महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के अंतर्गत आने वाली दुर्गापुर पुलिस ने देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के नाम पर जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस की इस कार्रवाई में अलग-अलग राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों की फर्जी डिग्रियां, सेमेस्टर मार्कशीट, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट भारी मात्रा में बरामद किए गए हैं। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह के तार सरकारी नौकरियों में भर्ती, महाविद्यालयों में दाखिले और नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन दिलाने वाले अवैध तंत्र से जुड़े हुए थे। पुलिस की टीम ने फर्जीवाड़े में शामिल एक आरोपी को दबोच लिया है, जबकि मामले का मुख्य साजिशकर्ता पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहा।
पड़ोसी की कार में रखी थैली से खुला फर्जीवाड़े का राज
इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब गिरोह के मुख्य आरोपी परिमल बाबुराव गौरकर ने अपने पड़ोसी वैभव गणपतराव माशीरकर को एक कार में रखी कपड़े की थैली संभालने के लिए दी। परिमल गौरकर ने पड़ोसी से कहा था कि वह कुछ समय के लिए इस थैली को अपने पास सुरक्षित रखे। जब कुछ समय बाद गौरकर वापस लौटा और थैली में रखे कागजातों को मांगने लगा, तो माशीरकर को उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर शक हुआ। माशीरकर ने जब कागजातों की प्रकृति के बारे में गौरकर से सीधा सवाल किया, तो उसने कथित तौर पर इस काले कारोबार की सच्चाई उजागर कर दी।
गौरकर ने माशीरकर को बताया कि इन कागजातों का इस्तेमाल सरकारी नौकरी पाने, कॉलेज में एडमिशन लेने और नौकरी में तरक्की पाने की चाह रखने वाले लोगों की जरूरत के मुताबिक जाली डिग्री तैयार करने में किया जाता है। इसके बदले में ग्राहकों से 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूली जाती है। गौरकर का यह जवाब सुनकर माशीरकर का संदेह और गहरा गया। उसने तुरंत थैली खोलकर खुद जांच की तो उसमें कई विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां और प्रमाणपत्र देखकर हैरान रह गया। माशीरकर ने बिना देरी किए इसकी जानकारी दुर्गापुर पुलिस को दी। पुलिस बल की मौजूदगी में जब थैली को खोला गया, तो उसमें से जाली दस्तावेजों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ।
नामी विश्वविद्यालयों के नाम पर बने जाली प्रमाणपत्र और मुहरें
दुर्गापुर पुलिस द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों का दायरा बेहद व्यापक और चौंकाने वाला है। बरामद शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में महाराष्ट्र और मध्य भारत के प्रमुख संस्थानों के नाम दर्ज हैं। इनमें राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय, सोलापुर विश्वविद्यालय और गोंडवाना विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा राजस्थान की श्रीधर यूनिवर्सिटी पिलानी, उत्तर प्रदेश का छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर और कर्नाटक राज्य के एक विश्वविद्यालय के नाम से तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।
जांच अधिकारियों ने बताया कि गिरोह द्वारा तैयार किए गए इन दस्तावेजों में फर्जी डिग्रियां, स्नातक व स्नातकोत्तर की सेमेस्टर मार्कशीट, विभिन्न डिप्लोमा सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट शामिल हैं। इन प्रमाणपत्रों को असली जैसा रूप देने के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों की जाली मुहरों और वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया था। इस स्तर की जालसाजी देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं क्योंकि आम आंखों से असली और नकली का फर्क पहचानना बेहद कठिन था।
मुख्य आरोपी वकील फरार, बैंक खातों में मिले करोड़ों के लेनदेन
पुलिस ने इस गिरोह की पड़ताल करते हुए वैभव सोनुले नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि वैभव सोनुले 12वीं कक्षा तक पढ़ा हुआ है और वह मुख्य आरोपी परिमल गौरकर का रिश्तेदार है। दूसरी ओर, फरार मुख्य आरोपी परिमल गौरकर पैसे से वकालत करता है और वह अपने कानूनी ज्ञान का इस्तेमाल इस अवैध नेटवर्क को चलाने में कर रहा था। पुलिस की टीमें अब गौरकर के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
आर्थिक जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के वित्तीय साम्राज्य के ठोस सुराग मिले हैं। मुख्य आरोपी परिमल गौरकर के नाम पर कैनरा बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक सहित चार अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी मिली है। इन बैंक खातों में पिछले कुछ समय के दौरान करोड़ों रुपये का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन दर्ज किया गया है। पुलिस इन सभी बैंक खातों को खंगाल रही है ताकि अवैध कमाई के स्रोत और पैसे भेजने वाले खरीदारों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही, आरोपियों द्वारा अन्य लोगों के नाम पर खरीदी गई 3 से 4 चारपहिया गाड़ियों की जानकारी मिली है, जिनमें से कुछ वाहनों को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। नागपुर शहर में करोड़ों रुपये की लागत वाले एक महंगे फ्लैट का भी पता चला है, जिसकी बेनामी संपत्ति के रूप में जांच की जा रही है।
सरकारी नौकरी और दाखिलों में जाली डिग्री का इस्तेमाल, जांच जारी
दुर्गापुर पुलिस थाने में इस संबंध में उपयुक्त धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। यह पूरी तफ्तीश पुलिस निरीक्षक संतोष शेगावकर के कुशल मार्गदर्शन में पुलिस उपनिरीक्षक रविंद्र नक्कनवार द्वारा आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस को यह गंभीर आशंका है कि यह नेटवर्क सिर्फ कागजात छापने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए कई अयोग्य अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था में सेंध लगाई हो सकती है।
पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इन फर्जी डिग्रियों के दम पर कितने लोगों ने विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरियां हासिल की हैं, उच्च शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन पाया है या विभागों में प्रमोशन लिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे फरार आरोपी की गिरफ्तारी होगी और बैंक खातों का फॉरेंसिक ऑडिट पूरा होगा, वैसे-वैसे इस फर्जी डिग्री रैकेट में शामिल कई बड़े नामों, बिचौलियों और फर्जी डिग्री के दम पर नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के नाम सामने आने की संभावना है।



















