भारतीय टीम के अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने 2 अक्टूबर को पारंपरिक रेड बॉल क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। लंबे समय से टेस्ट टीम की कैप हासिल करने की तमन्ना रखने वाले इस गेंदबाज ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे क्रिकेट को पूरी तरह नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि सीमित ओवरों के खेल यानी वनडे और टी20 फॉर्मेट में अपनी जगह दोबारा बनाने के लिए पूरा जोर लगाएंगे।
इंस्टाग्राम पर साझा किया भावुक संदेश
इस फैसले की घोषणा गेंदबाज ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए की। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वे महज 10 साल के थे, तब उन्होंने पहली बार लाल गेंद हाथ में थामी थी। उस छोटी उम्र में उन्हें इस बात का कतई अहसास नहीं था कि यह खेल उनकी जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन जाएगा। रेड बॉल क्रिकेट ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में टिके रहने, धैर्य बनाए रखने और मैदान पर घंटों पसीना बहाकर एक-एक रन और विकेट के लिए संघर्ष करने का हुनर सिखाया।
लॉर्ड्स में खेला करियर का अंतिम फर्स्ट क्लास मैच
युजवेंद्र चहल पिछले कुछ समय से इंग्लैंड के घरेलू काउंटी सर्किट में सक्रिय थे। उन्होंने नॉर्थम्पटनशायर का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतिष्ठित लॉर्ड्स मैदान पर अपना अंतिम रेड बॉल मुकाबला खेला। अपने विदाई संदेश में उन्होंने स्वीकार किया कि भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना उनका बहुत पुराना सपना था। हालांकि वे राष्ट्रीय टीम के लिए टेस्ट डेब्यू नहीं कर सके, लेकिन इस लंबे प्रारूप में मिले सभी अनुभवों और मौकों के प्रति उन्होंने गहरा संतोष और आभार जताया।
सीमित ओवरों में वापसी की उम्मीदें बरकरार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले इस गेंदबाज का मानना है कि उनमें अभी काफी क्रिकेट बाकी है। राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे चहल ने सफेद गेंद के दोनों प्रारूपों में एक और मौका हासिल करने के लिए पूरा दम लगाने का संकल्प दोहराया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने लंबे रेड बॉल सफर में निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन देने के लिए हरियाणा क्रिकेट संघ, रणबीर सिंह महिंद्रा और अनिरुद्ध सिंह चौधरी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।



















