अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर कभी भारत के प्रमुख मैच विनर रहे युजवेंद्र चहल का सफर इन दिनों काफी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। साल 2019 के एकदिवसीय विश्व कप के दौरान वह देश के मुख्य स्पिनर हुआ करते थे, लेकिन आगामी 2023 के विश्व कप संस्करण में उन्हें अंतिम एकादश तो दूर, मुख्य दल में भी शामिल नहीं किया गया था। इस बड़े बदलाव के बाद से लेग स्पिनर के प्रदर्शन और करियर ग्राफ में ऐसा ठहराव आया कि वह अब तक इससे पूरी तरह बाहर नहीं आ सके हैं। हालांकि वह अपनी आक्रामक गेंदबाजी के दम पर 2024 के टी-20 विश्व कप के लिए स्क्वाड में जगह बनाने में कामयाब जरूर रहे, लेकिन पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्हें मैदान पर उतरकर खेलने का एक भी मौका नसीब नहीं हुआ। हाल ही में 36 वर्षीय युजवेंद्र चहल ने एक लोकप्रिय पॉडकास्ट में शिरकत की और अपने खेल जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलुओं पर बात की।
रोहित शर्मा से चर्चा और विश्व कप से पत्ता कटने की वजह
भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज और जाने-माने खेल कमेंटेटर आकाश चोपड़ा के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचे युजवेंद्र चहल ने दिल खोलकर तमाम बातें साझा कीं। बातचीत के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि तत्कालीन कप्तान रोहित शर्मा ने उन्हें किस वजह से मेगा इवेंट से बाहर रखा था, इसकी पूरी पृष्ठभूमि समझाई थी। इसके साथ ही उन्होंने अपने आगामी कमबैक प्लान और करियर में आने वाली तमाम बाधाओं पर भी खुलकर चर्चा की। युजवेंद्र चहल के अनुसार, जब वह साल 2023 के दौरान काउंटी मुकाबले खेलने गए हुए थे, तब कप्तान रोहित शर्मा ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से समझाया था कि टीम प्रबंधन आगामी विश्व कप के मद्देनजर बिल्कुल नई रणनीति पर काम कर रहा है। प्रबंधन की योजना बल्लेबाजी क्रम को आठवें नंबर तक मजबूत करने की थी, ताकि निचले क्रम में भी रन बनाए जा सकें। युजवेंद्र चहल के मुताबिक, रोहित भाई ने उनसे साफ शब्दों में कह दिया था कि टीम एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को भी अपने साथ जोड़ना चाहती है, इसलिए उनके लिए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई थी। इस बातचीत के बाद लेग स्पिनर ने चयन को लेकर सोचना ही बंद कर दिया।
टेस्ट क्रिकेट न खेल पाने का मलाल और संन्यास का फैसला
इस साल के अगस्त महीने में नॉर्थम्पटनशायर के साथ काउंटी क्रिकेट सर्किट में शानदार खेल दिखाने के बाद युजवेंद्र चहल ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। अपने लंबे प्रथम श्रेणी करियर के दौरान उन्होंने कुल 49 मुकाबलों में शिरकत करते हुए 148 विकेट अपने नाम किए, लेकिन देश के लिए टेस्ट कैप हासिल करने का उनका सपना अधूरा ही रह गया। युजवेंद्र चहल ने इस बात का खुलकर जिक्र किया कि भारतीय टीम के लिए कभी सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर न उतर पाने का मलाल उनके दिल में हमेशा जिंदा रहेगा।


















