्णय
पार्थिव के अनुसार, किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर करने के पीछे दो ही बड़े आधार हो सकते हैं: या तो वह खिलाड़ी तेजी से रन नहीं बना पा रहा हो या फिर उसका प्रदर्शन लगातार खराब रहा हो। उन्होंने तर्क दिया कि वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल करने का फैसला पूरी तरह भावनात्मक था, जो क्रिकेट की तार्किकता के पैमाने पर खरा नहीं उतरता। उनका मानना है कि चयन के फैसलों में भावनाएं और तर्क का मिश्रण नहीं होना चाहिए, और इस मामले में तर्क को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
सीरीज का दबाव और खिलाड़ियों का प्रदर्शन
गौरतलब है कि संजू सैमसन इस साल टी20 विश्व कप में टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए थे, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ हालिया तीन मैचों में वह केवल 6 रन ही बना सके। इस असफलता के बाद उनकी जगह 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को लाया गया है। वैभव ने आईपीएल में शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया था, लेकिन अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह उस स्तर का प्रभाव नहीं दिखा सके हैं। भारतीय टीम फिलहाल इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में 0-3 से पिछड़ रही है। यह इतिहास में पहली बार है जब इंग्लैंड ने भारत को टी20 सीरीज में शिकस्त दी है।











